जामताड़ा: नियुक्ति पत्र मिला, अगले दिन रिटायर हुए शिक्षक नंदलाल रवानी, भावुक कर देने वाली कहानी
Jamtara: Teacher Nandlal Ravani received
Jamtara: Teacher Nandlal Ravani received, जामताड़ा जिले के करमाटांड़ प्रखंड अंतर्गत तेतुलबंधा गांव निवासी सहायक शिक्षक नंदलाल रवानी के साथ एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसने नियुक्ति प्रक्रिया की समयबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्हें 29 जून को मुख्यमंत्री के हाथों सहायक शिक्षक का नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन इसके अगले ही दिन 30 जून को वह सेवानिवृत्त (रिटायर) भी हो गए। ऐसे में उनकी नई नियुक्ति महज एक औपचारिकता बनकर रह गई।
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भावुक नंदलाल रवानी ने कहा कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद उन्हें शिक्षक बनने का अवसर तो मिला, लेकिन उसका लाभ उठाने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि अब यह नियुक्ति पत्र केवल उनकी फाइलों में सिमटकर रह जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेवा देने का अवसर ही नहीं मिला तो इस नियुक्ति का क्या औचित्य है।

2006 में पारा शिक्षक बने थे नंदलाल
नंदलाल रवानी ने बताया कि 26 जून 2006 को वे उत्क्रमित मध्य विद्यालय तेतुलबंधा में पारा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा के साथ उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा और वर्ष 2013 व 2016 में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण की।
इसके बाद वर्ष 2023 में सहायक शिक्षक नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला। उन्होंने आवेदन किया और 23 जून 2025 को उनकी काउंसलिंग भी पूरी हो गई।
इसके बावजूद नियुक्ति पत्र मिलने में लगभग एक वर्ष का समय लग गया। आखिरकार 29 जून 2026 को उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा गया, लेकिन 30 जून को उनकी सेवानिवृत्ति हो गई।
अधूरा रह गया सपना
उन्होंने कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी कर ली जाती तो उन्हें नए पद पर कुछ वर्षों तक सेवा देने का अवसर मिलता। वे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और अपने अनुभव का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने का सपना देखते थे, लेकिन वह सपना अधूरा रह गया।
नंदलाल रवानी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि चूंकि नियुक्ति में हुई देरी के कारण उन्हें सेवा का अवसर नहीं मिला, इसलिए नियमानुसार उन्हें आर्थिक सहायता अथवा अन्य उपयुक्त लाभ दिया जाए, ताकि भविष्य में उनके जीवन-यापन में सहूलियत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यदि कुछ समय पहले नियुक्ति मिल जाती तो वे पूरी निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षा प्रदान करते और अपने लंबे अनुभव का लाभ समाज को दे पाते।
अपने पारिवारिक हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। एक बेटी की शादी हो चुकी है, एक बेटा दिव्यांग है, जबकि सबसे छोटा बेटा सरकारी विद्यालय में कक्षा आठवीं का छात्र है।
उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें इस नियुक्ति से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अंतिम समय में मिली नियुक्ति उनके लिए केवल एक दस्तावेज बनकर रह गई। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी परिस्थितियों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी।