एसवाईएल पर पंजाब के साथ बैठक नहीं करेगा हरियाणा
एसवाईएल पर पंजाब के साथ बैठक नहीं करेगा हरियाणा

एसवाईएल पर पंजाब के साथ बैठक नहीं करेगा हरियाणा

एसवाईएल पर पंजाब के साथ बैठक नहीं करेगा हरियाणा

मसला सुलझाने को टालू रवैये पर केंद्र को लिखेंगे पत्र

सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करवाएगा हरियाणा

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार एसवाईएल के मुद्दे पर अब पंजाब के साथ कोई बातचीत नहीं करेगी। पंजाब सरकार के टालू रवैये के बारे में न केवल केंद्र को अवगत कराया जाएगा बल्कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करवाने के लिए भी वरिष्ठ अधिवक्ताओं से राय की जाएगी। 
विधानसभा में इनेलो विधायक अभय चौटाला तथा नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अब समय आ गया जब सरकार को गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाने होंगे। विपक्ष के कई विधायकों ने सरकार पर इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप भी लगाया। 
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज सदन में एसवाईएल के संबंध में रिपोर्ट पेश की जिसके बाद सभी दलों ने यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि एक नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आने के बाद पंजाब ने इस फैसले पर रिव्यू पटीशन दायर कर दी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को निर्देश दिए किए वह आपस में बातचीत के माध्यम से इस विवाद का हल करें और केंद्र सरकार इसमें मध्यस्थता करेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल के दौरान दो बार दोनों राज्यों में गृह सचिव तथा अधिकारियों की बैठक हुई। इसके बाद केंद्रीय जन शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत द्वारा मध्यस्थता किए जाने के बाद उन्होंने खुद अमरिंदर सिंह के साथ बैठक की थी। इस बैठक में पंजाब ने दो सप्ताह का समय मांगा था।
तय समय सीमा के बाद केंद्र ने जब बैठक के बुलाया तो पंजाब का कोई भी अधिकारी नहीं आया। पंजाब कई बार टाल चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के अधिकारियों को यह पता है कि इस मामले में हरियाणा का पक्ष मजबूत है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के पक्ष में आ चुका है। जिसे लागू करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब हरियाणा इस मामले में पंजाब के साथ कोई बात नहीं करेगा न ही किसी तरह की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूरे घटनाक्रम से वाकिफ है। इसलिए अब हरियाणा ने आर-पार की लड़ाई लडऩे का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री को पत्र लिखा जाएगा। यही नहीं सरकार को अगर जरूरत पड़ी तो वकीलों का एक पैनल बनाकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूती के साथ केस की पैरवी करवाकर जल्द से जल्द एसवाईएल का पानी लिया जाएगा।