Woman sentenced to one year in prison for bouncing cheque fशराब व वाइन शॉप के किराए के चेक बाउंस मामले में महिला को एक साल की सजा, 6% ब्याज सहित भुगतान का आदेश

शराब व वाइन शॉप के किराए के चेक बाउंस मामले में महिला को एक साल की सजा, 6% ब्याज सहित भुगतान का आदेश

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शराब व वाइन शॉप के किराए के एवज में दिए गए 1 लाख 94 हजार 400 रुपये के चेक के बाउंस होने के मामले में अदालत ने दोषी महिला संगीता को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी को शिकायतकर्ता को पूरी चेक राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने के आदेश भी दिए हैं।

मामले में दोषसिद्धि के बाद दोषी की ओर से अपील दायर करने की मंशा जताई गई, जिस पर अदालत ने उसकी सजा पर 30 दिनों के लिए रोक लगा दी। इस अवधि के दौरान दोषी को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि तय अवधि के भीतर ऊपरी अदालत से कोई राहत नहीं मिलती, तो दोषी को सजा भुगतने के लिए दोबारा अदालत में पेश होना होगा।

क्या है पूरा मामला

मामले में शिकायतकर्ता पायल गुप्ता ने अदालत में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया कि सेक्टर-20C स्थित SCO नंबर-3 की ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर की जगह को शराब व वाइन शॉप के संचालन के लिए किराए पर दिया गया था। इस किराए के भुगतान के एवज में दोषी संगीता ने 7 जून 2021 को 1,94,400 रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंपा था।

जब शिकायतकर्ता द्वारा उक्त चेक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया, तो वह खाता धारक द्वारा भुगतान रोकने (Payment Stopped by Drawer) के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने नियमानुसार दोषी को कानूनी नोटिस भेजकर निर्धारित समय के भीतर राशि का भुगतान करने को कहा, लेकिन इसके बावजूद दोषी की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया।

नोटिस के बाद पहुंचा मामला अदालत

कानूनी नोटिस के बावजूद चेक की राशि का भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने मजबूर होकर अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चेक, बैंक मेमो, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए।

सुनवाई के दौरान दोषी संगीता ने चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार कर लिए, लेकिन अपने बचाव में यह साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं कर सकी कि चेक किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए नहीं दिया गया था।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब दोषी स्वयं चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार कर चुकी है, तो कानून के तहत यह अनुमान लगाया जाता है कि चेक किसी वैध बकाया राशि के भुगतान के लिए ही जारी किया गया था। अदालत ने कहा कि दोषी यह साबित करने में असफल रही कि उस पर कोई देनदारी नहीं थी।

अदालत ने यह भी माना कि दोषी ने जानबूझकर भुगतान से बचने का प्रयास किया और शिकायतकर्ता को आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

22 अन्य मामलों में भी दोषसिद्ध

अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि दोषी संगीता को इससे पहले भी इसी प्रकार के 22 अन्य चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। हालांकि अदालत ने सभी मामलों में सजाओं को एक साथ (कनकरेंट) चलाने का आदेश दिया है, जिसके चलते दोषी को कुल मिलाकर एक वर्ष की सजा ही भुगतनी होगी।

मुआवजा देने के निर्देश

अदालत ने दोषी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1,94,400 रुपये की मूल चेक राशि के साथ-साथ चेक की तारीख से अब तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी राशि अपील की अवधि समाप्त होने के एक माह के भीतर जमा करानी होगी।