इथेनॉल सप्लाई विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश, E20 नीति पर बढ़ी कानूनी बहस
Supreme Court's major order on ethanol supply dispute
नई दिल्ली। Supreme Court's major order on ethanol supply dispute, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इथेनॉल सप्लाई आवंटन बढ़ाने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
जस्टिस एमएम सुदेश और शील नागू की बेंच ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में यथास्थिति का आदेश दिया। ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने उस पहले आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
समाचार एजेंसी पीटीआई के रिपोर्ट के अनुसार, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट का आदेश 20 प्रतिशत इथेनॉल-पेट्रोल ब्लेंडिंग की राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर सकता है।
बता दें कि भारत एक इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का पालन करता है, जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है, जिसे आमतौर पर E20 फ्यूल के रूप में जाना जाता है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या कहा?
इंडिया टुडे के अनुसार, सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक चल रहा प्रयोग है और नीति का असर अगले साल तक और स्पष्ट हो जाएगा। वेंकटरमणी ने कहा कि इथेनॉल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट अक्तूबर 2025 में पूरे हुए थे।
ब्लेंडिंग प्रोग्राम देश में पहले से ही एक विवाद का मुद्दा बन गया है, जिसमें लोग पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचने और फ्यूल एफिशिएंसी कम होने की बात रह रहे हैं। इस बीच सरकार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ब्लेंडिंग पेट्रोल को मैकेनिकल नुकसान से जोड़ने का कोई सबूत नहीं है।
कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया था?
यह मामला तब शुरू हुआ जब इथेनॉल बनाने वाली एक कंपनी ने इथेनॉल सप्लाई के कम आवंटन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
'लाइव लॉ' के अनुसार, डिस्टिलरी ने कहा कि प्लांट की प्रोडक्शन क्षमता 9.9 करोड़ लीटर है, लेकिन 2025-2026 में उन्हें सिर्फ 3.92 करोड़ लीटर का आवंटन मिला। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस पॉलिसी का विरोध करते हुए कहा कि अगर वे याचिकाकर्ता की अपील पर विचार करती हैं, तो इसके लिए खुद सरकारी पॉलिसी में बदलाव करना होगा।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने डिस्टिलरी का पक्ष लिया और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिया कि वे 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन बढ़ाने पर विचार करें।
क्या सरकार के E-20 प्लान की कोई समय-सीमा है?
सरकार ने 2022 में बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति में संशोधन किया और पेट्रोल में इथेनॉल की धीरे-धीरे ब्लेंडिंग करने की घोषणा की। लक्ष्य यह था कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को 2022-2023 में 12.06 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत और 2024-25 में (फरवरी 2025 तक) 17.98 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए। हालांकि सरकार पहले ही 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुकी है।
इथेनॉल की मात्रा को 85 प्रतिशत तक बढ़ायी जा सकती है- गडकरी
आधिकारिक नीति के अनुसार 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी ने सुझाव दिया है कि इथेनॉल की मात्रा को 85 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।