Kedarnath Landslide: केदारनाथ मार्ग पर लैंडस्लाइड; हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन

केदारनाथ मार्ग पर लैंडस्लाइड; हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF के साथ NDRF ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

Uttarakhand Kedarnath Dham Marg Landslide Pilgrims Evacuated Safely

Uttarakhand Kedarnath Dham Marg Landslide Pilgrims Evacuated Safely

Kedarnath Marg Landslide: उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की यात्रा जारी है। इस बीच देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करने के लिए धाम पर पहुंच रहे हैं। दिन-प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इस दौरान केदारनाथ मार्ग से एक हादसे की खबर सामने आई है। मंगलवार की रात केदारनाथ मार्ग पर अचानक लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हुआ। जिसमें पानी के सैलाब के साथ पहाड़ी मलबा मार्ग पर आ गया। इस बीच हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचाया गया। राहत की बात ये है कि किसी भी श्रद्धालु के हताहत होने की सूचना नहीं है। वहीं लैंडस्लाइड होने से केदारनाथ यात्रा मार्ग बाधित रहा।

रातभर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

उत्तराखंड पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 मई की रात तेज बारिश के कारण सोनप्रयाग-गौरीकुंड मार्ग पर तीन स्थानों पर भूस्खलन होने से केदारनाथ यात्रा मार्ग अवरुद्ध हुआ। मार्ग बाधित होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु रास्ते में फंस गए। जहां तेज बारिश के बीच जिला प्रशासन और पुलिस ने तत्परता के साथ श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। रातभर चले रेस्क्यू अभियान से हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। पुलिस-प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।

चुनौतीपूर्ण स्थिति के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन

लैंडस्लाइड की सूचना मिलते ही SDRF सोनप्रयाग टीम तुरंत आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके के लिए रवाना हो गई थी। वहीं जिला प्रशासन और पुलिस टीम के अलावा NDRF की टीम भी मौके पर पहुंची। मौके पर SDRF एवं NDRF की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। रात का समय, खराब मौसम, पहाड़ी क्षेत्र में लगातार गिरता मलबा तथा यात्रियों की भारी भीड़ के कारण स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण भी बनी रही। लेकिन जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भी सूझबूझ से SDRF और NDRF ने 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया।

केदारनाथ मार्ग फिर से बहाल

उत्तराखंड पुलिस (Uttarakhand Police) ने जानकारी दी है कि प्रशासन ने रात भर चले अभियान के बाद यात्रा मार्ग पर आवागमन बहाल कर दिया है। यानि पैदल मार्ग बहाल कर यात्रा पुनः सुचारु रूप से शुरू हो गई है। वहीं मार्ग पर अभी जहां भी थोड़ी बहुत दिक्कत है उसे दूर करने के लिए प्रयास जारी है। अभी भी पुलिस, SDRF, NDRF, DDRF की टीमें मौके पर हैं। पैदल यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

श्रद्धालुओं के जारी की गई सलाह

केदारनाथ धाम जाने को लेकर पैदल आवागमन कर रहे श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वह अतिरिक्त सतर्कता बरतें। उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि श्रद्धालु अपनी चारधाम यात्रा को मौसम के अनुरूप ही आगे बढ़ाएं और अपनी सुरक्षा का खास ध्यान रखकर सावधानी से यात्रा करें। वहीं श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे पर्वतीय मार्गों पर प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अवश्य करें। श्रद्धालु कतार व्यवस्था बनाए रखें तथा पुलिस एवं प्रशासन का सहयोग करें। सभी की सहभागिता से ही केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाया जा सकता है।

अब तक कितने श्रद्धालुओं ने केदारनाथ के दर्शन किए?

केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होने के बाद देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक लगभग 6.5 लाख से ज्यादा लोग केदारनाथ धाम की यात्रा पूरी कर चुके हैं। दिवाली तक केदारनाथ के दर्शन के लिए कपाट खुले रहेंगे। ऐसे में शिव भक्त अगले करीब 6 महीने तक दर्शन कर सकते हैं। वहीं जून से अगस्त के बीच मौसम ठीक रहा तो इस बार 25 लाख से ज्यादा लोगों के केदारनाथ धाम पहुंचने का अनुमान है। आपको बता दें कि, केदारनाथ धाम के साथ-साथ गंगोत्री, यमुनोत्री और बद्रीनाथ धाम धाम के कपाट भी खुल चुके हैं। लेकिन केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

22 अप्रैल को खुले थे केदारनाथ के कपाट

इस साल 2026 में 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण, शिव तांडव पाठ, शंखनाद और पुष्प वर्षा के बीच केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पावन अवसर पर उपस्थित रहे और पूजा में शामिल हुए। वहीं कपाट खुलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा-अर्चना की गई। इधर कपाट खुलते ही पूरी केदार घाटी 'हर-हर महादेव' और 'जय केदार' के जयकारों से गूंज उठी। धाम में पहले दिन ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी थी। पहले ही दिन करीब 38 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया था।

51 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजा मंदिर

कपाट खुलने के पावन मौके पर केदारनाथ मंदिर और धाम को बहुत ही भव्य तरीके से सजाया गया था। लगभग 51 क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से पूरे मंदिर और धाम को सजाया गया। केदारनाथ धाम की शोभा और प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बन रही थी और मन को मोह लेने वाली थी। आपको बता दें कि केदारनाथ धाम में व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए मंदिर समिति ने मुख्य परिसर में मोबाइल फोन ले जाने और वीडियो रिकॉर्डिंग बनाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके अलावा मुख्य मंदिर परिसर में कुछ और कार्यों को किए जाने पर भी प्रतिबंध है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है की वे धाम की पवित्रता को बनाए रखें।

केदारनाथ सहित चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण जरूरी

अगर आप केदारनाथ सहित चार धाम यात्रा पर जाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए अपना पंजीकरण कराना जरूरी है. चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। बता दें कि, चार धाम की यात्रा के दौरान आपको हेलीकॉप्टर की सुविधा भी मिलती है। इसके लिए पहले से ही बुकिंग करानी पड़ती है। हेलीकॉप्टर सेवा के लिए आप IRCTC हेलीयात्रा के जरिए अपनी टिकट बुक कर सकते हैं। लेकिन आपको यह सलाह है कि चार धाम यात्रा का पंजीकरण कराते समय सतर्क रहें। आप ऑनलाइन ठगी का शिकार भी हो सकते हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम

भगवान शिव के केदारनाथ धाम की महिमा अद्भुत और अलौकिक है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक केदारनाथ धाम है। यहां भगवान भोलेनाथ 5वें ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव ने पांडवों को बैल के रूप में दर्शन दिए थे। केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडव राजा जनमेजय ने करवाया था। वहीं 8वीं और 9वीं सदी में जगतगुरु आदि शंकराचार्य ने इस भव्य मंदिर का जिर्णोद्धार निर्माण कराया था।

केदारनाथ जल प्रलय याद है

आपको याद है कि किस तरह से साल 2013 में 16-17 जून की रात को बादल फटने की वजह से केदारनाथ में जल प्रलय हुई थी। इस जल प्रलय में नदियों में विहंगम उफान के साथ तमाम पहाड़ भी टूटे थे। जिन्होंने पानी के साथ बहकर भारी तबाही मचाई थी। केदारनाथ जल प्रलय में पानी और बड़े-बड़े पत्थरों की चपेट में आकर सैकड़ों लोग मारे गए थे। यह जल प्रलय ऐसी थी कि मकान और वाहन कागज़ की तरह पानी में बहते नजर आ रहे थे।

हालांकि, भयानक जल प्रलय से भी केदारनाथ मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंच सका था। मगर इस जल प्रलय के बाद केदारनाथ धाम को दोबारा बनाना पड़ा। वहां फिर से व्यवस्थाएं स्थापित करनी पड़ीं। आज भी जब केदारनाथ धाम की वो रात याद आती है तो लोग कांप जाते हैं। इस आपदा के बाद धाम में लोगों की संख्या में कमी भी देखी गई थी। लेकिन अब फिर से लोग बड़ी संख्या में बाबा केदार के दर पर पहुंच रहे हैं।