उत्तर प्रदेश को भारत का हाई-टेक सेंटर बनाने की दिशा में बड़ा कदम: सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन

A Major Step Towards Making Uttar Pradesh

A Major Step Towards Making Uttar Pradesh

लखनऊ। A Major Step Towards Making Uttar Pradesh, उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का देश में सबसे बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024' में संशोधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। राज्य सरकार का मानना है कि तेजी से बदलते वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य और विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ते कॉम्पिटिशन को देखते हुए नीति को अपग्रेड करना बेहद जरूरी हो गया था।

संशोधन की वजह और केंद्र से सामंजस्य

इस नीतिगत बदलाव के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना चाहती है। यह नीति मूल रूप से 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित की गई थी और इसकी कुल अवधि 5 वर्षों की है। नए संशोधनों के बाद यह नीति अब निवेशकों की जरूरतों के लिहाज से अधिक लचीली और इन्वेस्टर-फ्रेंडली (इन्वेस्टर अनुकूल) हो गई है, जिससे वैश्विक स्तर की बड़ी चिप निर्माता कंपनियां यूपी का रुख करेंगी।

सरकार पर वित्तीय बोझ नहीं और कड़े नियम

कैबिनेट के इस फैसले की सबसे खास बात यह है कि नीति को आकर्षक बनाने के बावजूद राज्य सरकार के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। वहीं, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आने वाले निवेश स्थायी हों; इसके तहत लाभ लेने वाले निवेशकों को परियोजना में कमर्शियल प्रोडक्शन (वाणिज्यिक उत्पादन) शुरू होने की तारीख से कम से कम 3 वर्षों तक उत्पादन का संचालन अनिवार्य रूप से जारी रखना होगा।

प्रदेश के विकास पर असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर नीति में हुए इस समयबद्ध सुधार से उत्तर प्रदेश न केवल तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि राज्य में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। मोबाइल, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए जरूरी चिप्स का निर्माण अब सीधे यूपी की धरती पर होने का रास्ता साफ हो गया है।