आज का पंचांग (14 मई 2026): गुरु प्रदोष व्रत का शुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

आज का पंचांग (14 मई 2026): गुरु प्रदोष व्रत का शुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

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Today's Panchang (May 14, 2026

एस्ट्रोपत्री। Today's Panchang (May 14, 2026):वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 14 मई गुरु प्रदोष व्रत (Guru Pradosh Vrat) किया जा रहा है। त्रयोदशी तिथि पर गुरुवार का दिन पड़ रह है। इसलिए आज गुरु प्रदोष व्रत का बेहद शुभ संयोग बना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन महादेव की साधना करने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

आज शाम को चंद्रदेव का मीन राशि से मेष राशि में गोचर होगा। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल (Aaj ka Panchang 14 May 2026) का समय समेत आदि जानकारी।

तिथि: कृष्ण द्वादशी
मास: ज्येष्ठ
दिन: गुरुवार
संवत्: 2083

तिथि: कृष्ण द्वादशी – प्रातः 11 बजकर 20 मिनट तक, फिर त्रयोदशी
योग: प्रीति – सायं 05 बजकर 53 मिनट तक, फिर आयुष्मान
करण: तैतिल – प्रातः 11 बजकर 20 मिनट तक
करण: गरज – रात्रि 10:00 बजे तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 31 मिनट तक
सूर्यास्त का समय: सायं 07 बजकर 04 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: प्रातः 04:00 मिनट (15 मई)
चंद्रास्त का समय: सायं 04 बजकर 23 मिनट तक

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: मेष राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मीन राशि में स्थित हैं (रात्रि 10:34 बजे तक, फिर मेष)

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
अमृत काल: रात्रि 08 बजकर 20 मिनट से रात्रि 09 बजकर 49 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से दोपहर 03 बजकर 41 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 08 बजकर 54 मिनट से प्रातः 10 बजकर 36 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 05 बजकर 31 मिनट से प्रातः 07 बजकर 13 मिनट तक

आज का नक्षत्र

रेवती नक्षत्र: रात्रि 10 बजकर 34 मिनट तक, फिर अश्विनी
स्थान: 16°40’ मीन राशि से 30° मीन राशि तक
नक्षत्र स्वामी: बुधदेव
राशि स्वामी: बृहस्पतिदेव
देवता: पूषा (पोषण करने वाले देवता)
प्रतीक: मछली
सामान्य विशेषताएं: अंतर्ज्ञानी, चतुर, ईमानदार, साहसी, आकर्षक, चंचल, कानूनप्रिय, आशावादी, खुशमिजाज, सुंदर, समृद्ध, बुद्धिमान, सदाचारी, शिक्षित

गुरु प्रदोष व्रत 2026

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11 बजकर 20 मिनट
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08 बजकर 31 मिनट
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 04 मिनट से रात 09 बजकर 09 मिनट

जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार को आती है, तो उसे गुरु प्रदोष कहते हैं। यह पावन दिन महादेव की कृपा और देवगुरु बृहस्पति के आशीर्वाद का महासंगम है। देखा जाए तो यह व्रत जातक को आध्यात्मिक ज्ञान, उत्तम शिक्षा और संतान सुख की प्राप्ति कराता है।
बृहस्पति देव हमारे जीवन में धन और धर्म का संचालन करते हैं। विशेष रूप से आज शिव आराधना करने से भाग्य का साथ मिलता है और अटके काम सिद्ध होते हैं।