Tata Sons के चेयरमैन चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार पर फैसला टला, बोर्ड में एकमत नहीं; जानिए वजह
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Tata Sons के चेयरमैन चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार पर फैसला टला, बोर्ड में एकमत नहीं; जानिए वजह

Chandrasekaran a Third Term

Chandrasekaran a Third Term

मुंबई : Chandrasekaran a Third Term: विविध कारोबार वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने के बारे में मंगलवार को फैसला टाल दिया. सूत्रों ने शीर्ष स्तर पर कुछ मतभेद उभरने के संकेत देते हुए यह जानकारी दी.

सूत्रों ने कहा कि टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में चंद्रशेखरन के फरवरी, 2027 में समाप्त होने जा रहे मौजूदा कार्यकाल को बढ़ाने पर कोई फैसला नहीं लिया गया.

बैठक के बाद कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे नुकसान पर चिंता जताई.

सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा आने वाले समय में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने के भी पक्ष में नहीं हैं और इस संबंध में वह लिखित प्रतिबद्धता चाहते हैं.

हालांकि, 62 वर्षीय चंद्रशेखरन को निदेशक मंडल के कई सदस्यों का समर्थन मिला। उनका मानना था कि समूह की किसी एक कंपनी के नुकसान से पूरे समूह के प्रदर्शन या चेयरमैन के योगदान को नहीं आंका जाना चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक, कुछ निदेशकों ने इस पर मतदान की मांग की, लेकिन चंद्रशेखरन ने निर्णय टालने का आग्रह किया.

चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और वह बाद में समूह की आईटी कंपनी टीसीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) बने। फरवरी, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था.

उनके कार्यकाल में समूह की 15 प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों का राजस्व और मुनाफा लगभग दोगुना हुआ है. उनके नेतृत्व में समूह ने भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई की योजना को आगे बढ़ाया, घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण किया और कृत्रिम मेधा (एआई) से उपजे व्यवधानों के बीच टीसीएस के संचालन को दिशा दी.

वर्ष 1868 में जमशेदजी नुसेरवानजी टाटा द्वारा स्थापित यह समूह लंबे समय तक टाटा परिवार के नेतृत्व में रहा। रतन टाटा के 2012 में चेयरमैन पद से हटने के बाद शापूरजी पलोनजी समूह के साइरस मिस्त्री को कमान सौंपी गई थी। लेकिन वर्ष 2016 में निदेशक मंडल में मतभेद गहराने के बाद मिस्त्री को पद से हटा दिया गया था.

टाटा ट्रस्ट के पास 66 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण समूह के रणनीतिक और कामकाज संबंधी निर्णयों पर उसका निर्णायक प्रभाव रहता है. टाटा संस उपभोक्ता वस्तुओं, वाहन, सूचना प्रौद्योगिकी और विमानन सहित करीब 30 परिचालन कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है.