ऑपरेशन सिंदूर: चीन के दखल पर भारत का कड़ा प्रहार, विदेश मंत्रालय ने कहा— "आतंकवाद को बचाने वाले अपनी साख की चिंता करें"
Operation Sindoor: India's Strong Retaliation Against Chinese Interference
Operation Sindoor: India's Strong Retaliation Against Chinese Interference, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कथित समर्थन देने के मुद्दे पर चीन को कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह सोचना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने की कोशिशों का उनकी अंतरराष्ट्रीय साख और प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह टिप्पणी की। उनसे चीन के उस बयान को लेकर सवाल पूछा गया था, जिसमें पहली बार यह स्वीकार किया गया कि मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने पाकिस्तान को जमीनी स्तर पर सहायता प्रदान की थी।
'जो पहले से पता था, वही अब रिपोर्ट में सामने आया'
रणधीर जायसवाल ने कहा, ''हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो उन बातों की पुष्टि करती हैं, जिनकी जानकारी पहले से थी। जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें यह जरूर सोचना चाहिए कि आतंकवादी बुनियादी ढांचे को बचाने के प्रयासों का उनकी प्रतिष्ठा और वैश्विक छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है।"
उन्होंने कहा कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह 'सटीक, लक्षित और संतुलित' कार्रवाई थी।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
MEA प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था।
उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान से संचालित और उसके समर्थन प्राप्त आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने के उद्देश्य से चलाया गया एक सटीक और लक्षित अभियान था।"
भारत ने 6 और 7 मई 2025 की मध्य रात्रि पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी।
पाकिस्तान के सीजफायर अनुरोध के बाद रुका संघर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच यह सैन्य तनाव 10 मई को उस समय थमा, जब इस्लामाबाद ने नई दिल्ली से युद्धविराम की अपील की। भारत ने इस अनुरोध को स्वीकार किया, लेकिन सरकार लगातार यह कहती रही है कि ऑपरेशन सिंदूर को केवल 'रोक' दिया गया है, समाप्त नहीं किया गया।
भारतीय सेना ने पहले ही किया था खुलासा
4 जुलाई को लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि संघर्ष के दौरान चीन पाकिस्तान को लगातार जानकारी उपलब्ध करा रहा था।
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, "जब डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी, तब पाकिस्तान को चीन की तरफ से हमारी सैन्य तैनाती से जुड़ी लाइव जानकारी मिल रही थी। यह ऐसा क्षेत्र है जहां हमें तेजी से कदम उठाने और उचित कार्रवाई करने की जरूरत है।"
राहुल सिंह ने यह भी बताया था कि तुर्किये ने पाकिस्तान को Bayraktar ड्रोन उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल संघर्ष के दौरान किया गया।
चीनी मीडिया रिपोर्ट में भी हुआ खुलासा
हाल ही में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने उन इंजीनियरों का इंटरव्यू प्रसारित किया, जो चीन के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और ड्रोन विकसित करने वाली संस्था Chengdu Aircraft Design and Research Institute से जुड़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियर झांग हेंग ने स्वीकार किया कि उन्होंने संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ काम किया था।
झांग हेंग ने कहा, "सपोर्ट बेस पर लगातार लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनाई देती थीं और एयर-रेड सायरन बजते रहते थे। दोपहर तक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता था। यह शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति थी।"