झारखंड में सांसद विकास निधि: खर्च में कमी और विकास की धीमी गति
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झारखंड में सांसद विकास निधि: खर्च में कमी और विकास की धीमी गति

MP Development Fund in Jharkhand

MP Development Fund in Jharkhand

रांची। MP Development Fund in Jharkhand, झारखंड में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत राज्य के 19 सांसदों को मार्च 2026 तक करीब 225.8 करोड़ आवंटित हुए, लेकिन इनमें से केवल 122.8 करोड़ (54.4%) ही खर्च हो सके हैं।

इसका सीधा मतलब है कि लगभग 103 करोड़ अब भी अप्रयुक्त पड़े हैं, जो विकास की गति पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। सांसद विकास निधि खर्च करने में राज्यसभा सदस्य सह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू शीर्ष पर हैं।

जबकि झामुमो की राज्यसभा सदस्य महुआ माजी उन्हें प्रदर्शन के मोर्चे पर टक्कर दे रहीं हैं।
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की निगरानी में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 596 कार्य पूरे हुए हैं।

जबकि कुल परियोजनाओं की पूर्णता दर मात्र 13.9% है। यह स्थिति झारखंड को कम उपयोग दर वाले राज्यों की श्रेणी में खड़ा करती है।

झारखंड नौंवे पायदान पर

सांसद विकास निधि के उपयोग में झारखंड देशभर में नौवें पायदान पर है। जबकि नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर है।

सांसद विकास निधि योजना के तहत प्रत्येक सांसद को हर वर्ष पांच करोड़ की राशि मिलती है, जिसे दो किस्तों ढ़ाई-ढ़ाई करोड़ में जारी किया जाता है।

झारखंड के आंकड़े बताते हैं कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग अपेक्षित स्तर तक नहीं हो पा रहा है।

इन आंकड़ों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेहतर और खराब प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।

भाजपा, झामुमो और कांग्रेस तीनों दलों के सांसदों में टाप और लो-परफार्मर शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि समस्या दल की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं और कार्यशैली की है।

सांसदों का प्रदर्शन देखें 

आदित्य साहू – 85.86%
महुआ मांझी – 83.97%
दीपक प्रकाश – 82.06%
संजय सेठ – 81.75%
सुखदेव भगत – 75.55%
विद्युत वरण महतो – 74.07%
काली चरण मुंडा – 71.41%
प्रदीप वर्मा – 65.28%
नलिन सोरेन – 64.67%
बीडी राम – 49.30%
चंद्रप्रकाश चौधरी – 42.53%
डा. सरफराज अहमद – 39.98%
ढुल्लू महतो – 34.20%
जोबा मांझी – 28.90%
अन्नपूर्णा देवी – 25.01%
विजय हांसदा – 20.54%
कालीचरण सिंह – 10.90%
निशिकांत दूबे – 1.82%
मनीष जायसवाल – कोई खर्च नहीं

'डेड कैपिटल’ बना विकास का पैसा

करीब 103 करोड़ की अप्रयुक्त राशि डेड कैपिटल है। यह राशि अगर खर्च होती तो ग्रामीण सड़कों का निर्माण, स्कूलों का उन्नयन, पेयजल योजनाओं का विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती, जैसे कई क्षेत्रों में ठोस बदलाव संभव था।

फंड के कम उपयोग के पीछे भी कई कारण हैं। इसमें प्रस्ताव से स्वीकृति तक लंबी जटिल प्रक्रिया, प्राथमिकता का अभाव, समन्वय की कमी और जवाबदेही का अभाव है।