यूपी में प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों को बड़ी राहत, ओटीएस से ब्याज-सरचार्ज माफ, तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा

यूपी में प्रॉपर्टी टैक्स बकायेदारों को बड़ी राहत, ओटीएस से ब्याज-सरचार्ज माफ, तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा

Major relief for property tax defaulters in UP

Major relief for property tax defaulters in UP

यूपी सरकार प्रापर्टी टैक्स (गृहकर, जलकर और सीवरकर) के बकायेदारों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) की सुविधा देने जा रही है। इसके तहत मूल बकाया जमा करने पर ब्याज और सरचार्ज माफ कर दिया जाएगा। इसका मकसद राजस्व वसूली बढ़ाने, करदाताओं को राहत देने और सालों से लंबित विवादों का निस्तारण करना है।

प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरु प्रसाद ने सोमवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया। प्रदेश के 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायत कुल 762 नगरीय निकायों में ओटीएस की सुविधा दी जाएगी। इसमें गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकायेदारों को केवल मूल कर राशि जमा करनी होगी। योजना में ब्याज और सरचार्ज में शत प्रतिशत छूट मिलेगी, लेकिन यह तभी मिलेगी जब पूरा मूल बकाया जमा किया जाएगा।

15 दिसंबर तक चलेगी ओटीएस योजना

ओटीएस का लाभ आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग की सभी संपत्तियों पर एक अप्रैल 2026 तक के बकायों पर दिया जाएगा। व्यक्तिगत करदाताओं के साथ सरकारी विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी लाभ मिलेगा। राहत देने के लिए अधिकतम तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है। योजना लागू होने के 30 दिनों में कम से कम एक-तिहाई मूल बकाया जमा करना होगा, जबकि शेष राशि दो मासिक किस्तों में देनी होगी। तीन माह के भीतर पूरा भुगतान अनिवार्य रहेगा। ओटीएस योजना 15 अगस्त से 15 दिसंबर रहेगी। इसके लिए 15 अगस्त से 14 सितंबर तक नगरीय निकायों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार और बकायेदारों को सूचना देने का अभियान चलाया जाएगा।

ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन

योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से स्वीकार होंगे। नगरीय निकाय अपनी वेबसाइट या विशेष पोर्टल के माध्यम से आवेदन स्वीकार करेंगे। सहायता के लिए हेल्प डेस्क भी बनाई जाएगी। आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

पहले जमा धनराशि नहीं होगी वापस

स्पष्ट किया गया है कि योजना लागू होने से पहले आंशिक या पूर्ण बकाया जमा होने पर वापस नहीं किया जाएगा। निर्धारित अवधि में आवेदन लंबित रहते हैं या योजना का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।