कोडरमा: 24 घंटे में सुलझी अपहरण की गुत्थी; विधवा साली से शादी की चाहत में बहनोई ने ही रची थी साजिश

कोडरमा: 24 घंटे में सुलझी अपहरण की गुत्थी; विधवा साली से शादी की चाहत में बहनोई ने ही रची थी साजिश

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Koderma: Kidnapping mystery solved within 24 hours

कोडरमा। कोडरमा पुलिस ने एक नाबालिग बच्चे के अपहरण की गुत्थी 24 घंटे के अंदर सुलझाते हुए न सिर्फ नाबालिग बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है, बल्कि इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है।

मामले की जानकारी देते हुए एसपी कुमार शिवाशीष ने बताया कि तिलैया थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 24 से 14 वर्षीय बच्चे का बुधवार को बेलाटांड स्कूल से लौटने के क्रम में अपहरण कर लिया गया था, जिसे लेकर फिर तो बच्चे की बहन वीणा देवी ने तिलैया थाने में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

मामले के अनुसंधान को लेकर तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने सबसे पहले संदेह के आधार अपह्रत बच्चे के बहनोई सूरज यादव, पिता रामेश्वर यादव साकिन कुरमीडीह थाना जयनगर निवासी को पकड़ा।

जिससे पूछताछ में उसने बताया कि वह अपह्रत बच्चे की विधवा मंझली बहन से विवाह करना चाहता था और अभिभावकों पर दबाव बनाने के लिए उसने बच्चों का अपहरण किया।

उसकी निशानदेही पर अपहरण के बाद बच्चे को छिपा कर रखने वाले पिंटू कुमार पिंटु कुमार पिता गुरू चौधरी, घरहरा थाना मोहनपुर जिला गया निवासी और तिलैया थानाक्षेत्र के मोरियामा निवासी संतोष सिन्हा, पिता अलखदेव प्रसाद सिन्हा को भी गिरफ्तार करते हुए उनके पास से बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया।

इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता सूरज कुमार अपहर्ता बच्चे की बड़ी बहन का पति है और अपनी विधवा हो चुकी मंझली साली से शादी करने की चाहत रखता था।

दोस्तों के साथ रची साजिश

बहरहाल उसने बच्चे के अपहरण की साजिश अपने दोस्तों के साथ मिलकर की। पिंटु के साथ मिलकर सुरज ने बच्चे का अपहरण किया और उसके बाद अपने मित्र मोरियामा निवासी संतोष सिन्हा के घर पर उसे छिपाकर रखा।

एसपी कुमार शिवशीष ने बताया कि मामला दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर बच्चे के अपहरण की गुत्थी पुलिस ने सुलझाते हुए बच्चे को सकुशल बरामद किया है और कांड में शामिल सभी आरोपियों को पकड़ लिया है।

उन्होंने बताया कि आरोपितों के बीच फोन पर हुए बातचीत में यह बात सामने आई कि बहनोई समेत अन्य अपहरणकर्ता बात नहीं बनने की स्थिति में बच्चे की हत्या भी कर सकते थे।

गनीमत यह रही है कि पुलिस मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर समय रहते बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया।