16 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा, फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
Convict sentenced to 20 years of rigorous imprisonment
पंचकूला पुलिस की सशक्त पैरवी और वैज्ञानिक जांच से मिला पीड़िता को न्याय
पंचकूला/ 20 जुलाई:- Convict sentenced to 20 years of rigorous imprisonment, महिला एवं बाल अपराधों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में पंचकूला पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना कालका में वर्ष 2024 में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना तथा जुर्माना अदा न करने पर 6 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला महिला एवं बाल अपराधों के प्रति न्यायालय की संवेदनशीलता तथा पंचकूला पुलिस की प्रभावी जांच का प्रमाण है।
डीसीपी पंचकूला आईपीएस अदिति सिंह के अनुसार, 12 अप्रैल 2024 को थाना कालका में एक महिला ने अपनी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई थी, जिस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 365 के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने लगातार प्रयास कर 28 मई 2024 को नाबालिग को सकुशल बरामद किया। पीड़िता के बयान, मेडिकल परीक्षण तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 6 को शामिल किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के न्यायालय में धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज करवाए, मेडिकल एवं फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए तथा स्कूल रिकॉर्ड के माध्यम से पीड़िता की आयु का प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। वैज्ञानिक एवं तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय, पंचकूला ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
पंचकूला पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन ने कहा कि महिला एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में प्रत्येक शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक जांच, ठोस साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा, गतिविधियों और ऑनलाइन संपर्कों पर सतर्क निगरानी रखें तथा किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।