LPG सिलिंडर जाओ भूल! अब इथेनॉल से पकेगा खाना; गन्ने के रस वाले फ्यूल पर सब्सिडी भी देगी सरकार

LPG Alternative Ethanol

LPG Alternative Ethanol

LPG Alternative Ethanol: E-20 यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल अब देश में लागू हो गया है, जिसको लेकर घमासान मचा हुआ है. लोगों की शिकायत है कि इससे गाड़ी का इंजन और माइलेज प्रभावित हो रहा है. इस विवाद और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने अब इथेनॉल को आपकी किचन तक पहुंचाने की तैयारी कर ली है.

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए इथेनॉल को खाना पकाने में प्रयोग करने की योजना पर काम कर रहा है. इसके तहत केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 मई 2026 को नागपुर में स्वदेशी 'हाइड्रो-इथेनॉल कुकिंग स्टोव' (इथेनॉल आधारित स्टोव) का अनावरण किया.

यह स्टोव पानी और इथेनॉल के मिश्रण से जलता है. पानी में 7% इथेनॉल मिक्स करके प्रयोग किया जाएगा, जो एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले काफी सस्ता होगा. इससे देश की एलपीजी पर निर्भरता कम होगी और आयात घटेगा. माना जा रहा है कि किचन में इथेनॉल के पहुंचने से विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी.

हाइड्रो-इथेनॉल कुकिंग स्टोव के फायदे: हाइड्रो-इथेनॉल कुकिंग स्टोव को एक क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है, जो रसोई के खर्च को आधा करने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल होगी. यह स्टोव इथेनॉल और पानी के मिश्रण से नीली और तेज आंच पैदा करता है. इस स्टोव की रनिंग कॉस्ट सामान्य LPG सिलेंडर से काफी कम होने का अनुमान है. इसके इस्तेमाल से मासिक रसोई बजट में भारी बचत होगी.

इथेनॉल स्टोव महिलाओं के स्वास्थ्य के सुरक्षित: इथेनॉल मिक्स ईंधन साफ तरीके से जलता है, जिससे बर्तनों की तली काली नहीं होती. रसोई को साफ-सुथरा बनाए रखने में मदद मिलती है. इससे धुआं या जहरीली गैसें भी नहीं निकलती हैं, जिससे घर की हवा शुद्ध और महिलाओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है.

इथेनॉल स्टोव में LPG सिलेंडर की तरह फटने का खतरा नहीं: लिक्विड ईंधन पर आधारित होने के कारण इसमें LPG की तरह हाई-प्रेशर सिलेंडर फटने का कोई डर नहीं रहता, जो इसे परिवारों के लिए सुरक्षित बनाता है. इथेनॉल गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों से बनता है. इस स्टोव को अपनाने से किसानों की आय बढ़ेगी और भारत की विदेश से कच्चा तेल व गैस आयात करने पर निर्भरता कम होगी. इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी काफी आसान है.

देश में इथेनॉल का उत्पादन कितना: CareEdge की मई की रिपोर्ट के मुताबिक देश का इथेनॉल प्रोडक्शन सालाना 20 बिलियन लीटर से ज्यादा हो गया है. इस साल 4 बिलियन लीटर की अतिरिक्त क्षमता शुरू होने वाली है. सरकार के E20 (इथेनॉल-पेट्रोल) ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए सालाना खपत करीब 11 बिलियन लीटर है.

शराब बनाने वाली कंपनियों, दवा कंपनियों और केमिकल कंपनियों की सालाना खपत करीब 3-3.5 बिलियन लीटर है. इसके बाद करीब 7 बिलियन लीटर जो इथेनॉल बच जाता है उसका प्रयोग सरकार किचन के ईंधन के रूप में करना चाह रही है. इसके अलावा सरकार नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को इथेनॉल एक्सपोर्ट करने पर भी विचार कर रही है.

देश का एलपीजी आयात कितना: भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 से 65% हिस्सा विदेश से आयात करता है. देश में सालाना लगभग 3.3 करोड़ टन एलपीजी की खपत होती है. जो मासिक 15 से 17 लाख टन होता है.

भारत अपनी आयातित गैस का लगभग 90% हिस्सा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ओमान से मंगाता है. लेकिन, अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते मध्य पूर्व के देशों में आपूर्ति व्यवधान ने भारत में एलपीजी की क्राइसिस खड़ी कर दी थी. इसके देखते हुए भारत ने अमेरिकी एलपीजी का आयात बढ़ाकर जून 2026 में 10 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर को पार कर लिया.

24 अरब डॉलर की हो सकती है बचत: भारत इथेनॉल को एलपीजी के विकल्प के तौर पर देख रहा है. हालांकि, अभी तक भारत एलपीजी के लिए खाड़ी देशों और अमेरिका पर निर्भर है. लेकिन, इथेनॉल के प्रयोग से भारत इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन सकता है.

फरवरी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की रिपोर्ट में भी इस ओर इशारा किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-कुकिंग और बायोगैस का प्रयोग करके भारत 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर 2 लाख करोड़ रुपए यानी 24 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत कर सकता है.