HDFC Bank से जेफरीज का एग्जिट, बेच दीं सारी होल्डिंग्स; शेयर 3% फिसला

HDFC Bank से जेफरीज का एग्जिट, बेच दीं सारी होल्डिंग्स; शेयर 3% फिसला

Jefferies Replaces Lender With HSBC

Jefferies Replaces Lender With HSBC

नई दिल्ली: Jefferies Replaces Lender With HSBC: दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज कंपनी जेफरीज के एक बड़े फैसले ने आज भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग सेक्टर में खलबली मचा दी है. जेफरीज ने भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) को अपने प्रमुख निवेश पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है. इस खबर के बाहर आते ही शुक्रवार को एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 3% की बड़ी गिरावट देखी गई और शेयर का भाव गिरकर ₹758 के करीब पहुँच गया.

जेफरीज ने क्यों लिया यह फैसला?

जेफरीज के मुख्य रणनीतिकार क्रिस वुड अपनी 'ग्रीड एंड फियर' (Greed & Fear) रिपोर्ट के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने इस बार एचडीएफसी बैंक को अपने 'एशिया', 'ग्लोबल' और 'इंटरनेशनल' पोर्टफोलियो से पूरी तरह हटा दिया है. बैंक की जगह अब विदेशी बैंक HSBC को जगह दी गई है. हालांकि जेफरीज ने इसका कोई सीधा कारण नहीं बताया, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि यह फैसला बैंक के अंदर चल रहे इस्तीफों के विवाद से जुड़ा है.

इस्तीफे और नैतिकता का विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ में बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा है. उन्होंने 18 मार्च को अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि बैंक के कुछ काम करने के तरीके उनके "व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता" से मेल नहीं खाते. उन्होंने किसी घोटाले का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन 'नैतिकता' शब्द के इस्तेमाल ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया है. निवेशकों को डर है कि कहीं बैंक के अंदर कॉर्पोरेट गवर्नेंस (कामकाज के नियम) को लेकर कोई बड़ी समस्या तो नहीं है.

बाजार पर असर और निवेशकों की चिंता

पिछले एक महीने में एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 14% तक टूट चुका है. जेपी मॉर्गन जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के विश्लेषकों का कहना है कि जब तक यह साफ नहीं होता कि पूर्व चेयरमैन ने किन 'मूल्यों' की बात की थी, तब तक निवेशकों का भरोसा डगमगाया रहेगा. फिलहाल बैंक ने केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया है, लेकिन बाजार की नजरें अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सेबी (SEBI) की जांच पर टिकी हैं.

भारत का वेटेज भी घटा

जेफरीज ने न सिर्फ एचडीएफसी बैंक को निकाला, बल्कि भारत के बाजार में अपने कुल निवेश को भी 2% कम कर दिया है. जेफरीज अब भारत के बजाय ताइवान के बाजार पर ज्यादा भरोसा दिखा रहा है. एचडीएफसी बैंक के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है.