झारखंड के बड़े मामलों की जांच सीआईडी के हवाले, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सरकार की सख्ती

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Major cases in Jharkhand handed over to the CID

रांची। Major cases in Jharkhand handed over to the CID, झारखंड में हाल के लगभग सभी बड़े मामलों में सीआईडी को अनुसंधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य सरकार को सीआइडी पर पूरा भरोसा है। यही वजह है कि अवैध वेतन निकासी का मामला हो, रिम्स में फर्जी तरीके से नामांकन व टेंडर आवंटन में अनियमितता का मामला हो या फिर जेपीएससी मेधा घोटाला हो, सभी मामलों में सीआईडी पर भरोसा जताते हुए सरकार ने जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।

सरकार अपने ही अफसरों के विरुद्ध अनियमितता व भ्रष्टाचार के मामलों में जांच करा रही है। सीआईडी की जांच के क्रम में दो बड़े अधिकारियों ने इस्तीफा भी दे दिया है।

रिम्स के विरुद्ध जांच शुरू होते ही रिम्स के तत्कालीन निदेशक डाॅ. राजकुमार और अब जेपीएससी के विरुद्ध छापेमारी के दिन ही जेपीएससी के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया था।

हालांकि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कई मामले में सीआईडी जांच पर भी सवाल उठा चुके हैं। भाजपा सीबीआई जांच की मांग करती रहती है। वहीं राज्य सरकार पूरा भरोसा सीआईडी पर बना हुआ है। सभी मामलों में जांच जारी है और नतीजे पर सबकी नजर है।

ये हैं कुछ बड़े मामले, जिसकी सीआईडी कर रही है जांच-

अवैध वेतन निकासी मामला

राज्य में जिला कोषागार से अवैध वेतन निकासी मामले में राज्य सरकार के आदेश पर अब तक सीआईडी ने कुल सात जिलों में दर्ज कांडों को टेकओवर करते हुए केस री-रजिस्टर किया और जांच तेज की। कुल 17 आरोपित सलाखों के पीछे पहुंचाए जा चुके हैं।

जिन जिलों के मामले में जांच चल रही है उनमें बोकारो में पुलिस विभाग के खाते से 11 करोड़ की अवैध निकासी मामले में चार आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं। हजारीबाग में करीब 31 करोड़ रुपये की अवैध निकासी मामले में छह आरोपित जेल में हैं।

पश्चिमी सिंहभूम पुलिस विभाग के खाते से अवैध वेतन निकासी मामले में चार, रांची व रामगढ़ में पशुपालन विभाग के खाते से अवैध निकासी मामले में एक, देवघर से स्वास्थ्य विभाग से अवैध वेतन निकासी मामले में एक, खूंटी में एसआईआरबी के खाते से अवैध वेतन निकासी मामले में एक आरोपित को जेल भेजा जा चुका है।

जेपीएससी मेधा घोटाला 

राज्य सरकार के आदेश पर ही सीआइडी ने जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच तेज की है। 21 जुलाई को सीआईडी की एंट्री हुई थी। 22 जुलाई को सीआईडी ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की।

और तब से अब तक जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के पदाधिकारियों सहित इस मामले में आठ आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। जांच जारी है। जांच के क्रम में ही जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया है।

रिम्स में अनियमितता मामला

रिम्स में फर्जी नामांकन व सफाई व्यवस्था के टेंडर में अनियमितता मामले में सीआईडी की छापेमारी, दस्तावेज की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है। फर्जी प्रमाण पत्र पर नामांकन का मामला उजागर हो चुका है।

नियम व शर्तों को पूरा नहीं करने वाली एजेंसी को सफाइ व्यवस्था का टेंडर सौंपा गया था। मामला उजागर हो ही रहा था, इसी बीच रिम्स के तत्कालीन निदेशक डाॅ. राजकुमार ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, इस मामले में सीआइडी अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकी है।

तेतुलिया मौजा वन भूमि घोटाला

बोकारो में बहुचर्चित तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले में सीआईडी ने जांच के क्रम में फर्जीवाड़ा करने वाले फर्जी रैयतों, बिल्डर बंधुओं व पावर आफ अटार्नी लेने वाले को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच अभी जारी है।

कांके में जमीन घोटला

कांके में आदिवासी प्रकृति की जमीन के कागजात में हेराफेरी कर अवैध तरीके से खरीद-बिक्री मामले में जमीन माफिया कमलेश व उसके सहयोगियों के विरुद्ध सीआईडी ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इस मामले में भी सीआइडी की जांच चल रही है।

विभिन्न मुठभेड़ : राज्य में माओवादियों, अपराधियों के विरुद्ध मुठभेड़ की लगभग दर्जनभर मामलों की सीआईडी जांच चल रही है।