“मैं विक्रमशिला पुल हूं…”: भागलपुर के इस ऐतिहासिक सेतु की दर्दभरी कहानी

“मैं विक्रमशिला पुल हूं…”: भागलपुर के इस ऐतिहासिक सेतु की दर्दभरी कहानी

“I am the Vikramshila Bridge…”: The Heartbreaking Story

“I am the Vikramshila Bridge…”: The Heartbreaking Story

भागलपुर। “मैं विक्रमशिला पुल हूं…” अपनी स्थिति और उपेक्षा की कहानी खुद सुनाता यह पुल आज अपने दर्द, उपेक्षा और टूटते ढांचे की दास्तान बयां कर रहा है। 23 जून 2001 को जिसका भव्य उद्घाटन हुआ था, वही पुल आज अपने अस्तित्व और मरम्मत की राह देख रहा है।

उद्घाटन का यादगार दिन और विवाद की शुरुआत

23 जून 2001 को बिहार की तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस पुल का शुभारंभ किया था। उद्घाटन समारोह में भारी भीड़ उमड़ी थी और उत्सव जैसा माहौल था। लेकिन बरारी के स्थानीय लोगों में उस समय उपेक्षा को लेकर नाराजगी फैल गई थी। आरोप था कि आयोजन में स्थानीय लोगों को दरकिनार किया गया और नेताओं को प्राथमिकता दी गई।

उद्घाटन समारोह में बवाल और अफरातफरी

समारोह के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। देसी घी के लड्डू बांटे जा रहे थे, लेकिन वे स्थानीय लोगों तक न पहुंचकर मंच पर बैठे नेताओं को दिए जा रहे थे। इसी बात से नाराज भीड़ ने कुर्सियां उठाकर नेताओं पर फेंकनी शुरू कर दी। कुछ ही देर में वहां अफरातफरी मच गई और सैकड़ों कुर्सियां इधर-उधर फेंकी जाने लगीं। स्थिति इतनी बिगड़ी कि उस समय के नेता शकुनी चौधरी भी चोटिल हो गए। हालांकि पुलिस बल ने करीब आधे घंटे में हालात पर काबू पा लिया।

उपेक्षा और लगातार बढ़ता बोझ

पुल ने आगे की कहानी अपने दर्द के रूप में सुनाई। उद्घाटन के बाद वर्षों तक इसकी देखभाल पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। सड़क पर लगातार भारी ओवरलोड ट्रक और हाईवा का दबाव बढ़ता गया, लेकिन समय पर मरम्मत और संरक्षण नहीं हुआ। इससे इसकी संरचना पर लगातार असर पड़ता रहा।

रखरखाव में देरी और अस्थायी सुधार

समय के साथ जब पुल पर जमा बालू, गिट्टी और मिट्टी से समस्या बढ़ने लगी, तब कुछ सफाई कार्य किए गए, लेकिन वे भी चरणबद्ध और सीमित रहे। कई हिस्सों में मरम्मत तो हुई, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल अस्थायी समाधान साबित हुआ। 

वर्तमान स्थिति: गंगा की शरण में टूटा हिस्सा

धीरे-धीरे स्थिति इतनी खराब हुई कि पुल का एक हिस्सा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया और अंततः गंगा नदी की ओर झुकाव और टूटन की स्थिति में पहुंच गया। अब स्थिति यह है कि विशेषज्ञों की टीम निरीक्षण और मरम्मत के लिए पहुंच रही है।

चिंता और भविष्य की अनिश्चितता

पुल अपनी स्थिति को लेकर आशंकित है। उसे डर है कि बिना समय पर और स्थायी उपचार के उसकी स्थिति और खराब हो सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या समय रहते विक्रमशिला सेतु का पूर्ण पुनर्निर्माण और मजबूत मरम्मत हो पाएगी या नहीं।