Himcare Health Cover Enhanced

सरकारी भूमि कब्जों को नियमित करने की नीति को मंजूरी, किसानों को भी राहत

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Himcare Health Cover Enhanced

Sukhvinder Singh Sukhu की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण जनहितकारी फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने ‘सरकारी भूमि पर कुछ कब्जों को नियमित करने की नीति, 2026’ को स्वीकृति प्रदान की, जबकि हिमकेयर योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा कवर को बढ़ाकर 7 लाख रुपये और 10 लाख रुपये करने का भी निर्णय लिया गया।

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई इस नीति का उद्देश्य सरकारी भूमि पर कब्जा रखने वाले भूमिहीन परिवारों और छोटे किसानों की मानवीय समस्याओं का समाधान करना है। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया है।

कैबिनेट ने राहत के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में दया के आधार पर नियुक्ति (Compassionate Appointment) से जुड़े उन मामलों की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिन्हें पहले विभिन्न विभागों द्वारा खारिज कर दिया गया था। एकमुश्त पहल के तहत वास्तविक मामलों की पुनः जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर विशेष छूट भी प्रदान की जाएगी।

किसानों को राहत देने के लिए मंत्रिमंडल ने ‘कृषि ऋण ब्याज सब्सिडी योजना’ शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत राज्य सरकार 3 लाख रुपये तक के पात्र कृषि ऋणों पर ब्याज का 50 प्रतिशत वहन करेगी। इस कदम से प्रदेश के लगभग 6,356 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी भूमि ऋण के बोझ के कारण नीलामी के खतरे का सामना कर रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए कैबिनेट ने Himcare Scheme को बीमा-आधारित मॉडल में परिवर्तित करने तथा स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मौजूदा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख और 10 लाख रुपये तक करने को मंजूरी दी। इससे पात्र लाभार्थियों को गंभीर बीमारियों के उपचार में अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

इसके अलावा, राज्य में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लिए नई राज्य नवाचार नीति को भी मंजूरी दी गई। इस नीति के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-28 के दौरान 2 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

कैबिनेट के इन फैसलों को भूमि, कृषि, स्वास्थ्य, रोजगार और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक राहत और विकास को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है।