हिमाचल प्रदेश में नई उद्योग नीति में देरी, पुरानी नीति की अवधि दो माह बढ़ाई गई
Delay in Himachal Pradesh's new industrial policy
निवेश आकर्षित करने के लिए नीति में बड़े बदलाव की तैयारी
शिमला। Delay in Himachal Pradesh's new industrial policy, हिमाचल प्रदेश सरकार ने नई उद्योग नीति को अंतिम रूप देने में देरी के चलते मौजूदा उद्योग नीति की अवधि दो माह के लिए बढ़ा दी है। उद्योग विभाग के प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है। नई नीति में निवेश आकर्षित करने वाले प्रविधानों को शामिल करने के लिए अभी कई विभागों से सुझाव मिलने बाकी हैं।
उद्योग विभाग ने वित्त, राज्य विद्युत बोर्ड, जल शक्ति, राजस्व, पर्यावरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा लोक निर्माण विभाग से पूछा है कि निवेशकों को कौन-कौन सी रियायतें और सुविधाएं दी जा सकती हैं, ताकि उन्हें नई उद्योग नीति का हिस्सा बनाया जा सके।
बिना प्रतिस्पर्धी रियायतों के आकर्षित करना मुश्किल
नई नीति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ हुई चर्चा में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि बिना प्रतिस्पर्धी रियायतों के उद्योगों को हिमाचल में निवेश के लिए आकर्षित करना कठिन होगा। पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड निवेशकों को भूमि सहित विभिन्न प्रोत्साहन उपलब्ध करा रहे हैं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने अधिकारियों से मिले फीडबैक से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
सुविधाओं पर जोर
सरकार का प्रयास ऐसी उद्योग नीति तैयार करने का है, जिससे निवेशकों को अधिकतम सुविधाएं मिलें और निवेश संबंधी औपचारिकताएं सरल हों। मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ दो दौर की बैठक में बिजली दरों में रियायत का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था। माना जा रहा है कि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।
बिजली दरों में राहत की संभावना
राज्य विद्युत बोर्ड में हो रहे सुधारों के बाद उद्योगों को बिजली दरों में राहत मिलने की संभावना भी बढ़ी है। वहीं जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों के आधार पर नई नीति में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रविधानों को भी शामिल किया जाएगा।