12 दिन में मोबाइल स्नैचिंग केस में दोषी करार, तकनीक आधारित जांच से दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता
Conviction in mobile snatching case in 12 days
अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मोबाइल स्नैचिंग के एक मामले में दिल्ली पुलिस ने महज 12 दिनों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से दोषी करार दिलाकर त्वरित न्याय का उदाहरण पेश किया है। यह कार्रवाई आईपी एस्टेट थाना पुलिस की सतर्कता, तकनीक आधारित जांच और प्रभावी अभियोजन के चलते संभव हो सकी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी मोहम्मद आदिल (22), निवासी तकिया काले खां, मीर दर्द रोड, दिल्ली को FIR नंबर 197/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 304(2)/317(2) के तहत दोषी ठहराया गया है।
टैक्सी चालक से छीना था मोबाइल
घटना 14 मई 2026 की है। अलीगढ़ निवासी एक टैक्सी चालक दिल्ली में यात्रियों को छोड़ने के बाद गांधी मार्केट गोल चक्कर, मीर दर्द रोड के पास अपनी टैक्सी में बैठकर अगली बुकिंग का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान आरोपी अचानक उसका Redmi Note 13 Pro मोबाइल फोन छीनकर भागने लगा।
पीड़ित ने तुरंत आरोपी का पीछा करते हुए शोर मचाया। उसी समय इलाके में गश्त कर रहे आईपी एस्टेट थाने के कांस्टेबल राहुल ने आरोपी को भागते देखा और कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से चोरी किया गया मोबाइल भी बरामद कर लिया गया।
ई-साक्ष्य ऐप से की गई डिजिटल रिकॉर्डिंग
सूचना मिलते ही जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल नदीम मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक और तकनीक आधारित जांच प्रक्रिया अपनाई।
जांच के दौरान बरामदगी और जब्ती की कार्रवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य ऐप के जरिए की गई। यह प्रक्रिया BNSS की धारा 105 के तहत पूरी की गई, जिससे जांच में पारदर्शिता और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकी।
चार दिन में दाखिल हुई चार्जशीट
पुलिस ने घटना के महज चार दिन के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी आईपी एस्टेट थाने के एक अन्य आपराधिक मामले में शामिल रह चुका है।
पूरे मामले की निगरानी ACP राजीव भारद्वाज ने की, जबकि SHO आईपी एस्टेट इंस्पेक्टर नरेश कुमार, SI एस.एन. ओझा और ASI राजकुमार ने जांच में लगातार सहयोग किया।
अदालत ने 12 दिन में सुनाया फैसला
मुकदमे के दौरान सरकारी वकील राघव खुराना ने अदालत में गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को प्रभावी तरीके से पेश किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद 26 मई 2026 को आरोपी को दोषी करार दे दिया।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह मामला तकनीक आधारित जांच, नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और पुलिस-अभियोजन के समन्वय का सफल उदाहरण है, जिससे पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सका।