बाबा चौहरमल के सम्मान में डाक टिकट जारी करने की मांग, चिराग पासवान ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र

बाबा चौहरमल के सम्मान में डाक टिकट जारी करने की मांग, चिराग पासवान ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र

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Chirag Paswan writes to the central government demanding

पटना। केंद्रीय मंत्री  चिराग पासवान ने दलित आस्था और सामाजिक न्याय की राजनीति को नया संदेश देते हुए जननायक बाबा चौहरमल के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी करने की मांग उठाई है।

उन्होंने केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर को पत्र लिखकर इस मांग को केंद्र सरकार के सामने रखा।

चिराग ने कहा कि बाबा चौहरमल करोड़ों लोगों की आस्था, साहस और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।

ऐसे महान लोकनायक के सम्मान में डाक टिकट जारी होना सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक सम्मान की दिशा में बड़ा कदम होगा।

उनकी इस पहल को बिहार की राजनीति में दलित समाज को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

14वीं शताब्दी के लोकनायक थे बाबा चौहरमल

चिराग पासवान ने अपने पत्र में बाबा चौहरमल के संघर्ष और सामाजिक योगदान का विस्तार से उल्लेख किया है।

उन्होंने कहा कि बाबा चौहरमल 14वीं शताब्दी के महान योद्धा और लोकनायक थे।

उनका जन्म 4 अप्रैल 1313 को बिहार के पटना जिले के मोकामा क्षेत्र में हुआ था। वे दलित समाज, खासकर पासवान-दुसाध समुदाय के आराध्य माने जाते हैं।

उन्होंने शोषित, वंचित और उपेक्षित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और समाज को संगठित करने का काम किया।

सामूहिक खेती और आत्मनिर्भरता का दिया था संदेश

पत्र में यह भी कहा गया कि बाबा चौहरमल ने समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामूहिक खेती की व्यवस्था शुरू की थी।

उनकी वीरता और समाजसेवा से प्रभावित होकर तत्कालीन शासक गियासुद्दीन तुगलक ने उन्हें 100 बीघा भूमि का पट्टा दिया था।
बाबा चौहरमल कुश्ती और लाठी कला के भी अद्वितीय योद्धा माने जाते हैं। लोककथाओं और जनश्रुतियों में आज भी उनकी वीरता की गाथाएं सुनाई जाती हैं।

चिराग ने कहा कि ऐसे लोकनायक को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए।

बिहार समेत कई राज्यों में मनाई जाती है जयंती

चिराग पासवान ने बताया कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में चैत्र पूर्णिमा पर बाबा चौहरमल जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।

मोकामा टाल में हर साल आयोजित होने वाले समारोह में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

यह आयोजन दलित समाज की आस्था और सामाजिक एकता का बड़ा प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने कहा कि स्मारक डाक टिकट जारी होने से करोड़ों लोगों की भावनाओं को सम्मान मिलेगा।

साथ ही देश की लोक-सांस्कृतिक विरासत को भी राष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी।

सामाजिक न्याय की राजनीति में नया संदेश देने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग पासवान की यह पहल दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी है।

बिहार में सामाजिक न्याय और दलित अस्मिता की राजनीति लंबे समय से अहम मुद्दा रही है।

ऐसे में बाबा चौहरमल जैसे लोकनायक को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

चिराग लगातार दलित समाज से जुड़े प्रतीकों और मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
उनकी इस पहल ने बिहार की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।