चमत्कार या दुआओं का असर! जिस मां को मृत मानकर स्वजनों ने कर दी थीं सारी रस्में, वह 12 साल बाद जीती-जागती बच्चों के गले लगी
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चमत्कार या दुआओं का असर! जिस मां को मृत मानकर स्वजनों ने कर दी थीं सारी रस्में, वह 12 साल बाद जीती-जागती बच्चों के गले लगी

A miracle or the power of prayers! A mother

A miracle or the power of prayers! A mother

यमुनानगर : A miracle or the power of prayers! A mother, , मानव सेवा के क्षेत्र में समर्पित सरस्वतीनगर के मगरपुर स्थित आश्रम नी आसरे दा आसरा ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाया है। वर्ष 2014 में अपनों से बिछड़ी महिला को उसके परिवार से 12 वर्ष बाद मिलाया है। मां को देखकर उसके बेटे भावुक हो गए। दोनों बेटे मां के गले मिलकर आंसू नहीं रोक सके।

स्वजन भी उससे मिलकर अपने आंसूओं को नहीं रोक सके। परिवार के लोगों को जब उसका कोई पता नहीं लगा था तो उसे मृत मानकर सारी रस्में भी निभा दी थी, लेकिन अब महिला को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू हैं। यहां से परिवार के लोग अब उस महिला को अपने साथ लेकर गए हैं। अंबाला के साहा थाना पुलिस को गांव सबगा में लावारिस महिला मिली थी, जिसे पुलिस ने रेस्क्यू किया।

चार मई 2026 को उसे नी आसरे दा आसरा आश्रम में छोड़ा गया। महिला अपनी पहचान व पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। एक माह तक आश्रम में उसकी देखभाल की। उसका इलाज किया गया। जिसके बाद वह ठीक होने लगी। आश्रम की टीम ने उसकी काउंसलिंग की। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट तक महिला के बारे में सूचना पहुंचाई। उन्होंने भी ट्रेकिंग शुरू की।

टीम ने सरपंच से किया संपर्क

जब महिला ठीक होने लगी तो उसकी काउंसलिंग की। उसने अपना नाम राजो देवी बताया। महिला शुरुआत में अपना नाम सही तरीके से नहीं बता सकी। काफी प्रयास के बाद उसने बिजनौर का जिक्र किया। उस जिले के गांवों के बारे में उसके सामने नाम लिए गए। जिसके बाद उसने उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के गांव शेरकोट का नाम लिया। टीम ने वहां पर सरपंच से संपर्क किया।

जिसके बाद महिला के परिवार का पता लगा। आश्रम से उसके परिवार का नंबर लेकर वीडियो काल पर बात कराई गई। उन्होंने पहचान की। परिवार के लोग उसे जिंदा देखकर खुश हो गए। उसे लेने के लिए वह लोग तुरंत यहां पर पहुंच गए।

परिवार के सदस्यों के साथ जब उसके बच्चे सोनू कुमार, रोहित कुमार व कपिल कुमार पहुंचे तो महिला उन्हें देखते ही पहचान गई। वह अपने बच्चों से लिपटकर रोने लगी। उसके तीनों बच्चे भी इस समय 25 से 30 वर्ष की आयु में हैं। राजो देवी यह नहीं बता सकी कि वह यहां हरियाणा में किस तरह से पहुंची।

मां को मृत मान छोड़ दी थी उम्मीद

महिला के बेटे सोनू कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 में पिता रामदास से कहासुनी के बाद मां राजो देवी घर से निकल गई थीं। उसे काफी तलाशा, लेकिन कोई पता नहीं लगा। परिवार ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। उन दिनों बाढ़ आई थी। ऐसे में यही मान लिया था कि मां की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन अब मां जिंदा है। भगवान ने उन्हें सुरक्षित रखा। यह आश्रम की ही देन है।

मां सही सलामत हमें मिल गई है। उसकी मां के लापता होने के दो वर्ष बाद पिता की भी मौत हो गई थी। ऐसे में किसी तरह से परिवार ने खुद को संभाला। बेटे रोहित ने बताया कि हर समय वह मां को याद करते थे। यह सोचते थे कि पता नहीं कैसा समय था।

जब मां घर से निकल गई। मां की तलाश भी की। अपने जिले के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी तलाशा। पोस्टर तक लगवाएं लेकिन यह नहीं पता था कि मां यहां हरियाणा पहुंच जाएगी। मां के मिलने की खुशी को हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते।

सत्यापन प्रक्रिया के बाद महिला को किया सुपुर्द

आश्रम के संचालक जसकीरत सिंह ने बताया कि आवश्यक पहचान एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद महिला को उसके स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया है। आश्रम में वर्तमान में 250 से अधिक निराश्रित, मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा की जा रही है।

हमारा उद्देश्य केवल आश्रय देना ही नहीं, बल्कि बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से पुनः मिलाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है। यदि इन बेसहारा लोगों को इलाज की जरूरत होती है तो उसका इलाज कराया जाता है। यहां पर उन्हें सुरक्षित माहौल दिया जाता है। परिवार से मिलाने का प्रयास रहता है।