ट्रंप का दावा; ईरान पूरी तरह से हार चुका, समझौता चाहता: कहा- लेकिन ऐसा समझौता नहीं जिसे मैं स्वीकार करूँ, जंग का आज 15वां दिन
Trump Claim Iran is Totally Defeated And Wants Compromise With US
Trump on Iran War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का व्यापक असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। आज अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग का 15वां दिन है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर एक नया दावा किया है और कहा है कि ईरान पूरी तरह से हार चुका है और अब अमेरिका के साथ समझौता चाहता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ पर लिखा, ''फेक न्यूज़ मीडिया यह रिपोर्ट करना पसंद नहीं करता कि यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री ने ईरान के खिलाफ कितना अच्छा काम किया है, ईरान पूरी तरह से हार चुका है और एक समझौता चाहता है, लेकिन ऐसा समझौता नहीं जिसे मैं स्वीकार करूँ।"

इससे एक दिन पहले ही ट्रंप ने G7 बैठक में कहा था कि हमने एक ऐसे कैंसर से छुटकारा पा लिया है जो सभी के लिए खतरा था। हमने कैंसर को खत्म कर दिया है और अब ईरान कभी भी सरेंडर करने वाला है। ट्रंप का कहना है कि हमें मध्य पूर्व और पूरी दुनिया में परमाणु खतरे को खत्म करना था। हम अब ऐसी मज़बूत स्थिति में हैं, जैसी पहले किसी ने नहीं देखी। ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है, उनकी एयर फ़ोर्स खत्म हो चुकी है, और उनकी ज़्यादातर सेना खत्म हो चुकी है। उनके पास कोई रडार नहीं है, हम ईरान पर बहुत जोरदार हमले कर रहे हैं।
ट्रंप का इजरायल पर बयान
ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका के साथ संयुक्त रूप से शामिल इजरायल पर भी डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि ईरान युद्ध में US और इज़रायल के मकसद थोड़े अलग हो सकते हैं। जो मुझे लगता है। मेरा अंदाज़ा है। क्योंकि इजरायल अमेरिका से एक अलग देश है। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू आपको बताएंगे कि US जैसी ताकत पहले कभी नहीं थी। क्योंकि मैंने अपने पहले कार्यकाल में अपनी सेना को मज़बूत बनाया। वहीं जब ट्रंप से पूछा गया कि US नेवी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों को सुरक्षा देना कब शुरू करेगी, तो उन्होंने कहा, "यह जल्द ही होगा, बहुत जल्द।"
ईरान ने कहा- गलती मानने तक नहीं छोड़ेंगे
हाल ही में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी थी और कहा था कि युद्ध शुरू करना आसान है। कुछ बयानों से युद्ध खत्म नहीं हो सकता। ट्रंप को गलती मानने तक नहीं छोड़ेंगे। लारिजानी ने कहा था कि ट्रंप को इसकी कीमत चुकानी होगी। वहीं ईरान पहले से ही यह कहता रहा है कि जंग लड़ना उसकी मजबूरी है। जंग उसने शुरू नहीं की बल्कि उसके देश पर जंग थोपी गई। इसलिए अब अमेरिका नहीं, बल्कि ईरान तय करेगा कि जंग कब खत्म करना है और जंग ऐसे खत्म नहीं होगी, इसके लिए अमेरिका से ईरान में हुए नुकसान का हिसाब पूरा किया जाएगा।
जंग थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे
फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 'ईरान और अमेरिका-इजरायल' जंग के अभी इतनी जल्दी थमने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। एक तरफ जहां ईरान को झुकाने के लिए 'अमेरिका-इजरायल' की तरफ से हमले तेज हो रखे हैं तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाने के लिए अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। इसके साथ ही वह अन्य ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बना रहा है।
माना जा रहा है कि ईरान ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़े और अमेरिका-इजराइल अपने हमले रोकने के लिए मजबूर हो जाएं। बता दें कि जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। साथ ही गैस आपूर्ती भी प्रभावित हो रही है। कुलमिलाकर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट गहरा रहा है। जिससे भारत भी अछूता नहीं है। भारत में भी तेल-गैस आपूर्ती को मिडिल ईस्ट जंग ने प्रभावित किया है।
जंग में अब तक 1500 से ज्यादा लोगों की मौत
28 फरवरी से शुरू हुए ईरान और 'अमेरिका-इजरायल' जंग में अब तक 1500 से ज्यादा लोगों (आम लोग और सैनिक) की मौत हो चुकी है और करीब 2000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं ईरान सुप्रीम लीडर खामेनेई के साथ-साथ कई ईरानी शीर्ष कमांडर और नेता भी मारे गए हैं। साथ ही इस संघर्ष में ईरान में बड़ी संख्या में घर और बुनियादी सार्वजनिक ढांचे भी नष्ट हुए हैं। इस जंग में अमेरिका के भी 13 सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि लगभग 140-150 अमेरिकी सैनिक घायल हैं, जिनमें से कई गंभीर हैं। वहीं इरानी हमलों में इजरायल के अलावा यूएई, बहरीन, क़तर, कुवैत जैसे खाड़ी देशों का भी व्यापक नुकसान हुआ है.