Steps taken by the government in Haryana

Editorial: हरियाणा में सरकार के बढ़ते कदम, जनता का जीवन हुआ सुगम

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Steps taken by the government in Haryana

Steps taken by the government in Haryana हरियाणा में प्रदेश सरकार का यह निर्णय बेहद सराहनीय है कि अब जमीन की रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद इंतकाल यानी म्यूटेशन हो जाएगा और वह भी ऑनलाइन। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस निर्णय की  लंबे समय से प्रतीक्षा हो रही थी, जमीन की रजिस्ट्री में जिस प्रकार  की धांधलेबाजी होती आई है, वह इसके बाद रुक जाएगी, इसका विश्वास किया जाना चाहिए। दरअसल, प्रॉपर्टी म्यूटेशन कराए बिना स्वामित्व का हस्तांतरण पूरा नहीं होता। जमीन का म्यूटेशन सरकारी रिकॉर्ड अपडेट करने और जमीन के स्वामित्व में बदलाव के मद्देनजर जरूरी है। बिजली-पानी के लिए अप्लाई करते समय भी म्यूटेशन के दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार सरकार की ओर से लांच पोर्टल से अब किसी भी संपत्ति/जमीन का इंतकाल (म्यूटेशन) रजिस्ट्री के तुरंत बाद हो सकेगा। इसके साथ ही म्यूटेशन की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगी, जिसे कोई भी चेक कर सकता है। म्यूटेशन पर कोई भी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 10 दिनों की समयावधि दी जाएगी। अगर कोई 10 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करवाता है तो म्यूटेशन को विवादित माना जाएगा और इंतकाल नहीं होगा। यदि कोई आपत्ति नहीं आई तो स्वत: इंतकाल (म्यूटेशन) हो जाएगा। फिलहाल किसी भी जमीन या संपत्ति की बिक्री, मॉर्टगेज विद पोजेशन, पारिवारिक हस्तांतरण और उपहार का म्यूटेशन किया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में इंतकाल (म्यूटेशन) की प्रक्रिया को डिजिटल बनाना भाजपा के घोषणा पत्र की प्रमुख घोषणाओं में से एक था। पूरे सिस्टम पर गहन अध्ययन करने के बाद यह पोर्टल लॉन्च किया गया है। मनोहर सरकार ने नारा दिया है कि उसने व्यवस्था को बदला है और इस प्रकार के कार्यक्रमों, नीतियों से यह साबित होता है कि हरियाणा में अब डिजिटल क्रांति आ चुकी है और निवासियों का जीवन काफी हद तक सरल हो गया है। इस व्यवस्था के जरिये परिवर्तन की पहल जनहित में है। इस पोर्टल की लॉन्चिंग स्वच्छ और पारदर्शी शासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

तहसील कार्यालयों में जमीन संबंधी कार्यों को पूरा करवाना पहले महाभारत लडऩे से कम गंभीर मामला नहीं था, हालांकि अब राजस्व विभाग में आए क्रांतिकारी परिवर्तनों के जरिये यह आसान हो गया है। पहले लोगों को इसके लिए दर-दर भटकना पड़ता था। इसी को देखते हुए सब कुछ आईटी प्लेटफॉर्म पर आ चुका है। बकौल मुख्यमंत्री, सरकार विवादास्पद म्यूटेशन के मुद्दे को भी हल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई मुकदमा न हो।

सरकार का यह निर्णय भी अपने आप में ऐतिहासिक है कि अब एसडीएम तहसील और डीआरओ जिले में रजिस्ट्रियां कर सकेंगे यानी अब सिर्फ तहसीलदारों के भरोसे रहने की जरूरत नहीं रहेगी। इसके अलावा सरकार यह भी करने जा रही है कि अब रजिस्ट्री किसी भी जिले में कराई जा सकेगी। निश्चित रूप से इन कदमों के जरिये प्रदेश में जो सुविधाएं बढ़ेंगी, उनका फायदा आम से लेकर खास तक के जीवन को सुगम बना देगा। एक सरकार का प्रथम दायित्व यही होता है कि वह जनता के लिए सहूलियत बढ़ाए और मौजूदा समय में सरकार के कार्यों से ऐसी सुविधाएं बढ़ रही हैं और जनता में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ रहा है।

राज्य सरकार ने अविवाहित लोगों को भी पेंशन देनी शुरू की है, जोकि अपने आप में अप्रत्याशित फैसला है। इससे पहले सिर्फ बुजुर्गों को ही पेंशन देने का रिवाज था लेकिन मौजूदा सरकार ने अविवाहित पुरुष और महिलाओं एवं विधुरों को भी 2750 रुपये की पेंशन शुरू कर दी है। 45 से 60 वर्ष की आयु के लोगों पर यह योजना लागू होगी। हालांकि यह पेंशन उन्हीं को मिलेगी जिनकी वार्षिक आय एक लाख 80 हजार से कम होगी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल का यह कहना सर्वथा उचित है कि सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि अपना काम कराने के लिए लंबी लाइनों में न लगना पड़े। परिवार पहचान पत्र ऐसी ही योजना है।

इस पत्र के जरिये ही तमाम पेंशन योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है और उन्हें लाइनों से छुटकारा मिल चुका है। बेशक राज्य में विपक्ष इसकी आलोचना कर रहा है और इसे जनता की परेशानी बढ़ाने वाला बता रहा है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि आज के समय में प्रत्येक कार्य के लिए कार्यालय नहीं जाया जा सकता। सभी का जीवन इतना जटिल हो गया है और समय की कमी हो गई है। वास्तव में राज्य सरकार ने जनता की सुविधाओं को बढ़ाने, उसके जीवन को सुगम बनाने में अथक प्रयास किए हैं, हालांकि अभी बहुत किया जाना बाकी है। प्रदेश में बेरोजगारी एक मसला है, जिसका निवारण जरूरी है, वहीं भ्रष्टाचार का खात्मा भी किए जाने की जरूरत है।

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