राज्यपाल का कड़ा संदेश: सुधरें नहीं तो नीति बंद, नेक एक्रेडिटेशन की अड़चनों को दूर करें

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Governor's Strong Message

जयपुर, 21 जनवरी। Governor's Strong Message: राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि उच्च शिक्षा में "सुधरो नहीं तो बंद करो।" नीति पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में शैक्षिक गुणवत्ता पर कहीं कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे शिक्षण संस्थान जिनके पास शैक्षिक गुणवत्ता नहीं है, उसे बंद किया जाए। बगैर अनुमति यदि कहीं किसी कॉलेज या शिक्षण संस्था की विश्वविद्यालय स्तर पर मान्यता दी गई है तो उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को सुदृढ़ किए जाने और वहां नियुक्त कुलगुरुओं का मनोबल बढ़ाने के लिए  भी कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में स्कूल से उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए अधिक से अधिक प्रयास हों। शिक्षा ही विकास की नींव है, इसलिए इसके उत्थान के लिए सभी स्तरों पर प्रयास हों।

राज्यपाल श्री बागडे ने सभी विश्वविद्यालयों में नेक रैंकिंग के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नेक रैंकिंग के लिए विश्वविद्यालयों में आ रही बाधाओं को दूर किया जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालयवार कुलगुरुओं से नेक में आ रही अड़चनों के बारे में जानकारी लेते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शैक्षिक गुणवत्ता, पाठयक्रम और शिक्षण पद्धति में नवाचार से जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। राज्य सरकार स्तर से जुड़ी भर्ती और वित्तीय स्वीकृतियां से जुड़ी  प्रक्रियाओं को भी पूरा करने का जल्द प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों से विश्वविद्यालय स्वीकृतियों से जुड़े मसलों पर त्वरित और समुचित निर्णय किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कहीं किसी स्तर पर फाइलों को अनिर्णय की स्थिति में नहीं रखा जाए।

राज्यपाल श्री बागडे बुधवार को लोकभवन में कुलगुरु समन्वय समिति की बैठक में संबोधित कर रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संदीप वर्मा और श्री कुलदीप रांका सहित बड़ी संख्या में अधिकारियों ने भाग लिया।

राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा पद्धति के अंतर्गत विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा के बारे में कुलगुरुओं से जानकारी लेते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्यपाल ने पुस्तकों से लुप्त, महत्वपूर्ण भारतीय इतिहास, हमारी ज्ञान परंपरा, महत्वपूर्ण विषयों को विश्वविद्यालयों में दीवार चयनित कर वहां प्रदर्शित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने यहां ऐसी व्यवस्था भी सुनिश्चित करे जिसमें पुस्तकों से बाहर के ज्ञान, कलाओं, संस्कृति के बारे में माह में दो बार या सप्ताह में एक बार विद्यार्थी अध्यापक संवाद की शुरुआत की जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में संवाद जरूरी है। इस पर सभी ध्यान दें।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को दीक्षांत समारोह प्रति वर्ष आयोजित किए जाने और उसे कम से कम खर्च में संपन्न किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में महालेखाकार ऑडिट भी हर वर्ष कराए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने ऑडिट टीम को सभी द्वारा सहयोग किए जाने की भी हिदायत दी। उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा गांव गोद लेकर उनके विकास के लिए किए जाने वाले कार्यों को प्राथमिकता से करने पर जोर दिया। उन्होंने  गांवों में गरीबी दूर करने, वहां शिक्षा की प्रभावी व्यवस्था में सहयोग करने के लिए विशेष रूप से कार्य करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने तकनीकी विश्वविद्यालयों द्वारा गांवों में कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण प्रारम्भ करने के भी निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि नेक रैंकिंग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों का रोस्टर बनाकर उन्हें भरने की कार्यवाही जल्द की जाएगी। विश्वविद्यालयों में पेंशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं, भवन आदि के लिए उन्होंने  मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा कर सकारात्मक कार्यवाहीं किए जाने का विश्वास दिलाया।

उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुलदीप रांका ने भारत सरकार के स्तर पर  विश्वविद्यालयों के विकास के लिए बनी समिति के निर्णयों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ग्लोबल टेलेंट रिटर्न स्कीम, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस, विश्वविद्यालयों में रिक्त पद भरने, कौशल विकास  के बारे में की जा रही कार्यवाही के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार स्तर पर रिक्तियों को भरने के लिए रोस्टर प्रणाली और इस सम्बन्ध में दी गई स्वीकृतियां के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अंतर्गत पैंशन फंड के लिए कार्य करने और विश्वविद्यालय व्यय कम किए जाने पर जोर दिया।

आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति  विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुबीर कुमार ने विश्वविद्यालयों को राजस्व सृजित किए जाने पर जोर दिया। पशुपालन विभाग के सचिव  डॉ. समित शर्मा,  वित्त विभाग की  सचिव श्रीमती टीना सोनी, चिकित्सा शिक्षा विभाग के श्री ललित कुमार,  समाज कल्याण विभाग के आयुक्त श्री इकबाल खान ने भी विचार रखे।

राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी ने विश्वविद्यालयों के स्तर पर गुणवत्ता सुधार के लिए की जाने वाली कार्यवाही, नेक एक्रेडिटेशन, नई शिक्षा नीति लागू करने आदि के लिए किए जाने वाले कार्यों के बारे में जानकारी दी।

बैठक में आरम्भ में राज्य के वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं ने अपने अपने यहां किए जा रहे नवाचारों, नेक एक्रेडिटेशन, नई शिक्षा नीति को लागू किए जाने के सम्बन्ध में की जा रही कार्यवाही के बारे में बताया।