Punjabi Artists Divided Over CJP Protest

CJP आंदोलन पर बंटी पंजाबी इंडस्ट्री, दिलजीत-सोनू ने छात्रों का किया समर्थन, बब्बू मान ने बनाई दूरी

babu maan

Punjabi Artists Divided Over CJP Protest

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर पंजाबी फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई कलाकारों ने छात्रों के साथ संवाद और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की, जबकि कुछ ने आंदोलन का समर्थन करने से इनकार करते हुए अलग रुख अपनाया।

पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती की बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि छात्रों की मांगों पर शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से विचार किया जाए। दिलजीत ने यह भी कहा कि सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के कारण उन्हें पहले भी आलोचनाओं और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

सोनू सूद ने भी छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत और संवेदनशील रवैये से निकाला जाना चाहिए।

वहीं, पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपील की कि छात्रों से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण करने के बजाय उन्हें गंभीरता और संवेदनशीलता से देखा जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को सुनना और सम्मानजनक तरीके से समाधान निकालना आवश्यक है।

अभिनेत्री सोनम बाजवा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "सवाल करना कब से गलत हो गया?" इसके साथ उन्होंने टूटे हुए दिल का इमोजी भी साझा किया। हालांकि उन्होंने किसी संगठन या घटना का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी पोस्ट को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, पंजाबी गायक बब्बू मान ने आंदोलन का समर्थन करने से इनकार किया। उनका कहना था कि पंजाब और पंजाबियों ने पिछले कई दशकों में विभिन्न आंदोलनों में भारी कीमत चुकाई है और हर बार पंजाबियों से ही आगे आने की उम्मीद करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसान आंदोलन के दौरान क्या CJP नेतृत्व पंजाब के समर्थन में सामने आया था। इसी आधार पर उन्होंने इस आंदोलन से दूरी बनाए रखने की बात कही।

CJP आंदोलन को लेकर कलाकारों की इन अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ कलाकार छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, वहीं कुछ ने आंदोलन की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को देखते हुए अलग राय व्यक्त की है।