1996 दौसा बस ब्लास्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी की फांसी की सजा रद्द की, नए ट्रायल का दिया आदेश
1996 Dausa bus blast case
1996 Dausa bus blast case, सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के समलेटी (दौसा) बस ब्लास्ट कांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने पाया कि पूरे ट्रायल के दौरान आरोपी को सही कानूनी सहायता (वकील) नहीं मिली, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन हुआ. दौसा बस धमाका मामले का नए सिरे से ट्रायल चलेगा.
सह आरोपी सलीम बरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी को वकील नहीं मिलना, निष्पक्ष न्याय का हनन है. सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया. सलीम उम्रकैद की सजा काट रहा था. हाई कोर्ट द्वारा जम्मू-कश्मीर के पांच आरोपितों और आगरा के एक आरोपित समेत 6 लोगों को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को आदेश दिया कि एक साल में नया ट्रायल पूरा करें.
रोडवेज बस में हुआ था ब्लास्ट
मामला 30 साल पहले का है. आगरा से रोडवेज बस बीकानेर जा रही थी. राजस्थान के दौसा में समलेटी गांव के पास बस में ब्लास्ट हो गया था, जिसमें 14 लोगों की जान चली गई थी. 37 लोग घायल हो गए थे. मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद को फांसी की सजा सुनाई थी. और सह आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को उम्रकैद की सजा हुई थी.
वकील नियुक्त कर सकेगा अब्दुल
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को कहा कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित एक वरिष्ठ जज की अदालत में होगी. कोर्ट ने कहा कि अब्दुल हमीद अपनी पसंद का वकील नियुक्त कर सकेगा.