Punjab and Haryana High

सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, मेडिकल बोर्ड की राय ही अंतिम नहीं

pp

Punjab and Haryana High

सैनिकों के पेंशन अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में Punjab and Haryana High Court ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था और सेवा के दौरान उसमें कोई बीमारी या दिव्यांगता विकसित होती है, तो सामान्य परिस्थितियों में उसे सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर किसी सैनिक को उसके वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला जस्टिस Harsimran Singh Sethi और जस्टिस Deepak Manchanda की खंडपीठ ने सुनाया।

खंडपीठ ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट Jogendra Singh के पक्ष में निर्णय देते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। साथ ही Armed Forces Tribunal द्वारा दिव्यांगता पेंशन देने संबंधी आदेश को भी बरकरार रखा।

सैनिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी दिव्यांगता पेंशन तकनीकी कारणों या मेडिकल बोर्ड की कड़ी व्याख्याओं के आधार पर रोकी जाती रही है। अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट किया है कि देश की रक्षा में सेवा देने वाले सैनिकों के स्वास्थ्य और उनके सेवानिवृत्ति पश्चात अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

फैसले में यह सिद्धांत भी मजबूत हुआ है कि सेवा के दौरान उत्पन्न होने वाली चिकित्सीय समस्याओं को सामान्यतः सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा, जब तक इसके विपरीत कोई ठोस प्रमाण न हो। ऐसे में केवल प्रशासनिक या तकनीकी आधार पर सैनिकों के वैधानिक लाभों को नकारा नहीं जा सकता।

यह निर्णय दिव्यांगता पेंशन से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।