Modi guarantee that results of three states are universally accepted
BREAKING
Haryana: आसमानी बिजली गिरने से बाबैन के गांव खिड़की वीरान में खेत में सरसों काट रहे मां सरोज बाला व बेटे रमन सैनी की मौके पर हुई मौत BJP के लोकसभा उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी; PM मोदी यहां से लड़ेंगे चुनाव? जानिए कहां से कौन उम्मीदवार खड़ा BJP के एक और सांसद ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया; जेपी नड्डा को लिखा पत्र, इससे पहले गौतम गंभीर ऐसा ही कर चुके भारत में स्पेन की महिला का गैंगरेप; झारखंड में घूमने आई थी, रात में दरिंदों ने मारपीट कर जिस्म नोचा, अस्पताल में इलाज चल रहा युवराज सिंह ने कहा- मैं गुरदासपुर से चुनाव नहीं लड़ रहा; BJP के टिकट पर लड़ने की चर्चा थी, सनी देओल को साइड कर रही पार्टी

Editorial: तीन राज्यों के परिणाम बता रहे मोदी की गारंटी सर्वमान्य

Edit3

Modi guarantee that results of three states are universally accepted

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल कहा जाए तो इसमें भाजपा ने ऐसी सफलता हासिल की है, जोकि ऐतिहासिक है। पांच राज्यों में चुनावों की घोषणा से पहले देश में माहौल यह था कि विपक्ष भाजपा पर हावी था। विपक्ष के नेताओं के पास तमाम मुद्दे थे और वे उन्हें धार देकर अपनी कामयाबी का ताना-बाना बुन रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए जनता से वोट की अपील कर रहे थे तो लग रहा था कि इस बार जनता कुछ और मन में धारे हुए है।

जनता की धारणा को समझते हुए यह कहा जा रहा था कि भाजपा को शायद निराशा ही झेलनी पड़े, मतदान के बाद आए एग्जिट पोल भी भाजपा की जीत को लेकर इतने आशान्वित नहीं थे। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल अपनी जीत को यकीनी मान चुके थे हालांकि यह कोई नहीं जानता था कि जनता क्या सोच चुकी है। खैर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के तीन हिंदी भाषी राज्यों ने जिस प्रकार भाजपा को प्रचंड बहुमत से जीत दिलाई है, वह जाहिर करती है कि देश का मन मोदी सरकार को बनाए रखने का है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भी है कि यह हैट्रिक अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव में हैट्रिक की गारंटी है। यानी मोदी सरकार एक बार फिर देश पर शासन करने को निर्वाचित हो जाएगी। बेशक,  इसे सुनिश्चित तरीके से अभी नहीं कहा जा सकता क्योंकि राजनीति और मौसम का कुछ भरोसा नहीं है। लेकिन बदले दौर में जनता का मन अब बहुत स्थायी हो गया है। अब महिला मतदाता और युवा मिलकर ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जोकि देश को नई दिशा दे रहे हैं। तीन राज्यों के चुनावी नतीजे यह बताते हैं कि इनमें महिलाओं और युवाओं ने अहम भूमिका अदा की है और उनका मत यह था कि भाजपा जोकि इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल निर्देशन में आगे बढ़ रही है, को वोट किया जाए ताकि उन सभी योजनाओं का संचालन इसी प्रकार होता रहे जोकि इस समय समाज के विभिन्न वर्गों को फायदा पहुंचा रही हैं।

इन चुनावों में कांग्रेस शासित सरकारों में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी चुनावी जनसभाओं में भरपूर उपयोग किया। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारों ने विकास कार्य किए होंगे, लेकिन उनसे कहीं ज्यादा इन राज्यों में भ्रष्टाचार के मामलों ने जनता का मोह भंग किया। इस समय देश के लोग ऐसी गारंटी चाह रहे हैं जोकि उनके जीवन को सुगम बनाएं। अगर बात महिलाओं की ही करें तो इस समय उज्जवला योजना से नौ करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को उपलब्ध हो रहे हैं, घर के राशन से लेकर अन्य जरूरतों का ख्याल रखना महिला शक्ति के ही पास है, ऐसे में अगर उन्हें रियायत मिलती है तो वे चुनाव के समय इसे क्यों नहीं याद रखेंगी।

यह राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी चौंकाने वाले परिणाम हैं, क्योंकि अनेक ऐसे राज्य हैं, जहां पर सरकारें हर पांच साल बाद बदल जाती हैं, लेकिन राजस्थान के निवर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का इस बार सत्ता पलटने का रिवाज बदलने का दावा खारिज हो गया। गहलोत बेहद सुनिश्चित थे कि उनकी सरकार के किए कामों पर जनता की मोहर लगेगी और प्रदेश में फिर से कांग्रेस सरकार आएगी। बेशक, यही वजह रही कि भाजपा ने इस बार प्रदेश में किसी एक चेहरे को आगे बढ़ाया भी नहीं था, क्योंकि चुनाव परिणामों का डर पार्टी के मन में था। लेकिन फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार अपने नाम और काम की गारंटी जनता को दी तो माहौल बनने लगा और इसके बाद चुनाव परिणाम सबके सामने हैं। यह भी कितना खूब है कि बीते पांच साल पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिला था, लेकिन फिर भाजपा ने जोड़तोड़ से अपनी सरकार बनाई। और अब मध्य प्रदेश की जनता ने भाजपा को एकमत से पुन: सत्ता में लौटा दिया। निश्चित रूप से इस बार के विधानसभा चुनावों में हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार के साथ स्थानीय मुद्दे हावी रहे हैं।

इन चुनावों को अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों की झांकी समझा जा सकता है। यह समय विपक्ष के नेताओं को संभलने का है। एक मजबूत विपक्ष लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन इस हार के बाद विपक्ष को यह समझना होगा कि आखिर गड़बड़ कहां हो रही है। वहीं भाजपा के कंधों पर जिम्मेदारी अब और ज्यादा बढ़ गई है। अब देश में भगवा ज्यादा नजर आ रहा है, पार्टी केंद्र में बहुमत की सरकार चला रही है, जिसने अनेक परिवर्तनकारी फैसले लिए हैं। उसे अपने वादे और इरादों को और बेहतर तरीके से हकीकत में बदलना होगा।  

यह भी पढ़ें:

Editorial:इंटरपोल की भूमिका हो तय, भारत की चिंता भी समझे विश्व

Editorial: विधानसभा चुनाव के बाद अब आम चुनाव में उठेगा जाति आरक्षण का मुद्दा