Russia and Ukraine War: यूक्रेन में बांध से टकराई मिसाइलें, लोगों को जगह खाली करने का दिया गया आदेश
Russia and Ukraine War

Russia and Ukraine War

यूक्रेन में बांध से टकराई मिसाइलें, लोगों को जगह खाली करने का दिया गया आदेश

कीव। Ukraine में एक बड़े जलाशय को लक्ष्य कर किये गये मिसाइल हमले (Missile Attack) में बांध के टूट जाने से उत्पन्न बाढ़ के खतरे को देखते हुए क्रिवी रिह में निवासियों को इलाका खाली करने का आग्रह किया गया है। राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस को आतंकवादी देश करार देते हुए कहा कि यह हमला उसके (Ukraine) जवाबी हमले का प्रतिशोध के रूप में किया गया है। उन्होंने कहा ‘आप कमजोर हैं जो आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं।

जलाशय का कोई सैन्य मूल्य नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि दुशमन देश युद्ध के मैदान से भागकर कहीं दूर से नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच रूस ने कथित मिसाइल हमले (Missile Attack) पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है , हालांकि रूसी सेना ने स्वीकार किया है कि पिछले सप्ताहांत में पूर्वी यूक्रेन में बिजली संयंत्रों पर हमले के कारण वहां ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित हुई है।

रूसी सैनिकों पर यूक्रेन के नागरिकों को यातनाएं देने का आरोप

उत्तर-पूर्वी यूक्रेन में रूसी सेना के हमले का माकूल जवाब देते हुए यूक्रेनी सैनिकों ने रूस के कब्जे वाले हिस्सों को फिर से अपने कब्जे में ले लिया और रूसी सैनिकों को वहां से खदेड दिया है, लेकिन नव-मुक्त क्षेत्रों में राहत के साथ दुख भरी खबरें भी जुड़ी हैं। जिसमें रूसी कब्जे वाले इलाकों से नागिरकों को यातना और उनकी हत्याओं की रिपोर्ट मिल रही है।

खार्किव क्षेत्र के बालाक्लिया शहर में रहने वाले आर्टेम ने बीबीसी को बताया कि रूसी सैनिकों ने उन्हें 40 दिनों से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा था। इस दौरान सैनिकों ने अपनी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए, नागरिकों को बिजली के झटके दिए थे। छह महीने से अधिक समय तक कब्जा करने के बाद 08 सितंबर को बालकलिया को रूसी सेना से मुक्त कराया गया था। उन्होंने बताया कि क्रूरता का केंद्र शहर का पुलिस थाना था जिसे रूसी सेना अपने मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल करती थी।

यह पढ़ें - कनाडा में Swaminarayan Temple में तोड़फोड़ मंदिर की दीवारों पर लिखे विरोधी शब्द 

क्या है मामला

बीबीसी की रिपोर्ट में पीड़ित आर्टेम ने बताया कि वह अन्य कक्षों से आने वाले दर्द और आतंक की चीखें सुनता था। रूसी सेना ने वहां रहने वालों लोगों की आवाज बाहर न सुनायी दे इसके लिए उसे साउंड प्रूफ बनाया गया था। आर्टेम ने बताया कि रूसी सेनाएं पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के साथ भी क्रूरता का व्यवहार करते थे और वे इस दौरान बंदी बनाए लोगों को बिजली से झटके देते थे।

पीड़ित ने कहा कि उन्हें भी दो बार तार पकड़वाए गए। इस दौरान, एक विद्युत जनरेटर था। यह जितनी तेजी चलता था बिजली का वोल्टेज उतनी अधिक होती थी और उतनी ही जोर का करंट लगता था। उन्होंने बताया कि उन्हें हिरासत में इसलिए लिया गया था क्योंकि रूसियों को उनके भाई की सैनिक की वर्दी में एक तस्वीर मिली थी और एक और पीड़ित बालाकलिया को 25 दिनों के लिए रखा गया था क्योंकि उसके पास यूक्रेन का झंडा था।