मोबाइल में सिमटता जन-जीवन

मोबाइल में सिमटता जन-जीवन

Life Confined to Mobile Phones

Life Confined to Mobile Phones

डॉ. गणेश दत्त: कालचक्र से कोई भी अछूता नहीं रहा । समय परिस्थिति और जरूरतों ने अनेक बार सामाजिक, आर्थिक क्रांति को जन्म दिया, अनेक आन्दोलन हुए और समाज पर प्रभाव डाला। जिससे पूरा विश्व प्रभावित रहा। भारत में भी पिछले करीब 30 वर्षों में एक ऐसा सूत्रपात हुआ जिसे डिजिटल क्रांति कहा गया। तीन दशकों से समाज प्रभावित हो रहा है और हालत यह है कि जन-जीवन मोबाईल में सिमटकर रह गया है। समय स्क्रीनिंग पर ही व्यतीत होने लगा हैं ।

आधुनिक समय को टैक्नॉलोजी का युग कहा जाता है। इस युग की सबसे बडी उपलब्धि मोबाइल फोन है जिसके व्यापक प्रसार और उसके बहुआयामी उपयोग ने बडे परिवर्तन को अन्जाम दिया। इसके बढते प्रभाव को ही मोबाईल क्रांति कहा जाता है । जो केवल संचार तक सीमित नहीं रही। इससे शिक्षा, व्यापार, रोजगार, स्वास्थ्य, शासन व्यवस्था और सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया है। लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या मोबाईल के इर्दगिर्द ही चक्कर लगा रही हैं । विश्व की कुल आबादी करीब 8.09 अरब है। जिसमें से 74 अरब लोग मोबाईल इस्तेमाल करते हैं। भारत में भी कुल आबादी के करीब 80 प्रतिशत लोग इससे जुडे हैं। करीब 144 करोड की आबादी में से करीब 115.12 करोड लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। पिछले दशक में इस क्षेत्र में देश का विकास हुआ और व्यापार भी बढा । 2014 में जहां 2 यूनिट से बढकर 2025 तक 300 यूनिट हो गई । व्यापार भी 1500 करोड से बढकर 2 लाख करोड पहुंच गया हैं। देश में इसकी शुरूआत 31 जुलाई 1995 को पश्चिम बंगाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु की पहली कॉल से हुई ।

इस क्रांति का प्रारम्भ सामान्य मोबाइल फोन से हुआ जिससे कॉल करना और संदेश भेजना ही सम्भव था । ज्यों-ज्यों इस क्षेत्र में तकनीक का विकास होने लगा । स्मार्टफोन अस्तित्व में आए। हर क्षेत्र में इंटरनेट, मोबाइल एप्लिकेशन, सोशल मीडिया और डिजिटल सेवाओं का उपयोग होने लगा। मोबाइल फोन को एक छोटे कम्प्यूटर का रूप दे दिया। डिजिटल ट्रांसमिशन बढा । मोबाइल के माध्यम से हम पढाई, बैंकिग व लेनदेन कर सकते हैं।
इस क्रांति से संचार व्यवस्था में परिवर्तन आया, संदेशों का आदान-प्रदान बेहतर तरीके से होने लगा और वीडियो कॉल सहित अन्य कई क्षेत्रों में दूर-दराज इलाके तक पहुंच बढ गई और हर क्षेत्र इससे जुडा । जिससे समाज एक परिवार की तरह लगने लगा ।

इस क्रांति से युवा - शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रही। युवाओं में इसका प्रचलन बढा, वे इसका उपयोग शिक्षा, ऑनलाइन कोर्स, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल कौशल सीखने और रोजगार प्राप्त करने लगे। परिणाम यह हुआ कि युवा मोबाइल के माध्यम से स्टार्ट-अप, फ्री-लांसिंग, ब्लॉगिंग और यूटयूब जैसे माध्यमों से आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उन्हें प्रतिभा दिखाने का वैश्विक मंच मिला ।

महिलाओ के जीवन में भी मोबाइल क्रांति का सकारात्मक बदलाव आया। महिलाएं इस माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ डिजिटल बैंकिंग से जुडकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वयं सहायता समूह से भी महिला उद्यमी आर्थिक तौर पर सबल हुई हैं। इससे महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण बढा है । पुरूष वर्ग भी व्यापार, नौकरी, सरकारी सेवाओं और सूचना के आदान-प्रदान में इसका व्यापक उपयोग हर क्षेत्र में कर रहे हैं।

डिजिटल भुगतान ऑनलाइन खरीद-फरोख्त, ई-कॉमर्स और वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाओं ने कार्य संस्कृति को बदल दिया है। विश्व में कुल डिजिटल ट्रांजक्शन का करीब 49 प्रतिशत भारत में होता है। आंकडों की माने तो 25.5 अरब ट्रांजक्शन वार्षिक होती हैं।

मोबाइल क्रांति ने विकास की रफ्तार को बढाया जन-जीवन को सुलभ बनाया । अत्यधिक उपयोग की लत, नकारात्मक दृश्यों से इसके दुष्प्रभाव बढ रहे हैं। शारीरिक और मानसिक तौर पर विकृति होने से बीमारियों भी घेरने लगी हैं। माने तो आंखों में जलन, सिरदर्द, गर्दन और पीठ दर्द जैसी शारीरिक समस्याएं बढ रही हैं। बच्चे देर रात तक मोबाइल देखते हैं जिससे नींद की कमी, मानसिक तनाव, चिडचिडापन हो रहा है।

इसके साथ ही समाज पर भी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, लोगों को आपस में जोडने के साथ-साथ दूरियां भी बढ गई हैं। परिवार के सदस्य एक ही सपरिवार के होते हुए भी अपने-अपने मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं, संवाद की कमी हो रही है।

ऐसे में हमें सकारात्मक विचार करना चाहिए । संभलकर मोबाइल का उपयोग करना चाहिए। मोबाइल को ज्ञान, विकास और सकारात्मक कार्यों का माध्यम बनाया जाए। सभी को जागरूक रहते हुए सदुपयोग पर ध्यान देना चाहिए। जिससे हम विश्व के परिपेक्ष्य में आगे बढते रहें, देश का नाम रोशन करते रहें और अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।