लद्दाख में भूकंप के झटके; सुबह-सुबह अचानक हिल गई धरती, जानिए कहां रहा केंद्र और रिक्टर स्केल पर कितनी रही तीव्रता, पढ़िए
Ladakh Earthquake Today Breaking National Center for Seismology
Earthquake in Ladakh: भूकंप से एक बार फिर धरती हिल गई है। गुरुवार सुबह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। भूकंप का केंद्र लद्दाख के लेह जिले में रहा। हालांकि, इस भूकंप से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। वहीं राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology) ने रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता की जानकारी दी है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने जानकारी देते हुए बताया है कि, गुरुवार सुबह 03:54:49 बजे के आसपास भूकंप के झटके लद्दाख में महसूस किए गए। जमीन के अंदर उत्तर-पूर्व में इसकी गहराई 150 किलोमीटर थी। भूकंप का केंद्र लेह जिला रहा। वहीं इस भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.1 मापी गई। बता दें कि 4 से 4.9 की तीव्रता के भूकंप में तेज झटके महसूस किए जाते हैं। इस भूकंप में खिड़कियां टूट सकतीं हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
पूरे लद्दाख और आसपास भूकंप का असर
बताया जा रहा है कि भूकंप के झटके लेह के साथ-साथ कारगिल और पूरे लद्दाख में महसूस किए गए। साथ ही लद्दाख के आसपास के हिस्सों में भी भूकंप का असर रहा. भूकंप के झटकों के चलते घरों में मौजूद लोगों में घबराहट की स्थिति भी बनी। हालांकि राहत की बात ये रही कि इस भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ। मालूम रहे कि इससे पहले भी लद्दाख में भूकंप के झटके लगते रहे हैं। लद्दाखके अलावा जम्मू-कश्मीर में भी कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में कई बार भूकंप का केंद्र बारामूला और किश्तवाड़ में रहा है।
लद्दाख भूकंपीय रूप से संवेदनशील
विशेषज्ञों का कहना है कि लद्दाख भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जहां समय-समय पर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। सुरक्षित बचाव उपायों के तहत, स्थानीय प्रशासन ने लद्दाख के सभी नागरिकों को भूकंप आने पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भूकंप के बाद आने वाले जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन करें।
भूकंप से बार-बार कांप रही धरती
भूकंप से बार-बार धरती कांप रही है। पिछले दिनों में भारत के अंदर कई बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। खासकर उत्तर भारत में भूकंप के हल्के से तेज झटके बार-बार लग चुके हैं। दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा और यूपी, बिहार, हिमाचल, उत्तराखंड, तक भूकंप के झटकों से धरती काँप चुकी है। ज्ञात रहे कि भूकंप के मामले में दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, हिमाचल संवेदनशील जोन में है। अगर कभी काफी तेज तीव्रता का भूकंप यहां आता है तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।
किस तीव्रता के भूकंप में कितना नुकसान?
2 से 2.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर धरती में हल्का कंपन होता है। 3 से 3.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर धरती हिलने से हल्के झटके महसूस होते हैं। वहीं 4 से 4.9 की तीव्रता के भूकंप में तेज झटके महसूस किए जाते हैं। इस भूकंप में खिड़कियां टूट सकतीं हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं। वहीं 5 से 5.9 की तीव्रता वाले भूकंप में घर का सामान तेजी से हिलता हुए दिखता है। तेज झटके महसूस होते हैं।
वहीं 6 से 6.9 तक के भूकंप में इमारतें हिलती हैं, नींव में दरार आ जाती है। इसके अलावा 7 से 7.9 तक के भूकंप में इमारतें गिर जाती हैं, पानी के पाइप फट जाते हैं। 8 से 8.9 के भूकंप (Earthquake) में पल भर में इमारतें गिरती हैं और जमीन फटने लगती है, दीवारें फटती हैं। 9 या इससे ज्यादा की तीव्रता वाले भूकंप आने पर धरती लहर जाती है।
क्यों आता है भूकंप?
बताया जाता है कि, धरती की अंदरूनी संरचना में टैक्टोनिक प्लेट्स (सरल भाषा में चट्टानें) मौजूद हैं। ये प्लेट्स लगातार हलचल करती रहती हैं। इस बीच जब यह इधर से उधर खिसकती हैं, टकराती हैं या टूटती हैं तो फिर तेज एनर्जी निकलती है और इससे धरती में कंपन पैदा होता है और इसे ही भूकंप कहते हैं। यानि धरती ऊपर से जितनी शांत है उतनी इसकी अंदरूनी सतह में हलचल चल रही है।
भूकंप आने पर क्या करें?
भूकंप आने के दौरान अगर आप घर या फ्लैट में हैं तो कोशिश करें कि खुली जगह पर आ जाएं। खासकर फ्लैट में मौजूद लोग जल्द से जल्द बाहर जरूर निकलें। क्योंकि फ्लैट की इमारतें काफी ऊंची होती हैं। ऐसे में इनके गिरने का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं भूकंप के चलते यदि आप बाहर खुली जगह पर आते हैं तो यहां भी आप यह सुनिक्षित करें कि आप किसी बिल्डिंग, पेड़ और बिजली के तारों या खम्भों के नजदीक तो नहीं है। इनसे दूरी बनाकर रखें। आप बिलकुल खाली जमीन को तलाश कर वहां पहुंच जाएं।