हिमाचल सरकार ने उठाया बीबीएमबी बकाया और बिजली रॉयल्टी का मुद्दा, केंद्र से 7,784 करोड़ की मांग

हिमाचल सरकार ने उठाया बीबीएमबी बकाया और बिजली रॉयल्टी का मुद्दा, केंद्र से 7,784 करोड़ की मांग

Himachal government raises issue of BBMB

Himachal government raises issue of BBMB

Himachal government raises issue of BBMB, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा और आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल से भेंट कर बीबीएमबी से बकाया धनराशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित चक्रवृद्धि फार्मूले से 7784 करोड़ अनुमानित धनराशि दिलाने का आग्रह किया। गत शाम केंद्रीय मंत्री खट्टर से भेंट कर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में प्रारंभिक 12 वर्षों की अवधि पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं में सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रायल्टी के अतिरिक्त निश्शुल्क बिजली रायल्टी की हिस्सेदारी बढ़ाने का अनुरोध किया।

उन्होंने केन्द्र सरकार से 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूर्ण होने के परिणामस्वरूप इस परियोजना में निश्शुल्क बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का आग्रह किया।

बीबीएमबी बकाया का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं में राज्य को देय ऊर्जा बकाया के भुगतान में हो रहे विलम्ब का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान प्रदेश के लोगों ने कठिनाइयों का सामना किया और हजारों लोगों ने विस्थापन का दंश झेला। राज्य को प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों का सामना करना पड़ा और पौंग बांध से विस्थापित लोगों का पुनर्वास आज भी पूरी तरह नहीं हो सका है। 

7,784 करोड़ रुपये बनती है बकाया राशि

सुक्खू ने आग्रह किया कि हरियाणा और पंजाब दोनों राज्य अपनी सहमति प्रदान कर 31 अक्टूबर, 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित राज्य को प्रदान करें। यदि ऊर्जा बकाया का भुगतान धनराशि के रूप में किया जाता है, तो इस स्थिति में 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से अब तक की गणना के अनुसार इसकी अनुमानित धन राशि 7,784 करोड़ रुपये बनती है।

शानन का कब्जा दिलवाए केंद्र

उन्होंने शानन जलविद्युत परियोजना की पृष्ठभूमि के बारे में भी अवगत करवाया और इस परियोजना पर राज्य के वैध अधिकार का पक्ष रखा। उनका कहना था कि शानन परियोजना का करार समाप्त हो चुका है, ऐसे में केंद्र सरकार इसका कब्जा दिलवाए।

हिम चंडीगढ़ और एयरो सिटी के लिए मांगी वित्तीय मदद

उन्होंने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ के विकास के लिए भी केंद्रीय मंत्री से वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरीकरण, आर्थिक विकास, पर्यटन तथा निवेश को बढ़ावा देना है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि राज्य सरकार द्वारा 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की जा रही है। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रथम चरण में भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं, जिन्हें स्वीकृति दिलवाई जाए।

उन्होंने अमृत योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारत सरकार को अनुमोदन के लिए भेजी गई अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में 43 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह भी किया।

बैठक में मुख्य सचिव केके पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित थे।

1977 से हिमाचल मांग रहा हिस्सेदारी

पंजाब पुनर्गठन कानून के तहत हिमाचल पंजाब व हरियाणा से बीबीएमबी के तीन पावर प्रोजेक्टों 1325 मेगावाट भाखड़ा, 396 मेगावाट पौंग व 990 मेगावाट बीएसएल में हिस्सेदारी मांग रहा है। प्रदेश को हिस्सेदारी के इस मामले को लेकर वर्ष 1998 में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। भाखड़ा पावर प्रोजेक्ट में पहली जनवरी 1966 से अक्टूबर 2011 तक की हिस्सेदारी बकाया है। बीएसएल में 1977 से अक्टूबर 2011 तथा पौंग डैम में 1978 से अक्टूबर 2011 तक की हिस्सेदारी के एवज बकाया राशि का भुगतान पंजाब व हरियाणा को करना है।