गमाडा और डीटीसीपी की मंजूरियों पर ईडी की बड़ी जांच, अधिकारियों की भूमिका पर बढ़ा शिकंजा
ED launches major probe into GMADA and DTCP approvals
चंडीगढ़। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) में मंजूरियों के पूरे सिस्टम को लेकर इफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। मामले में आरोपित अजय सहगल की गिरफ्तारी के बाद अब एजेंसी का फोकस उन अधिकारियों पर है, जिन्होंने प्रोजेक्ट फाइलों को क्लियर किया और नियमों के बावजूद मंजूरियां दी।
जांच में कई ऐसे दस्तावेज और फाइल मूवमेंट सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिले हैं कि सीएलयू मंजूरी की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुईं। किसानों की कथित फर्जी सहमतियों वाले दस्तावेज विभागीय जांच में कैसे पास हो गए और किस स्तर पर तकनीकी एवं प्रशासनिक आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
जांच में फाइलों की मूवमेंट, मंजूरी की टाइमिंग और प्रशासनिक प्रक्रिया की गति पर फोकस बढ़ा दिया है, जिनके जरिए बड़े स्तर पर इंस्टीट्यूशनल और एजुकेशनल जमीनों को रेजिडेंशियल व कमर्शियल उपयोग के लिए मंजूरी मिली।
बैठकों के एजेंडा खंगाल रही ईडी
मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार कई फाइलों में मास्टर प्लान के तहत पर्पल जोन यानी इंस्टीट्यूशनल उपयोग वाली जमीन को येलो जोन यानी रेजिडेंशियल उपयोग में बदलने की मंजूरी दी गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन बदलावों की सिफारिश किन स्तरों से आई और क्या नियमों के भीतर रहते हुए प्रक्रिया को असामान्य गति दी गई।
ईडी अब बोर्ड मीटिंग्स के रिकार्ड और उन बैठकों के एजेंडा भी खंगाल रही है जिनमें सीएलयू मामलों को मंजूरी मिली। ईडी की नजर अब केवल अंतिम मंजूरी पर नहीं, बल्कि पूरी फाइल ट्रेल पर है। कौन-सी फाइल कब शुरू हुई, किस अधिकारी के पास कितने समय तक रही, किन टिप्पणियों के बाद आगे बढ़ी और बोर्ड अप्रूवल तक पहुंचने में कितना समय लगा, इसकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों व निजी व्यक्तियों में सांठगांठ का शक
जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक बिल्डर या एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने वाले पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ईडी को शक है कि कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच कथित सांठगांठ के जरिए प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरियां दिलाई गईं।
इसी एंगल पर एजेंसी अब वित्तीय लेन-देन, फाइल प्रोसेसिंग और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी को कुछ ऐसे इनपुट भी मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर अवैध ग्रैटिफिकेशन और किकबैक के बदले फाइलों को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। इसी वजह से ईडी अब गमाडा और डीटीसीपी के कुछ वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका को लेकर दस्तावेजी पड़ताल कर रही है।
कुछ फाइलें तेजी से हुईं क्लियर
जांच के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित प्लाटों का मुद्दा भी एजेंसी के फोकस में आया है। ईडी के अनुसार नियमों के तहत जिन प्लाटों को एस्टेट आफिसर, गमाडा को ट्रांसफर किया जाना था, उनमें भी कथित तौर पर देरी और अनियमितताएं पाई गई हैं। एजेंसी अब यह देख रही है कि इस मामले में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
कई ऐसी फाइलें जांच के दायरे में हैं जिन्हें सामान्य प्रक्रिया की तुलना में बेहद तेजी से क्लियर किया गया। ईडी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में मास्टर प्लान से जुड़े अहम बदलावों को मंजूरी मिली और किन स्तरों पर फाइलों की प्रोसेसिंग असामान्य रूप से तेज रही।