सीएम योगी ने यूपीएसडीएमए भवन का किया लोकार्पण, बोले- अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत होगा तो बचेंगी जानें

Lucknow SDMA Headquarters Building

Lucknow SDMA Headquarters Building

लखनऊ: Lucknow SDMA Headquarters Building: 200 करोड़ से ज्यादा की लागत से गोमती नगर विस्तार स्थित उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नए मुख्यालय भवन का रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया. उद्घाटन के बाद लखनऊ को आधुनिक आपदा प्रबंधन की बड़ी सौगात मिली है. 24×7 स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर से निगरानी होगी. ये नया भवन 200 से ज्यादा सीटों वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, क्लासरूम, लेक्चर हॉल, हॉस्टल और लाइब्रेरी से लैस है. राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को डिजिटल कमांड, कंट्रोल और कोऑर्डिनेशन सेंटर मिला है.

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक लंबे अंतराल के बाद ये भवन बनकर आज तैयार है और अब अपनी पूरी क्षमता के साथ उत्तर प्रदेश को किसी भी आपदा से होने वाले जनधन की हानि को न्यूनतम स्तर तक पहुंचाने के लिए अपना योगदान देने के लिए भी तैयार है. हम लोग अक्सर आपदा आने के बाद जन और धन की व्यापक हानि के बाद तब सक्रिय होते हुए दिखाई देते हैं और अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं. जबकि मेरा मानना है कि आपदा के प्रति हमारी पहले से ही सतर्कता, पहले से ही तैयारी और पहले से ही जागरूकता इस जन और धन की हानि को न्यूनतम स्तर तक ला सकती है. यह हम लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा भी होना चाहिए.

कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम का हो या परिवारों के बीच में भी आपसी संवाद के माध्यम से इन सब बातों को बताए जाने की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें याद है कि बचपन में सामान्य स्कूली कार्यक्रमों का माध्यम से भी और परिवारों में भी इस बात की चर्चा होती थी कि आग लग जाए तो क्या करना चाहिए. भूकंप आ जाए तो उस समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए. नदी में बाढ़ का पानी है उस समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ट्रेनिंग पर ध्यान देना चाहिए. हम 45000 होमगार्ड की प्रक्रिया को पूरा कर रहे हैं. आपदा मित्र जिन्हें हमने ट्रेनिंग दी है उन्हें हम होमगार्ड की भर्ती में प्राथमिकता देंगे. जो होमगार्ड भर्ती होंगे उन्हें भी हम आपदा मित्र की ट्रेनिंग देंगे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने का की स्कूलों में भी हमें जागरूकता कार्यक्रम करने चाहिए. उन्हें आपदा के बारे में जानकारी देनी चाहिए. किस-किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए, इसके बारे में अवगत कराना चाहिए. इससे देश की बहुत बड़ी सेवा हो सकती है. आपदाएं कई प्रकार की होती हैं. प्राकृतिक आपदा जिनमें बाढ़ और लाइटनिंग की घटना है. अतिवृष्टि के कारण होने वाली जनधन की हानि, मानव की असावधानी से होने वाली आपदाएं, अग्निकांड की घटनाएं या किसी भवन के गलत डिजाइनिंग के कारण या किसी दुर्घटना के कारण भवन का धराशाई हो जाना, यह सभी घटनाएं होती हैं. इसके साथ ही कुछ ऐसी भी आपदाएं हैं, जिन्हें आदि भौतिक आपदा के रूप में ले सकते हैं. यानी किसी जीव के द्वारा पहुंचाई जाने वाले हानि. मुझे प्रसन्नता है कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने मानव वन्य जीव द्वंद्व को भी आपदा की श्रेणी में लेकर उन लोगों को राहत देने का कार्य किया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पहले बहराइच के पास एक घटना घटित हुई. एक 12 साल के बच्चे को मगरमच्छ ने पूरी तरह से निगल डाला. अगर हम थोड़ी सावधानी बरतें कि लोगों को पहले से पता है कि क्रोकोडाइल के कौन से क्षेत्र संवेदनशील हैं. ऐसा तो है नहीं कि क्रोकोडाइल बहुत लंबी दूरी तय करता है. वह मुश्किल से अपने पूरे जीवन भर में तीन से चार किलोमीटर दूरी तय करता है. इस दायरे में रहता है. उसके उस लक्षण के बारे में हमें जानकारी है, लेकिन उस सबके बावजूद जबरदस्ती कोई व्यक्ति उसके साथ खिलवाड़ करने लग जाए, हम लोगों को उसके बारे में बताएं. उसके बारे में कोई अलर्ट जारी न हो, ये सही नहीं है. लोग वीडियो बनाते रहते हैं, कोई भी उसके बारे में बचाव के लिए या वहां न जाने के लिए हिदायत नहीं दे पाते हैं. 12 साल की उम्र क्या होती है, लेकिन उस बच्चे को क्रोकोडाइल निगल गया. नियमित रूप से मानव-वन्य जीव के बीच होने वाले द्वंद्व और होने वाली हानि के बारे में हम लोगों के स्तर पर अभी भी जो प्रयास होने चाहिए, वह नहीं हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मैं बिजनौर गया वहां मैं इस बात को देख रहा था कि पिछले दो वर्ष में 80 तेंदुए हमने रेस्क्यू किए. मैंने वहां पूछा कि इतने बड़े पैमाने पर लेपर्ड कैसे आए. बताया गया कि उनकी संख्या बढ़ी है. दूसरा यह सभी गन्ने की बेल्ट के अंदर ज्यादा पाए जाते हैं. अब वहां पर अगर व्यक्ति, किसान उसके प्रति जागरूक नहीं है तो आसानी से उसकी चपेट में आ सकता है. एक टाइगर और एक लेपर्ड के स्वभाव में बहुत अंतर होता है. टाइगर अचानक हमला नहीं करता लेकिन लेपर्ड पीछे से हमला करता है और जब भी इसको अवसर मिलता है, वह छोड़ता नहीं है. अगर हम उसके स्वभाव के बारे में और उसके द्वारा जो खतरे वाले क्षेत्र हैं, उनको चिन्हित करके लोगों को अवगत करा सकेंगे तो बहुत बड़े पैमाने पर जनहानि को हम रोक सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्य जीव संघर्ष में 4000 से अधिक लोग चपेट में आ चुके हैं. 5000 से अधिक लोग अन्य प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं. यानी 9000 से अधिक लोग उत्तर प्रदेश के इस आपदा की चपेट में आए हैं. ये सोचनीय विषय है. आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हो रही हैं. तकनीकी के जरिए अब लोगों को पहले ही अलर्ट किया जा सकता है. दो घंटे पहले ही उन्हें खबर होनी चाहिए कि पक्के मकान के अंदर चले जाएं. पशुओं को खुले आसमान में न रखें. उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में आकाशीय बिजली गिरने से 111 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद मैंने प्राधिकरण की बैठक ली थी और चिंता व्यक्त करते हुए नाराजगी भी जाहिर की थी. मैंने कहा था कि इन घटनाओं को रोका जा सकता था. इसको न्यूनतम करने में हम सहायता कर सकते थे और मैंने उसी दिन कहा था कि हमें अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्रभावी बनाना पड़ेगा.

मुझे याद है कि ठीक तीसरे दिन एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. एनडीएमए और एसडीएमए ने मिलकर उस प्रक्रिया को बेहतरीन कोऑर्डिनेशन के साथ आगे बढ़ाया. परिणाम क्या था सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों में अचानक रात्रि को बारिश होती है. सहारनपुर में शाकंभरी देवी मंदिर में उस समय एक जागरण का कार्यक्रम चल रहा था. हजारों लोग उस कार्यक्रम में थे और भंडारे का आयोजन भी था. अलर्ट आने लग गया. प्रशासन तेजी के साथ दौड़ा और देखते ही देखते ऊपर से पानी नदियों में तेजी से बहता हुआ आ गया. अगर वे लोग जागरण के कार्यक्रम को कर रहे होते और भंडारे के कार्यक्रम में शामिल होते, यह मान कर चलिए कि उस दिन वहां सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी, लेकिन अर्ली वार्निंग सिस्टम ने प्रशासन को भी और लोगों को भी चैतन्य किया. हर उस क्षेत्र के मोबाइल फोन घनघनाने लग गए. जो ऑफ थे, उनमें भी अलर्ट आने लग गया. परिणाम क्या था इतनी बड़ी जनधन की हानि रोकी जा सकी. केवल दो लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई. इस तरह से तकनीकी का इस्तेमाल कर होने वाली घटनाओं को रोका जा सकता है और कम किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आई आपदा में अपनी जान की फिक्र न कर लोगों की जान बचाने वाले आठ जवानों को सम्मानित किया. इनमें लखनऊ के अलीगंज में हुई आग की घटना में अपनी परवाह न कर लोगों को बचाने वाले दो जवानों को भी सम्मान दिया गया.

इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि किसी दार्शनिक ने कहा है कि विपत्ति जब आती है तब दो प्रकार का रिएक्शन होता है. एक रिएक्शन तो व्यक्ति को कठोर बनाता है. दूसरा रिएक्शन व्यक्ति को दयालुता देता है. अभी हाल ही में हमने लखनऊ में देखा कि एक स्थान पर आग लग गई थी. जिस प्रकार से मुख्यमंत्री अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर वहां पहुंचे उसके बाद उन्होंने अस्पताल में जाकर लोगों का हाल-चाल लिया, यह व्यक्तिगत दयालुता होती है. किसी की थोपी नहीं होती. यह मन से होता है कि हम कितने संवेदनशील हैं. दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझकर उसका निवारण करना और बचाव करना. मैं समझता हूं आज के कार्यक्रम का यही प्रमुख उद्देश्य है.

इस मौके पर राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर ने कहा कि यह भवन केवल पत्थरों से निर्मित एक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सुरक्षित, सक्षम और आपदा प्रतिरोधी भविष्य की सोच का प्रतीक है. प्रदेश सरकार इस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार इस विशाल राज्य में आपदा प्रबंधन सिर्फ एक दायित्व नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के जीवन के सुरक्षा विकास महत्वपूर्ण आधार है. प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल आपदा आने पर राहत पहुंचाना नहीं है, बल्कि पहले से तैयारी करके आपदा से होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके, यह प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है.

इस मौके पर लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का अपना भवन तैयार हो गया है. आज का दिन प्राधिकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है. प्राधिकरण को अपना भवन देने के लिए मुख्यमंत्री का उन्होंने धन्यवाद किया. तीन साल पहले एक जून 2023 को इस भवन के निर्माण का शिलान्यास हुआ था. आज भवन बनकर तैयार हो गया. प्रशिक्षण और प्रशासनिक कार्यालय के अलावा यहां पर एक प्रशिक्षण केंद्र है, जिसमें 100 प्रतिभागियों के लिए आवास, तीन प्रशिक्षण हाल पुस्तकालय और 200 प्रतिभागियों के लिए सभागार है. आगे चलकर यही प्रशिक्षण केंद्र राज्य आपदा प्रबंधन संस्थान का रूप लेगा. इस भवन का केंद्र बिंदु है राज्य आपदा आपातकालीन सेंटर. कुछ दिनों में राज्य आपदा प्रबंधन के लिए कमांड कंट्रोल का कार्य करेगा.

कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण उत्तर प्रदेश शासन के सलाहकार अवनीश अवस्थी राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अपर्णा यू., राहत अयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद शामिल थे.