Raghav Chadha: 'प्राइवेट कर्मियों की सैलरी महंगाई के हिसाब से बढ़े'; सरकार एक्ट लाकर ये जरूरी करे, राज्यसभा में राघव चड्ढा की मांग

'प्राइवेट कर्मियों की सैलरी महंगाई के हिसाब से बढ़े'; सरकार एक्ट लाकर ये जरूरी करे, राज्यसभा सदन में राघव चड्ढा ने लोगों की बात कह दी

AAP MP Raghav Chadha Speech in Rajya Sabha Inflataion Salary Middle Class

AAP MP Raghav Chadha Speech in Rajya Sabha Inflataion Salary Middle Class

Raghav Chadha in Rajya Sabha: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इस समय देश के लोगों के बीच खास चर्चा में बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ की जा रही है। खासकर युवा उन्हें खूब पसंद कर रहे हैं। इसके पीछे कारण है की राघव चड्ढा संसद में लगातार जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सीधा जनता से सरोकार है। हाल ही में राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स (फूड-प्रोडक्ट डिलीवरी बॉयज की रीच टाइमिंग और उनकी सैलरी) का मुद्दा संसद में उठाया था और इसके बाद इसका प्रभाव भी हुआ। इसके अलावा हाल ही में राघव चड्ढा बाजार के मिलावटी खाद्य पदार्थों का मुद्दा उठाते भी संसद में नजर आये थे।

वहीं अब राघव चड्ढा ने राज्यसभा में एक ऐसे मसले पर चर्चा की है जो कि सीधे तौर से देश के करोड़ों प्राइवेट नौकरीपेशा लोगों के हित से जुड़ा हुआ है। राघव चड्ढा ने सरकार से भारत में तुरंत 'इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिवीजन एक्ट' (महंगाई से जुड़ा वेतन संशोधन कानून) लाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह कानून नौकरीपेशा लोगों को महंगाई से होने वाले नुकसान से बचाएगा। यूनियन बजट 2026-27 पर बहस के दौरान राघव चड्ढा ने बताया कि वित्त वर्ष 2018 से 2026 के बीच सैलरीड भारतीयों की असली कमाई 16 प्रतिशत घट गई है। इसका कारण यह है कि सैलरी में बढ़ोतरी महंगाई की रफ्तार से कम रही।

महंगाई के हिसाब से बढ़ाई जाए लोगों की तनख्वाह

सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि सरकार को मेरा सुझाव है कि भारत को आज ‘इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविज़न एक्ट’ की ज़रूरत है। महंगाई के साथ सैलरी लिंक की जानी चाहिये। FY18 और FY26 के बीच यह देखा गया है कि सैलरी पाने वाले भारतीयों की असली सैलरी में 16% की गिरावट आई है। क्योंकि इन सालों में जिस स्तर पर महंगाई बढ़ी, उस स्तर पर सैलरी नहीं बढ़ी। इसलिए सरकार 'इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविज़न एक्ट' लेकर आए और महंगाई बढ़ने के साथ सैलरी बढ़ने को जरूरी करे।

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि 'इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविज़न एक्ट' आने से देश के फॉर्मल सेक्टर, कॉर्पोरेट सेक्टर, फैक्ट्री सेक्टर, गिग वर्कर और तमाम सेक्टर्स में सैलरीड क्लास लोगों को महंगाई बढ़ने के साथ सैलरी बढ़ने का लाभ मिलेगा। 'इन्फ्लेशन लिंक्ड सैलरी रिविज़न एक्ट' से देश की 20 करोड़ आबादी यानि करीब 45% वर्क फोर्स को राहत पहुंचाई जा सकेगी। सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि सरकारी कर्मियों को तो इन्फ़्लेशन प्रोटेक्शन के रूप में डियरनेस अलाउंस (DA)  और समय-समय पर पे कमीशन मिल ही रहा है।

दुनिया के कई देशों में यह पहले से ही लागू

राघव चड्ढा ने बताया कि दुनिया के कई देशों में यह पहले से ही लागू है। US में C.O.L.A. सिस्टम लागू है जिसके अंदर ऑटोमैटिक रिविज़न और सालाना रिविज़न होता है, जबकि जर्मनी में हर 18–24 महीने में महंगाई के अनुसार सैलरी बढ़ा दी जाती है, जापान सालाना शंटो सिस्टम को फ़ॉलो करता है जिसके अनुसार हर साल महंगाई के अनुसार सैलरी बढ़ती है। वहीं बेल्जियम में हर तीन महीने में ऑटोमैटिक इंडेक्सेशन ज़रूरी है और इसके अनुसार सैलरी बढ़ती है.

लेकिन भारत एक ऐसा बड़ी इकोनॉमी वाला देश है जहां 85% फ़ॉर्मल वर्कफ़ोर्स के पास ज़ीरो स्टैच्युटरी इन्फ़्लेशन प्रोटेक्शन है। वे सैलरी में बढ़ोतरी पाने के लिए एम्प्लॉयर की मर्ज़ी और अपनी मोल-भाव की ताकत पर निर्भर हैं। भारत को स्टैच्युटरी इन्फ़्लेशन प्रोटेक्शन की ज़रूरत है, जिससे महंगाई से जुड़ी मिनिमम सैलरी में बढ़ोतरी हो। राघव चड्ढा ने कहा कि भारत में महंगाई को चुपचाप सैलरी में कटौती नहीं माना जाना चाहिए।

बजट में मिडिल क्लास को नजरअंदाज किया गया

राघव चड्ढा ने सदन में बजट में नजरअंदाज किए गए मिडिल क्लास का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इस बार बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। राघव चड्ढा ने कहा कि एक सैलरीड क्लास आम आदमी जब बजट की स्पीच सुनता है तो वो इसलिए नहीं सुनता की सरकार कहां क्या बनवा रही है या सरकार को कितना फायदा हुआ है। वो तो बस ये जानना चाहता है की उसे बजट में क्या राहत सरकार दे रही है। सरकार ने इस बार के बजट में आम आदमी को मायूस करने का काम किया है।

राघव चड्ढा ने कहा कि सैलरी स्थिर रहने और महंगाई 6.8% पर होने के बावजूद, इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया और स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। मैं फाइनेंस मिनिस्टर से इस बजट में ही सैलरी पाने वाले क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 से बढ़ाकर 1.5 लाख करने का आग्रह करता हूं। राघव चड्ढा ने कहा कि आज मिडिल क्लास अमीर और गरीब क्लास के बीच में फंस गया है और पिसा जा रहा है। मिडिल क्लास बढ़ती कीमतों और बढ़ते टैक्स के बीच फंसा हुआ है। घर के खर्चे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शिक्षा 8%, हेल्थकेयर 9%, किराया 7%, खाना 6%, और ट्रांसपोर्ट में 5% की दर से महंगाई बढ़ी है।  

राघव चड्ढा ने कहा कि कई सालों में पहली बार, पर्सनल इनकम टैक्स, कलेक्शन कॉर्पोरेट टैक्स से ज़्यादा है। लोगों ने लगभग 11 लाख करोड़ दिए, कॉर्पोरेट्स (कंपनियों) ने लगभग 9.8 लाख करोड़ दिये। लेकिन फिर भी देश के मिडिल क्लास को राहत नहीं मिल रही है। राघव चड्ढा ने कहा कि आज मिडिल क्लास को अपरलिफ्ट करने की जरूरत है। सरकार मिडिल क्लास को या तो टैक्स में छूट दे, या फिर इन्वेस्टमेंट या सेविंग्स पर इंसेंटिव दे ताकि मिडिल क्लास ज़्यादा बचत कर सके और वेल्थ बना सके।

MP-MLA को किसी भी वक्त हटाने की पावर जनता को मिले

राघव चड्ढा ने राज्यसभा सदन में मांग उठाई है कि जनता के पास नेताओं (MP-MLA) को फायर करने का भी अधिकार हो। राघव चड्ढा ने कहा कि भारतीय मतदाताओं के बाद जैसे 'राइट टू इलेक्ट' है। वैसे ही उनके पास 'राइट टू रिकॉल' भी होना चाहिए। अगर देश का मतदाता अपने नेताओं को हायर कर सकता है तो नेताओं को फायर करने की शक्ति भी उसे मिलनी चाहिए। अगर हम MP- MLA चुनते हैं और इसके बाद अगर वो काम न करे तो, अपने वादे भूल जाए और जनता से दूर हो जाए तो 5 साल तक इंतजार करने के अलावा अभी जनता के पास कोई ताकत नहीं है उसे हटाने की। आज नेताओं की ज़िम्मेदारी तय होने, उनके कामकाज और उन्हें हटाने का कोई ऑप्शन जनता के पास नहीं है। चुनाव से पहले नेता जनता के पीछे और चुनाव के बाद जनता नेता के पीछे दिखती है।

राघव चड्ढा ने कहा कि किसी नेता को चुनने के बाद 5 साल एक बहुत लम्बा समय है। अगर नेता को चुनने में गलत फैसला हुआ हुआ है और क्षेत्र में काम नहीं हो रहा है तो वो क्षेत्र बहुत पीछे चला जाता है। इसलिए हमें अपने देश के मतदाताओं को ये भरोसा देना चाहिए कि वो अपनी गलती राइट टू रिकॉल की ताकत से सुधार सकते हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि मैं ये स्पष्ट तौर से कहता हूँ कि 'राइट टू रिकॉल' राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कोई हथियार नहीं है बल्कि यह लोकतन्त्र की शक्ति को सुनिक्षित करता है।

राघव चड्ढा ने कहा कि जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को बीच कार्यकाल में बदल सकते हैं। जजों को हटाया जा सकता है और यहां तक की रूलिंग पार्टी को अविश्वास प्रस्ताव से सत्ता से हटाया जा सकता है। ऐसे में जब कोई नेता (MP-MLA) अपने क्षेत्र में काम नहीं कर रहा है और जनता उससे परेशान है तो क्यों न जनता को उसे हटाने की शक्ति मिलनी चाहिए। राघव चड्ढा ने कहा ने कहा कि दुनिया के 24  से ज्यादा लोकतान्त्रिक देशों में 'राइट टू रिकॉल' सिस्टम लागू है। जिसमें यूएस, कनाडा और स्वीटजरलैंड समेत अन्य देश शामिल हैं।