बर्बादी का काउंटडाउन! अमेरिका ने ईरान की तरफ भेजा एक और सैन्य बेड़ा, ट्रंप बोले- 'मुझे उम्मीद है कि...'
Trump War Must End
आयोवा: Trump War Must End: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयोवा में एक कार्यक्रम के दौरान ईरान पर अपना सख्त रुख दोहराया. उन्होंने मिलिट्री प्रेशर और तेहरान के साथ बातचीत की संभावना पर जोर दिया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बड़ी मिलिट्री तैयारी की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा, 'वैसे, अभी ईरान की तरफ एक और खूबसूरत आर्मडा खूबसूरती से तैर रहा है. तो देखते हैं. मुझे उम्मीद है कि वे एक डील करेंगे. उन्हें पहली बार में ही डील कर लेनी चाहिए थी.'
एक्सियोस के साथ एक अलग इंटरव्यू में भी यही दोहरा संदेश मिला, जहाँ ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हालात 'बदल रहे हैं'. उन्होंने कहा कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बड़े मिलिट्री एसेट्स भेजे हैं और कहा कि तेहरान कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार हो सकता है.
ताकत और बातचीत के बीच के अंतर को और बढ़ाते हुए, ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, 'ईरान के बगल में हमारे पास एक बड़ा आर्मडा है. वेनेज़ुएला से भी बड़ा और कहा कि तेहरान के अधिकारियों ने बार-बार बातचीत करने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा, 'वे एक डील करना चाहते हैं. मुझे पता है. उन्होंने कई बार फोन किया. वे बात करना चाहते हैं.'
इंटरव्यू के बाद एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने संवाददताओं को बताया कि अगर ईरान साफ शर्तों पर बात करने को तैयार है, तो अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है. द टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी ने कहा, 'ईरान के मामले में हम बातचीत के लिए तैयार हैं.' अगर वे हमसे संपर्क करना चाहते हैं, और उन्हें पता है कि शर्तें क्या हैं, तो हम बातचीत करेंगे.'
इस महीने की शुरुआत में अमेरिका के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ ने उन शर्तों के बारे में बताया था जो प्रशासन के मुताबिक किसी भी डील के लिए जरूरी होगी, जिसमें यूरेनियम एनरिचमेंट पर बैन, पहले से एनरिच किए गए यूरेनियम को हटाना, ईरान के लॉन्ग-रेंज मिसाइल स्टॉक पर कैप लगाना, और रीजनल प्रॉक्सी फोर्स को सपोर्ट वापस लेना शामिल है. तेहरान ने बातचीत करने की इच्छा तो जताई है, लेकिन उसने इन शर्तों को पूरी तरह से मना कर दिया है.
ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ पिछली मिलिट्री कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जून में अमेरिका के हमलों ने तीन जगहों पर हमला करके देश की न्यूक्लियर क्षमता को "खत्म" कर दिया था, हालांकि ईरान के एनरिचमेंट प्रोग्राम में कितनी रुकावट आई, यह अभी साफ नहीं है.
जून में हुए बमबारी कैंपेन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'लोग 22 साल से ऐसा करने का इंतजार कर रहे थे.' प्रेसिडेंट का यह कड़ा रुख उनके पहले टर्म के फैसले के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 2015 के न्यूक्लियर एग्रीमेंट से अमेरिका को हटाने और सेंक्शन के जरिए तेहरान को कमजोर करने के मकसद से मैक्सिमम प्रेशर कैंपेन चलाने का फैसला किया था.
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी चेतावनियों के बावजूद, ट्रंप ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि ईरान के खिलाफ आगे मिलिट्री एक्शन की इजाजत देनी है या नहीं, जबकि पहले उन्होंने वादा किया था कि अगर सरकार ने प्रदर्शनकारियों को मारा तो वे कार्रवाई करेंगे -- इस कार्रवाई में हज़ारों लोग मारे गए.
द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार वह इस हफ़्ते अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ और बातचीत करने वाले हैं, और मिडिल ईस्ट के पानी में अमेरिकी अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर के आने के बाद मिलिट्री ऑप्शन बढ़ने की संभावना है.
ट्रंप ने एक्सियोस को यह भी बताया कि पिछले जून में 12 दिन की लड़ाई के दौरान, उन्होंने यरुशलम को पहले हमला करने की इजाजत देकर इजराइल पर ईरान के मिसाइल हमले को रोका था. इससे यह पता चलता है कि उनकी सरकार मिलिट्री दबाव को डिप्लोमैटिक तरीकों से जोड़ने पर जोर दे रही है.