इटली, फ्रांस समेत 27 देशों से डील, केवल कारोबारी ही नहीं आम आदमी की जेब तक पहुंचेगा सीधा फायदा
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इटली, फ्रांस समेत 27 देशों से डील, केवल कारोबारी ही नहीं आम आदमी की जेब तक पहुंचेगा सीधा फायदा

Food Products Tariff Elimination

Food Products Tariff Elimination

नई दिल्ली: Food Products Tariff Elimination: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने करीब 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस ऐतिहासिक करार के तहत दोनों पक्षों ने व्यापक स्तर पर शुल्क कटौती और कई उत्पादों पर शुल्क समाप्त करने पर सहमति जताई है. यूरोपीय संघ का कहना है कि इससे भारतीय बाजार में उसके निर्यात में तेज़ वृद्धि होगी और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में दोनों की आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी.

यूरोपीय संघ के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत को निर्यात होने वाले 90 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क या तो पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा या फिर बड़ी कटौती की जाएगी. अनुमान है कि इस समझौते के लागू होने के बाद वर्ष 2032 तक भारत को यूरोपीय संघ का निर्यात दोगुना हो जाएगा. फिलहाल, ईयू का भारत को होने वाला निर्यात यूरोप में करीब आठ लाख नौकरियों को समर्थन देता है और इस करार से और अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.

हरित परिवर्तन के लिए वित्तीय सहयोग

एफटीए के तहत यूरोपीय संघ ने भारत को अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो (करीब 4,500 करोड़ रुपये) की सहायता देने की घोषणा की है. इसका उद्देश्य भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा व स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देने में मदद करना है.

किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ

यह समझौता शराब, खाद्य उत्पाद, रसायन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और एयरोस्पेस जैसे बड़े क्षेत्रों को कवर करता है. यूरोपीय संघ की ओर से किए गए प्रमुख ऐलानों के अनुसार—

  • बीयर पर शुल्क घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा
  • स्पिरिट्स (शराब) पर शुल्क 40 प्रतिशत तक कम होगा
  • वाइन पर शुल्क घटकर 20–30 प्रतिशत के बीच रहेगा
  • मोटर वाहनों पर 110 प्रतिशत शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा, जो सालाना 2.5 लाख वाहनों की सीमा के तहत होगा. भारतीय उपभोक्ताओं और ऑटो उद्योग के लिए, इस घोषणा का सबसे ध्यान खींचने वाला पहलू कार शुल्क में कमी का मार्ग है. यूरोपीय संघ का कहना है कि कारों पर शुल्क धीरे-धीरे घटकर 10 फीसदी हो जाएगा, जिसके लिए प्रति वर्ष 2,50,000 वाहनों का कोटा निर्धारित किया गया है. इसका अर्थ यह है कि समझौते के तहत प्रति वर्ष आयात किए जाने वाले पहले 2,50,000 वाहन ही कम शुल्क के लाभ के पात्र होंगे.
  • ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर शुल्क समाप्त होगा. यूरोपीय संघ की घोषणा में जैतून का तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेल सहित चुनिंदा उपभोक्ता आयात पर शुल्क कटौती भी शामिल है. शराब के संबंध में, इसमें कहा गया है कि यूरोपीय संघ की बीयर पर शुल्क घटाकर 50 फीसदी कर दिया जाएगा. यह घोषणा यूरोपीय संघ की वाइन पर लगभग 20-30 फीसदी शुल्क कटौती के बाद की गई है.
  • फलों के जूस और प्रोसेस्ड फूड पर शुल्क खत्म किए जाएंगे
  • लगभग सभी यूरोपीय रसायन उत्पादों पर शुल्क समाप्त होंगे
  • मशीनरी पर लगने वाला 44 प्रतिशत तक का शुल्क अधिकांशतः हटाया जाएगा,
  • फार्मास्यूटिकल्स पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क में बड़ी कटौती होगी. यूरोपीय संघ का कहना है कि ऑप्टिकल, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा उपकरणों पर लगने वाले टैरिफ 90 फीसदी उत्पादों के लिए समाप्त कर दिए जाएंगे, जिससे अस्पतालों और क्लीनिकों में उपयोग होने वाले आयातित उपकरणों की कीमत और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.
  • विमान और अंतरिक्ष यानों पर लगभग सभी उत्पादों के लिए शुल्क समाप्त किया जाएगा
  • रसायन क्षेत्र को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि यूरोपीय संघ का कहना है कि उसके रसायनों पर लगभग सभी उत्पादों के लिए शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि रसायन विनिर्माण इनपुट से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे अनुगामी क्षेत्रों तक एक व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल होते हैं.
  • सामान्य कटौती के अलावा, इस घोषणा में कुछ खास उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों के लिए बड़े बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है.
प्रोडक्ट वर्तमान टैरिफ (%) आगामी टैरिफ (%)
मशीनरी और विद्युत उपकरण 44 तक लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
विमान और अंतरिक्ष यान 11 तक लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
ऑप्टिकल, चिकित्सा और सर्जिकल उपकरण 27.5 तक 90 उत्पादों के लिए 0
प्लास्टिक 16.5 तक लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
मोती, कीमती पत्थर और धातुएँ 22.5 तक 20 उत्पादों के लिए 0 और अन्य के लिए शुल्क में कमी
रसायन 22 तक लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
मोटर वाहन 110 10 (250k का कोटा)
लोहा और इस्पात 22 तक लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
फार्मास्यूटिकल्स / दवाएं 11 लगभग सभी उत्पादों के लिए 0
प्रोडक्ट्स वर्तमान टैरिफ (%) आगामी टैरिफ (%)
वाइन (Wine) 150 20 (प्रीमियम रेंज), 30 (मीडियम रेंज)
स्प्रिट्स (Spirits) 150 तक 40
बीयर (Beer) 110 50
जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल 45 तक 0
कीवी और नाशपाती 33 10 (कोटा के अंदर)
फलों के रस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर 55 तक 0
प्रसंस्कृत भोजन (ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पालतू भोजन) 50 तक 0
भेड़ का मांस 33 0
सॉसेज और अन्य मांस की तैयारी 110 तक 50

सेवाओं, डिजिटल व्यापार और एमएसएमई को बढ़ावा

समझौते में डिजिटल व्यापार को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अलग अध्याय शामिल किया गया है. इसके साथ ही यूरोपीय सेवा प्रदाताओं को वित्तीय और समुद्री सेवाओं में विशेष पहुंच मिलेगी. छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए अलग अध्याय रखा गया है, जिसमें संपर्क केंद्र बनाए जाएंगे ताकि व्यापार और निवेश आसान हो सके.

यूरोपीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की नई पहचान: अब मिलेगी 'प्रीमियम' सुरक्षा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए नए समझौते के बाद भारत की सांस्कृतिक और कृषि विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलेगी. भारत के कई पारंपरिक उत्पादों को अब यूरोप में भौगोलिक संकेत (GI Tag) के तहत विशेष सुरक्षा दी जाएगी, जिससे उनकी नकल करना नामुमकिन होगा.

इन प्रमुख उत्पादों को मिलेगा विशेष 'VIP' दर्जा

  • चाय की सुगंध: दार्जिलिंग और कांगड़ा चाय को अब यूरोप में 'शेंपेन' जैसा विशिष्ट स्थान प्राप्त होगा. इससे भारतीय चाय की साख वैश्विक बाजारों में और बढ़ेगी.
  • हथकरघा और वस्त्र: बनारसी साड़ी, कांजीवरम सिल्क और कश्मीरी पश्मीना जैसे भारतीय शिल्प अब पेरिस और मिलान जैसे फैशन केंद्रों में अपनी मौलिकता और शुद्धता के साथ पहचाने जाएंगे.
  • खाद्यान्न और फल: बासमती चावल को अब एक विशेष 'प्रोटेक्टेड ब्रांड' की सुरक्षा मिलेगी, जो इसे अन्य देशों के चावल से अलग और प्रीमियम श्रेणी में रखेगा. साथ ही, रत्नागिरी के 'हापुस' (अल्फांसो आम) को यूरोपीय सुपरमार्केट में एक विशेष पहचान मिलेगी.
  • पारंपरिक हस्तशिल्प: कोल्हापुरी चप्पल जैसे स्वदेशी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से उनके निर्यात और कीमतों में भारी उछाल आने की उम्मीद है.