अमेरिका और रूस में टकराव के हालात; रूस ने वेनेजुएला के पास समुद्र में तेल के जहाज को बचाने के लिए पनडुब्बी तैनात की, भेजी नौसेना
Russia Deployed Submarine To Protect Oil Ship From America in Atlantic Ocean
America-Russia Tension: हाल ही में जिस तरह से अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठा लिया। उसे देखते हुए रूस ने खुले शब्दों में अमेरिका की कड़ी निंदा की थी। रूस ने सीधे तौर से कहा था कि अमेरिका अपनी ताकत के बल पर मनमानी और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन कर रहा है। अमेरिका ने जो किया वो बिलकुल भी ठीक नहीं है। रूस के इस बयान के बाद अमेरिका के साथ उसकी तल्खी बढ़ती देखी गई। लेकिन अब अमेरिका और रूस में सीधे टकराव के हालात भी बन रहे हैं। समंदर में दोनों महाशक्ति देश आमने-सामने आ गए हैं और सैन्य प्रदर्शन जैसी स्थिति बन गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वेनेजुएला के पास उत्तरी अटलांटिक महासगार में अमेरिका द्वारा एक प्रतिबंधित ऑयल शिप यानि तेल के जहाज को बचाने के लिए रूस ने अपनी नौसेना को एक्शन मोड में लाकर खड़ा कर दिया है। रूस ने जहाज को अमेरिकी कब्जे से बचाने के लिए और अमेरिका से उसकी सुरक्षा के लिए अपनी एक पनडुब्बी को समंदर में ऐक्टिव किया है। जहाज को एस्कॉर्ट किया जा रहा है। रूसी नौसेना के अन्य जहाज (युद्धपोत) भी ऑयल शिप की निगरानी में हैं। ताकि अमेरिका को जहाज पर चढ़ाई कर उसे ज़ब्त करने से रोका जा सके। जबकि दूसरी तरफ अमेरिका इस प्रतिबंधित ऑयल शिप को जब्त करना चाहता है। ऐसे में पूरी घटना अमेरिका और रूस के बीच तनाव को बढ़ा रही है।
अमेरिका के निशाने पर तेल का जहाज
बताया जाता है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित तेल का यह जहाज पहले 'बेला 1' (Bella 1) नाम से जाना जाता था, लेकिन हाल ही में यह जहाज रूसी झंडे के साथ 'मैरिनेरा' Marinera नाम से समुंदर में गतिविधि कर रहा है। यह जहाज वर्तमान समय में खाली है। अमेरिकी सेना इस जहाज लगातार को ट्रैक कर रही है और संभावित रूप से इसे जब्त करने की योजना बना रही है। बताया जाता है कि यह जहाज पिछले दो हफ्तों से वेनेजुएला के पास अमेरिकी कोस्ट गार्ड की घेराबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था।
दिसंबर 2025 में कैरिबियन में अमेरिकी सेना ने इसे बोर्ड करने की कोशिश की थी क्योंकि यह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। लेकिन चालक दल ने इसका कड़ा विरोध किया और जहाज का रास्ता बदल दिया। वहीं पीछा किए जाने के दौरान चालक दल ने जहाज पर रूसी झंडा पेंट कर दिया और इसका नाम मरीनेरा कर दिया गया। जहाज में रूसी झंडा लगाया गया, साथ ही नाम भी रूसी रजिस्ट्री में दर्ज करा दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस ने इतनी जल्दी इस जहाज को अपना झंडा इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी, जो बेहद असामान्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका कार्रवाई कर सकता है, झंडा बदलने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।
ज्ञात रहे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2025 में वेनेज़ुएला से आने-जाने वाले प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया था। वहीं वेनेज़ुएला ने इसके जवाब में कहा था कि अमेरिका यह कार्रवाई कर उसके तेल की चोरी कर रहा है। दरअसल अमेरिका ने बड़ी मात्रा में वेनेज़ुएला के समंदर में आ-जा रहे तेल जहाजों पर कब्जा कर लिया था। जिसके बाद से ही अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच टकराव की स्थिति बढ़ती चली गई। ट्रंप ने बार-बार आरोप लगाया कि वेनेज़ुएला की सरकार जहाजों से अमेरिका में ड्रग्स भेज रही है।
आखिरकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना द्वारा वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में सैन्य ऑपरेशन चलवाया। जिसमें काराकास में हमले के बाद अमेरिकी सेना ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। जिसके बाद दोनों को अमेरिकी की धरती पर लाया गया। अमेरिकी सेना दोनों को न्यूयॉर्क ले गई, जहां राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी दोनों नार्को-टेररिज्म और अमेरिका के खिलाफ साजिश से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे हैं।
अब तो अमेरिका और रूस पर नजर
रूस-अमेरिका के बीच समुद्र में जिस तरह से 'जंग' जैसे हालात बनते दिख रहे हैं उससे एक सवाल उठता है कि क्या रूस अमेरिका से सीधी जंग की तैयारी में है? मालूम रहे कि, अमेरिका और रूस दोनों ही दुनिया की दो महाशक्ति हैं, अब जब दुनिया की दो महाशक्ति आमने-सामने हैं तो चिंताजनक स्थिति बन गई है। आगे के क्या हालात होते हैं? इस पर पूरी दुनिया की नजर है। वहीं रूस के इस एक्शन से अमेरिका ने भी अपनी कार्रवाई से पीछे न हटने की बात कही है।