राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वास्तुविदों की कार्यशैली पर उठाए सवाल, छात्राओं को दी सलाह- पहले करियर बनाएं, प्रेम और शादी बाद में करें
Governor Anandiben Patel questions the working style of architects
लखनऊ। Governor Anandiben Patel questions the working style of architects, राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मंगलवार को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में वास्तुविदों (आर्किटेक्ट) की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। राज्यपाल दीक्षा समारोह की अध्यक्षता कर रहीं थीं, उन्होंने छात्राओं को करियर बनाने के बाद ही अन्य काम करने की सलाह भी दी।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के भवनों में कमरों, कक्षाओं और कैंटीन को लेकर कहा कि लेआउट इस तरह से तैयार होता है, जिसमें अधिकांश भाग अनुपयोगी होता है। इनको देखकर तो लगता है कि मानो किसी अनपढ़ की तरह उसकी डिजाइन तैयार की जाती है।
राज्यपाल ने एकेटीयू भवन का उदाहरण देते हुए कहा कि एक सभागार बना है, जिसमें दो कोने पर अधिकारी बैठेंगे और बाकी खाली रहेगा, ऐसा क्यों, जितनी जरूरत हो उतना बनाएं। जगह का सदुपयोग करें। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि मैं एक भवन के शिलान्यास में गई तो पता चला कि निर्माण हो गया है, लेकिन बिजली कहां से आएगी, पानी की आपूर्ति कैसे होगी, इसके बारे में कोई इंतजाम नहीं हैं। पूछा तो बोले, दोबारा खोदकर बनेगा।
भवनों के निर्माण पर सवाल
बिना खिड़की के हॉस्टल, टंकी में बंदर नहाते हैं : गर्ल्स हॉस्टल में भी कमी दिखी। अंदर कोई खिड़की नहीं। बुक्स रखने के लिए कोई जगह नहीं थी। जब खोला तो अंदर से चूहा निकला। तीसरी मंजिल में टंकी रहती है, जिस पर कोई ढक्कन नहीं है। बंदर उसमें नहाते हैं। एक क्लासरूम देखने गई तो ब्लैकबोर्ड की ऊंचाई देखी। उसे बच्चे नहीं पहुंच पाते हैं।
मेस की निगरानी करना जरूरी: मेस में देखते रहिए कि मसाला कौन-सा आता है? एक्सपायरी डेट वाला तो नहीं आता? नॉनवेज वाला तो नहीं आता? कंडीशन यहां तक कि छत पर एक-एक फुट के पौधे जम गए। मैंने अपने PSO से कहा कि इनको उखाड़ो।
200 छात्रों के हॉस्टल का बेसिन घर वाले के बराबर : क्लासरूम की डिजाइन में न्यू एजूकेशन पालिसी में 60 स्टूडेंट्स से ज्यादा नहीं रहना है। हॉस्टल के टॉप फ्लोर में जो पंखा लगा, उसमें सिर लड़ रहा है। लगाने वाले को नहीं दिखा, पर आप लोगों को देखना चाहिए। यूनिवर्सिटी में जब जाती हूं, आंगनबाड़ी में जाती हूं तो बहुत निराशा होती है। कमरे में स्विच बोर्ड गलत जगह होते हैं।
सरकार का पैसा केवल पूरा खर्च करने के लिए नहीं : उन्होंने कहा कि बीते दिनों तीन विश्वविद्यालय का दौरा किय, जहां एडमिन कॉरिडोर था। एक कॉर्नर पर एडमिन ब्लॉक में 2 मंजिल में लाइब्रेरी बनी है। लाइब्रेरी में बच्चे एक किमी दूर से पढ़ने जाते हैं, दो किमी दूर हॉस्टल है। उनमें पढ़ेगा कौन। सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार ने जो बजट दिया, उसका उपयोग ही करना है। अगर उचित न लगे तो लौटा दें।
बच्चों के लिए आईना लंबाई से ऊपर लगा
राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र में गई तो पता चला कि बच्चों के लिए लगा आईना ऊपर लगा है। मैंने पूछा बच्चे कैसे देखते हैं, तो बताया गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गोद में उठाकर बच्चों को शीशा दिखाती हैं। एक और उदाहरण देते हुए कहा कि छात्रावास का निर्माण किया गया, लेकिन खिड़की नहीं है। नई शिक्षा नीति के तहत एक छात्रावास में 60 से अधिक विद्यार्थी नहीं रह सकते, लेकिन 100 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाए जा रहे हैं, ऐसा क्यों।
छात्राओं को सलाह-पहले करियर बनाएं, फिर शादी करें
राज्यपाल ने छात्राओं से कहा कि युवावस्था में भटकाव की आशंकाएं बहुत होती हैं। पढ़ाई के दौरान लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती हैं। कइयों को बच्चा भी हो जाता है। उस बच्चे की जिम्मेदारी जानते हैं किस पर जाती है, सरकार पर जाती है। ऐसा पराक्रम आप लोग मत करिए। दूर रहिए इन पराक्रमों से।
उन्होंने कहा कि मैं लव मैरिज के खिलाफ नहीं हूं, आप करिए लव मैरिज। आपको उनसे प्रेम है, उनको आपसे प्रेम है तो शादी करिए। शादी तभी करिए जब आत्मनिर्भर हो जाइए। प्रेम आवश्यक है, लेकिन पहले करियर। पहले अपने पैरों पर खड़े हों, फिर जो करना है करें। मेरा बेटा बेंगलुरु में पढ़ने के लिए गया था, मैंने उससे कहा कि बेंगलुरु की कोई बेटी पसंद हो तो विवाह करा देंगे। उसने कोई पसंद ही नहीं की।
यदि आपको भी कोई पसंद है तो पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर शादी कीजिए। शिक्षा और आत्मनिर्भरता जीवन के सबसे मजबूत आधार हैं। पढ़ाई केवल डिग्री पाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी है।
24वें दीक्षा समारोह में 35 मेधावियों को स्वर्ण, 23 को रजत और 24 कांस्य पदक दिए गए। 62,537 विद्यार्थियों को डिग्री और 53 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कालेज की बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की छात्रा अंशिका राणा को सर्वोच्च स्थान पाने पर चांसलर मेडल दिया गया। गाजियाबाद केआइईटी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की छात्रा इशिका को कमल रानी वरुण स्मृति स्वर्ण पदक मिला।