पंजाब कांग्रेस में खत्म हुआ टकराव! राजा वड़िंग के हाथ में संगठन की कमान, बने रहेंगे प्रदेश अध्यक्ष
Infighting within Punjab Congress ends! Raja Warring takes charge of the organization
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में नई नियुक्तियों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, लोकसभा सदस्य सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत दर्जनों नेता राजा वड़िंग के विरोध में खड़े हो गए हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को किसी भी हालत में नहीं बदला जाएगा।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी मंगलवार को पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बैठक कर फिलहाल नेतृत्व में किसी भी तरह का बदलाव न करने की दलील दी है।
कई वरिष्ठ नेताओं ने पंजाबी जागरण से बातचीत करते हुए बताया कि विधानसभा चुनाव नजदीक आ गए हैं। यदि अब कोई बदलाव किया जाता है तो इसका अन्य राज्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सीनियर नेताओं ने भूपेश बघेल से किया कहा?
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में वर्षों से सक्रिय कई वरिष्ठ नेताओं ने भूपेश बघेल को दलील दी कि कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर कई नेताओं को उनके कद से अधिक ताकत दी है और हाईकमान को लोगों की राय के अनुसार फैसला लेना चाहिए।
बताया जाता है कि कांग्रेस के अंदरूनी कलह को समाप्त करने के लिए पंजाब कांग्रेस मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने मंगलवार को पार्टी के विभिन्न नेताओं के साथ बैठक कर उनकी नब्ज टटोलने का प्रयास किया।
बघेल ने मंगलवार को कांग्रेस भवन में कार्यकारी अध्यक्षों राज कुमार वेरका और सुखविंदर सिंह डेनी, जिला प्रधानों तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बैठक की।
बैठक में ये नेता नहीं रहे शामिल
जानकारी के अनुसार बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष संगत सिंह गिलजियां, जिला प्रधानों की बैठक में जालंधर शहरी और देहाती के प्रधान राजिंदर बेरी तथा बलविंदर सिंह लाडी शेरोवालिया, लुधियाना के प्रधान संजय तलवाड़, खन्ना के प्रधान लखबीर सिंह लखा, गुरदासपुर के प्रधान बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा और बरनाला के प्रधान काका ढिल्लों उपस्थित नहीं हुए।
सूत्रों के अनुसार राजिंदर बेरी और संजय तलवाड़ ने अमरनाथ यात्रा पर होने, लखबीर सिंह लखा ने विदेश से आ रहे अपने बेटे को दिल्ली एयरपोर्ट पर लेने जाने तथा काका ढिल्लों ने किसी जरूरी कार्यक्रम में शामिल होने का हवाला दिया। इस तरह सिर्फ तीन जिला प्रधान ही बैठक से गैरहाजिर रहे।
कुछ दिनों में हल हो जाएगा मामला
सूत्रों के अनुसार पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने बागी हुए नेताओं को समझाने का प्रयास भी किया है और पार्टी को उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में मामला हल हो जाएगा। हालांकि चन्नी, रंधावा, परगट सिंह समेत कई विधायकों ने राजा वड़िंग की मौजूदगी में भूपेश बघेल से बातचीत न करने की बात कही है, लेकिन कांग्रेसी सूत्रों के अनुसार आगामी दिनों में होने वाली बैठकों में उनके आने की उम्मीद है।
बताया जाता है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ.पी. सोनी, जो पहले चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित निवास पर हुई बैठक में शामिल हुए थे, उन्होंने सोमवार को भूपेश बघेल से नेता प्रतिपक्ष के आवास पर मुलाकात की।
इसी तरह मंगलवार को पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शमशेर सिंह दूलो, पूर्व मंत्री ब्रह्म महिंद्रा, बलबीर सिंह सिद्धू, जगमोहन सिंह कंग, पूर्व विधायक कुलजीत सिंह नागरा, हरदयाल कंबोज, साधु सिंह धर्मसोत, विधायक सुखपाल सिंह खैरा तथा अन्य नेताओं ने भी भूपेश बघेल से मुलाकात कर उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया।
संगठनात्मक ढांचे में कोई बदलाव नहीं
जानकारी के अनुसार अधिकांश नेताओं ने सुझाव दिया कि यदि संगठनात्मक ढांचे में अभी किसी तरह का बदलाव किया गया तो पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस हाईकमान पार्टी के अंदरूनी कलह को किस तरह हल करता है। सभी की नजरें पार्टी के फैसले पर टिकी हुई हैं।