तीन जहाजों पर हमले में 3 भारतीय नाविक शहीद, भारत ने जताया ऐतराज; अमेरिका का बयान सामने आया
Three Indian sailors killed in attacks on three ships
नई दिल्ली। Three Indian sailors killed in attacks on three ships, पश्चिम एशिया संघर्ष की स्थिति बिगड़ने के साथ ही पिछले तीन दिनों में अमेरिकी सेना ने तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया है जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और पांच दर्जन से ज्यादा भारतीय नाविकों को बचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। इन हमलों में एमटी (मोटर इंजन) मारिवेक्स, एमटी सेटेबेलो और एमटी जलवीर शामिल हैं। वैसे इन तीनों में कोई भी भारत में पंजीकृत जहाज नहीं था लेकिन इनमें काम करने वाले तकरीबन सारे नाविक भारतीय ही थे।
एमटी सेटेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविक डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शहीद हो गये हैं। जबकि मारिवेक्स पर 24 भारतीय नाविकों को ओमान सरकार की मदद से सुरक्षित बचाया गया, जबकि जलवीर पर सवार करीब 20 भारतीय नाविक भी सुरक्षित हैं और उनका बचाव देर शाम तक चलने की सूचना है।
इस घटनाक्रम पर भारत ने अमेरिका के साथ अपना कड़ा विरोध जताया है।मंगलवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने नई दिल्ली अमेरिकी दूतावास में कार्यकारी राजदूत (चार्ज डी’एफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब कर अपनी नाराजगी जताई और इस बारे में अपनी औपचारिक विरोध नोट भी सौंपा।
विदेश मंत्रालय ने हमलों पर क्या कहा?
बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हमला अमेरिकी नेवी ने किया है। हम अपने समुद्री समुदाय की भलाई और सुरक्षा को बहुत महत्व देते हैं। सेटेबेलो पर हमले के बाद हमने अमेरिकी पक्ष के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया। हमने अमेरिकी चार्ज डी’एफेयर्स (सीएडी) जेसन मीक्स को तलब किया और उन्हें अपनी गहरी चिंता से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि हमने स्पष्ट कहा कि ऐसे हमले बंद होने चाहिए। संवाद और कूटनीति ही संघर्ष सुलझाने का रास्ता है तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अमेरिकी सीएडी को तलब करने के कुछ ही घंटे बाद अमेरिकी नौ सेना ने फिर से ओमान तट से गुजर रहे जलवीर को निशाना साधा है, जिसका साफ मतलब है कि स्थानीय तौर पर तैनात अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड (सेंटकाम) स्वतंत्र तरीके से अपना काम कर रही है और उस तक अमेरिकी दूतावास की कोई पहुंच नहीं है।
असलियत में भारती की तरफ से आधिकारिक तौर पर मारे गये भारतीय नाविकों पर कोई बयान आने से पहले ही अमेरिकी सैन्य कमांड ने ना सिर्फ उक्त पोत पर किये गये हमलों के वीडियो को जारी किया और आरोप लगाया है कि ईरान के खिलाफ लागू नाकेबंदी को तोड़ने की घटना को देखते हुए व ईरानी तेल के ट्रांसपोर्ट को रोकने के लिए हमला किया गया।
अमेरिका के उक्त बयान से पहले सीफेयरर्स यूनियन ने एक बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों को मौत हो गई है। मर्चेंट नाविकों के इस संगठन ने अमेरिकी हमले की निंदा की है।बुधवार को ही जहाजरानी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि सेटेबेलो से बचे 21 भारतीय समेत सभी शेष 25 क्रू सदस्यों (21 भारतीय, 2 पाकिस्तानी, 1 रूसी, 1 यूक्रेनी) को सुरक्षित निकाला गया है। जलवीर पर सवार भारतीय नाविकों का बचाव कार्य ओमान की नौसेना के साथ समन्वय में चल रहा है।
मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख की सहायता दी जाएगी
मृतकों के परिवारों को सीमैन वेलफेयर फंड से 10-10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी कई जहाजों में 18,000 से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं। होर्मुज में अभी भी 13 भारतीय जहाज हैं जिसमें 562 भारतीय नाविक सवार हैं।
कौन-कौन से ध्वज वाले जहाज पर हुआ हमला?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया है कि अमेरिका ने जिन तीन जहाजों पर हमला किया है उनमें से दो जहाज पलाउ ध्वज (पंजीकृत) वाले थे, जबकि जलवीर गिनी-बिसाउ ध्वज वाला था। इनमें से दो पर अमेरिकी प्रतिबंध (ओएफएसी-अमेरिकी विदेश मंत्रालय की एजेंसी जो प्रतिबंध लगाती है) लागू थे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी पश्चिम एशिया संकट के दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाया है। सरकार ने सभी जहाज मालिकों और नाविकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।