केंद्र सरकार पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा और सरहदी क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज दे - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

The Central Government should grant Special Category

The Central Government should grant 'Special Category'

देश की सीमा की रक्षा के लिए डटकर पहरा देता है पंजाब, फिर भी केंद्र की सहायता नाकाफी; पंजाब विशेष श्रेणी के दर्जे और विशेष सरहदी पैकेज का हकदार - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ 2,000 से अधिक गांव होने के बावजूद 'वाइब्रेंट विलेज-II' कार्यक्रम में सिर्फ 107 सीमावर्ती गांवों को ही शामिल किया गया - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पंजाब आतंकवाद, ड्रोन तस्करी, बाढ़ और सरहदी तनाव का बोझ झेल रहा है, राज्य को विकास में उसका हक दें केंद्र - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

'विकसित भारत-2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षित, महफूज और खुशहाल पंजाब का निर्माण जरूरी - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पंजाब ने पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 90:10 अनुपात में फंडिंग की मांग की: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

10 लाख रुपए की स्वास्थ्य योजना से लेकर शीर्ष रैंक वाले स्कूलों तक, पंजाब ने नीति आयोग में 'विकसित भारत' के लिए गवर्नेंस मॉडल पेश किया - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

केंद्र को मोहाली को 'नेशनल नॉलेज हब' घोषित करने और 'इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर मेगा-क्लस्टर' स्थापित करने चाहिए - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

पंजाब ने नीति आयोग में लंबे समय से लटक रहे मुद्दे उठाए, सरहदी क्षेत्रों के लिए इंसाफ और राज्य के राष्ट्रीय योगदान को मान्यता देने की मांग की - मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

नई दिल्ली, 11 जून: The Central Government should grant 'Special Category', पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के समक्ष पंजाब के लंबे समय से लटक रहे मुद्दों को जोरदार ढंग से रखा। मुख्यमंत्री ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों की पुनर्सुधार के लिए विशेष पैकेज की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री ने नीति आयोग से पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर 90:10 फंडिंग के साथ पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा (स्पेशल कैटेगरी स्टेटस) देने की मांग भी रखी।

मीटिंग को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब को दरपेश असाधारण सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर राज्य  का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य की आकांक्षाएं और उम्मीदें ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य से मेल खाती हैं।

अग्रणी सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब विशेष सहायता का हकदार
पंजाब को दरपेश विशिष्ट चुनौतियों पर पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब एक अग्रणी राज्य है जिसकी पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है। राज्य गंभीर और बहुपक्षीय संकट का सामना कर रहा है जिसमें लगातार सीमा पार से आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हेरोइन और हथियारों की तस्करी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। इसके नतीजे के रूप में युवाओं में नशीले पदार्थों की गंभीर समस्या, संगठित अपराध और बीएसएफ की निगरानी में कंटीली तार और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।”
प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने 2025 में आई बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को बुरी तरह झेला है, जिसमें 2,300 से अधिक गांवों को नुकसान पहुंचा और लगभग 12,905 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के बाद पंजाब के निवासियों को जिस मार का सामना करना पड़ा, उसका मंजर पूरे देश ने देखा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित घनी आबादी वाले गांव और कस्बे देश के दूसरे हिस्सों में हुए आर्थिक विकास से वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों की अनिश्चितता और जोखिम के नतीजे के रूप में सरहदी जिलों में निवेश नाममात्र रहा है और कई मामलों में पूंजी बाहर चली गई है तथा उद्योग बंद हो गए हैं या दूसरी जगहों पर पलायन कर गए हैं।

उन्होंने कहा, “हालांकि, हमारे दुश्मन पड़ोसी मुल्क के विरुद्ध पंजाब, भारत के लिए ढाल बनकर खड़ा है, पर भारत सरकार द्वारा राज्य और इसके सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए दी गई सहायता बहुत ही नाकाफी रही है।”

विकास कार्यों में भेदभाव की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हाल ही में शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट विलेज-II’ (गतिशील गांव-2) कार्यक्रम के तहत राज्य के सिर्फ 107 गांवों को शामिल किया गया है, जबकि 2,000 से अधिक गांव और कस्बे सरहद के बिल्कुल निकट स्थित हैं।”

केंद्र को पंजाब की जायज और लंबे समय से लटक रही मांगों को स्वीकार करना चाहिए

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा को मजबूत करने और राज्य को दरपेश बहुपक्षीय चुनौतियों को हल करने के लिए बार-बार अपील की है। 

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान से लगती हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित बनाने, इसे भविष्य के लिए तैयार करने और पंजाब को दरपेश बहु-पक्षीय संकट को हल करने के लिए, हम कई मौकों पर केंद्र सरकार के सामने संबंधित मांगें तुरंत रख चुके हैं। हालांकि, केंद्र ने उचित प्रतिक्रिया नहीं दी, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है।”

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मई 2025 में गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान उठाई गई मांगों के साथ-साथ वर्तमान बैठक में पेश की गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “विनती है कि गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान मेरे द्वारा उठाई गई और आज दोहराई गई पंजाब के लोगों की जायज मांगों को स्वीकार किया जाए।”

विकसित भारत के लिए सुरक्षित एवं खुशहाल पंजाब जरूरी

प्रधानमंत्री से पंजाब को और अधिक सहयोग देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब और इसके लोग अपने नुकसान की कीमत पर भी देश और इसकी सरहदों को दुश्मन पड़ोसी से बचाने की अपनी वचनबद्धता पर दृढ़ हैं।” 

पंजाब के मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि राज्य की जायज और हक की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और पंजाब को देश के आर्थिक विकास में उसकी बनती मान्यता और हिस्सा दिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि पंजाब ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करता रहेगा। 

उन्होंने कहा, “पंजाब और इसके लोग भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। एक सुरक्षित, महफूज और खुशहाल पंजाब ही ‘विकसित भारत 2047’ की गारंटी दे सकता है।”

‘रंगला पंजाब’ का सपना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाता है

पंजाब के विकास की रूपरेखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हिम्मत, उम्मीद और क्षमता की धरती पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में मुझे ‘रंगला पंजाब’ के लिए हमारा सामूहिक विजन पेश करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की यात्रा में अहम भूमिका निभाने के लिए दृढ़ है।” 

उन्होंने कहा कि चूंकि पंजाब की आकांक्षाएं राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं, इसलिए मानव पूंजी के विकास पर केंद्रित चर्चा समयोचित और बेहद महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने परिवार-केंद्रित विकास मॉडल की उम्मीद जताई, जो हर बच्चे की भलाई सुनिश्चित करने, कामकाजी उम्र की आबादी को उत्पादक और नवाचारी बनाने तथा बुजुर्गों को सम्मान और देखभाल प्रदान करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस लिए हमें अपनी अंदरूनी शक्तियों का डट कर सामना करने, लोगों को आधुनिक कौशलों के साथ सक्षम बनाने व ऐसा अनुकूल माहौल सृजित करने की जरुरत है जी उनको पंजाब व भारत के विकास सफर में सरगर्म योगदान डालने वाले व लाभार्थी बनने के योग्य बनाए।
देश की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कूली शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा पंजाब

मानव पूंजी के विकास में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब, भारत की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कूली शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि पंजाब प्रारंभिक शिक्षा को केवल स्कूली तैयारी के रूप में नहीं, बल्कि मानव पूंजी और समान विकास में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखता है। उन्होंने कहा, “मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पंजाब ने विकास के चरणों और सीखने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाल्यावस्था और प्राथमिक शिक्षा में बड़ा निवेश किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलाव खेल-आधारित शिक्षण पद्धति, कहानी सुनाने, सामूहिक गतिविधियों और अवधारणाओं के व्यावहारिक प्रयोग के माध्यम से संभव हुआ है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान सुनिश्चित करने हेतु शुरू किए गए ‘मिशन समर्थ’ की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “योजनाबद्ध अध्यापन और केंद्रित प्रयासों के कारण हमने बड़े स्तर पर सीखने के परिणामों में सुधार किया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘परख’ मूल्यांकन में पंजाब की शीर्ष रैंकिंग निरंतर और केंद्रित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा, “पंजाब के सरकारी स्कूलों के तीसरी से नौवीं कक्षा के विद्यार्थी प्रमुख विषयों में राष्ट्रीय औसत से 10 से 15 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो स्कूली यात्रा के दौरान लगातार हो रहे सुधार को दर्शाता है।”

हुनर शिक्षा स्कूल : शिक्षा को उद्योग से जोड़ना

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब शिक्षा को व्यावहारिक कौशल, रोजगार के अवसरों और विद्यार्थियों की आकांक्षाओं से जोड़कर स्कूली शिक्षा को नई परिभाषा दे रहा है। उन्होंने बताया कि योजनाबद्ध और उद्योगों के अनुरूप शिक्षा के माध्यम से युवाओं के लिए सार्थक मार्ग तैयार करने हेतु पंजाब के सभी 23 जिलों में 40 ‘हुनर शिक्षा स्कूल’ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, “वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए हुनर शिक्षा स्कूल कार्यक्रम के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा में लगभग 3,500 विद्यार्थी नामांकित हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि हुनर शिक्षा स्कूलों की विशेषता व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के साथ पूर्ण रूप से जोड़ने में है।

संचार, प्रौद्योगिकी, करियर तैयारी तथा पंजाब की संस्कृति और विरासत पर केंद्रित बुनियादी विषयों के साथ-साथ विद्यार्थियों को उद्योग-अनुकूल क्षेत्रों जैसे हेल्थकेयर साइंसेज़ एंड सर्विसेज, डिजिटल डिजाइन एंड डेवलपमेंट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा तथा ब्यूटी एंड वेलनेस में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मैक्स हेल्थकेयर , इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली , लेबरनेट और ओराने इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारे विद्यार्थी इंटर्नशिप, औद्योगिक दौरों, गेस्ट लेक्चरों, ग्रीष्मकालीन परियोजनाओं और औद्योगिक समन्वय के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 51 उद्योगों के 70 औद्योगिक दौरों का लाभ पहले ही 1,356 विद्यार्थी उठा चुके हैं। उन्होंने कहा, “यह माध्यमिक विद्यालय पाठ्यक्रम इंटर्नशिप आधारित है। एक जून, 2026 से विद्यार्थियों ने कार्यस्थल के वास्तविक वातावरण का अनुभव प्राप्त करने और पेशेवर जिम्मेदारियों को समझने के लिए औद्योगिक इंटर्नशिप शुरू कर दी है। 30 दिनों की इंटर्नशिप के लिए 2,500 रुपये तथा 14 दिनों की इंटर्नशिप के लिए 1,250 रुपये का स्टाइपेंड (भत्ता) भी दिया जा रहा है।”

बिज़नेस ब्लास्टर्स : विद्यार्थियों को नौकरी खोजने वालों से नौकरी देने वाले बनाना

उद्यमिता पर पंजाब के केंद्रित प्रयासों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने विद्यार्थियों को नौकरी खोजने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बनाने के विज़न के साथ ‘पंजाब यंग एंटरप्रेन्योर्स प्रोग्राम’ (बिज़नेस ब्लास्टर्स) शुरू किया है। उन्होंने कहा, “यह कुछ सीमित स्कूलों में पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुआ था, जो अब राज्यव्यापी आंदोलन बन चुका है।”


मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बिज़नेस ब्लास्टर्स’ को अब सरकारी और निजी, दोनों प्रकार के स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “केवल वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में ही यह कार्यक्रम लगभग 3,800 स्कूलों तक पहुंच चुका है, जिसमें 1,931 सरकारी स्कूल और 1,849 निजी स्कूल शामिल हैं। इससे पंजाब भर के 2.68 लाख से अधिक विद्यार्थियों को उद्यमिता शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और सीड फंडिंग तक पहुंच प्रदान कर लाभान्वित किया गया है।”

विद्यार्थियों की भावनात्मक तंदुरुस्ती के लिए प्रभावी कार्यक्रम

इस बात पर जोर देते हुए कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ भावनात्मक तंदुरुस्ती और व्यक्तित्व निर्माण सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने इस संबंध में सरकारी स्कूलों में एक राज्यव्यापी कार्यक्रम शुरू किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की दैनिक दिनचर्या में गाइडेड मेडिटेशन, गहरी और लंबी श्वास के अभ्यास, सकारात्मक संकल्प तथा कृतज्ञता व्यक्त करने के अभ्यासों को शामिल करता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एकाग्रता, भावनात्मक लचीलापन, आत्म-जागरूकता और मानसिक तैयारी को मजबूत करना है ताकि विद्यार्थियों को अधिक ध्यान और आत्मविश्वास के साथ सीखने में सक्षम बनाया जा सके।

पंजाब सरकार राज्य भर में कौशल विकास बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है

यह समझते हुए कि एक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के लिए प्रशिक्षित और उद्योग आधारित कार्यबल की आवश्यकता है, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष के दौरान सरकारी आईटीआई में सीटों की संख्या 35,000 से बढ़ाकर 52,000 कर दी गई थी, जिससे पंजाब भर के हजारों युवाओं के लिए व्यावसायिक शिक्षा तक पहुंच बढ़ी है।
उन्होंने आगे कहा कि इस समय सभी आईटीआई में मशीनरी उन्नयन के माध्यम से राज्यव्यापी आधुनिकीकरण परियोजना चल रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सामाजिक पुनर्वास के साथ कौशल विकास को जोड़ते हुए 11 जेलों में आईटीआई शुरू किए हैं।
हथियारबंद और सुरक्षा बलों के लिए युवाओं को तैयार कर रहे हैं सी-पाइट सेंटर
एक अन्य बड़ी पहल को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा स्थापित सेंटर ऑफ ट्रेनिंग एंड इम्प्लॉयमेंट ऑफ पंजाब यूथ (सी.पी.वाई.टी.ई.) युवाओं को सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में करियर के लिए तैयार करने में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सी-पाइट पंजाब भर में 14 आवासीय परिसरों के माध्यम से कार्य करता है और शैक्षणिक तथा शारीरिक फिटनेस पर केंद्रित तीन माह के कार्यक्रम के जरिए हर वर्ष लगभग 10,000 युवाओं को प्रशिक्षण देता है। उन्होंने कहा, “इन युवाओं को सशस्त्र सेनाओं में सैनिक के रूप में भर्ती के साथ-साथ राज्य के पुलिस और जेल विभाग तथा देशभर की सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे बताया कि सी-पाइट से प्रशिक्षण प्राप्त 2,500 उम्मीदवार इस वर्ष अग्निवीरों के रूप में सशस्त्र बलों में शामिल हुए हैं।


प्रत्येक परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना'

मानव पूंजी के विकास में स्वास्थ्य और पोषण के महत्व पर जोर देते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने ‘निरंतर देखभाल’ वाली नीति अपनाई है, जो रोकथाम और उपचार संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के माध्यम से ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा, “इस क्रांतिकारी पहल के तहत पंजाब का प्रत्येक परिवार 2,356 चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की विस्तृत श्रेणी के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार का हकदार है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे बताया कि यह योजना पूरे पंजाब और चंडीगढ़ में लगभग 900 सरकारी तथा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से लागू की जा रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित हो रही है।

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के लिए नई मिसाल कायम कर रहे हैं 'आम आदमी क्लीनिक'

पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में आए बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में 990 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जिनमें शहरी क्षेत्रों में 414 और ग्रामीण क्षेत्रों में 576 क्लीनिक शामिल हैं। उन्होंने कहा, “ये क्लीनिक स्वास्थ्य सुधार के स्तरबद्ध सिद्धांत पर आधारित हैं और 107 आवश्यक दवाइयां तथा 47 जांचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराते हैं। इन्हें आईटी आधारित रियल-टाइम रिपोर्टिंग प्रणाली का सहयोग प्राप्त है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रही है। उन्होंने कहा, “अब तक 5.54 करोड़ से अधिक ओपीडी मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। प्रतिदिन लगभग 84,000 मरीजों को सेवाएं प्रदान की जाती हैं और 90 प्रतिशत से अधिक मरीजों को निर्धारित सभी दवाइयां क्लीनिक में ही निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस पहल का प्रभाव लोगों की संतुष्टि के स्तर से स्पष्ट झलकता है। उन्होंने कहा, “97 प्रतिशत मरीजों ने उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं पर संतोष व्यक्त किया है, जिससे इस पहल के प्रति जनता का विश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।” उन्होंने आगे घोषणा की कि 400 और आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए जाने की प्रक्रिया जारी है, जो प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराती है।

युद्ध नशों  विरुद्ध : नशे के खिलाफ पंजाब की लड़ाई को मिली मजबूती

पंजाब के नशा-विरोधी अभियान पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में नशे के सेवन और इसकी तस्करी के विरुद्ध व्यापक एवं दृढ़ प्रयास के रूप में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पंजाब भर में 547 ओट क्लीनिक, 183 नशा मुक्ति केंद्र और 90 पुनर्वास केंद्र कार्यरत हैं, जो उपचार और सुधार में सहायता कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंद व्यक्तियों के लिए निरंतर उपचार सुनिश्चित करने हेतु नशा मुक्ति सेवाओं का विस्तार 19 जेलों तक भी किया गया है।
इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि पंजाब ने अपनी तरह की अनूठी निवारक शिक्षा पहल ‘स्कूल नशों के विरुद्ध’ शुरू की है। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम 3,658 सरकारी स्कूलों के लगभग आठ लाख विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है। विद्यार्थियों को नशे के सेवन के खिलाफ खड़े होने तथा जीवन में सही निर्णय लेने के लिए आवश्यक ज्ञान, आलोचनात्मक सोच के कौशल और मूल्यों से सुसज्जित किया जा रहा है।”

खेल और फिटनेस : नशा-मुक्त पंजाब की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए पंजाब सरकार ने ऐतिहासिक पहल ‘खेड़दा पंजाब, बदलदा पंजाब’ के माध्यम से एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा, “नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करके नहीं लड़ी जाएगी, बल्कि हमारे युवाओं को रचनात्मक, अनुशासित और प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियों में शामिल करके भी लड़ी जाएगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर खेल अवसंरचना को मजबूत करने, फिटनेस को बढ़ावा देने और प्रतिभा को निखारने के लिए पंजाब सरकार ने वर्ष 2026-27 में खेल क्षेत्र हेतु 1,763 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट निर्धारित किया है। उन्होंने आगे बताया कि स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने और युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाने के लिए पूरे पंजाब में 3,150 से अधिक गांव स्तरीय खेल मैदान और 5,000 ग्रामीण जिम विकसित किए जा रहे हैं।
‘सीएम दी योगशाला’ की सफलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पहल पूरे राज्य में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और फिटनेस को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, “यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि इस पहल के तहत प्रतिदिन लगभग तीन लाख लोग योग करते हैं।”
प्रदेश के आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट्स भविष्य के अधिकारी तैयार कर रहे हैं

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की एक और सफल पहल प्रदेश सरकार द्वारा वित्त पोषित आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी इंस्टीट्यूट्स (एएफपीआई) की स्थापना है, जो युवाओं को एनडीए और सीडीएस/ओटीए के माध्यम से सशस्त्र सेनाओं में कमीशन अधिकारी भर्ती होने के लिए तैयार करने हेतु दो से तीन साल के लिए आवासीय प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

इन संस्थानों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लड़कों के लिए महाराजा रणजीत सिंह एएफपीआई ने 55% की सफलता दर दर्ज की है और इस संस्थान के लगभग 196 कैडेट सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी के रूप में भर्ती हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि लड़कियों के लिए माई भागो एएफपीआई से 43 महिला कैडेटों ने एनडीए, ओटीए, आईएनए और एएफए स्ट्रीम में ज्वाइन किया है, जो जल्द ही कमीशन अधिकारी बनने वाली हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब ने हाल ही में एक नया एएफपीआई स्थापित किया है जो सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में कमीशन अधिकारी बनने के इच्छुक लड़के और लड़कियों को 15 दिनों से तीन महीने तक की अल्पकालिक प्रशिक्षण प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा, "यह कार्यक्रम नर्सों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और वकीलों जैसे पेशेवरों के लिए भी खुला है।"

प्रौद्योगिकी के माध्यम से रोजगार इकोसिस्टम को मजबूत कर रहा पंजाब

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने नियोक्ताओं और नौकरी तलाशने वालों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए रोजगार पोर्टल www.punjabrozgar.org.in शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पोर्टल ने डेटा-संचालित दृष्टिकोण अपनाकर राज्य भर में रोजगार क्षमता को बढ़ावा देते हुए नौकरी देने वालों और संभावित कर्मचारियों के बीच तालमेल बनाने में मदद की है।

पंजाब की सुरक्षा को और मजबूत कर रही प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा पहल

आंतरिक और सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति पंजाब की प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मानव पूंजी विकास तभी सफल हो सकता है जब यह सुरक्षित समुदायों, सामाजिक लचीलापन और मजबूत संस्थानों द्वारा समर्थित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) जैसी पहलों के माध्यम से सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति एक सक्रिय और प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है, अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस तंत्रों को मजबूत किया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ तैनात की हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सड़क सुरक्षा बल के माध्यम से नागरिक-केंद्रित पहलों ने पंजाब भर में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों और सड़क सुरक्षा परिणामों में काफी सुधार किया है।

मोहाली को राष्ट्रीय ज्ञान एवं नवाचार क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने एकीकृत योजना और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के सृजन के माध्यम से मोहाली को राष्ट्रीय ज्ञान एवं नवाचार क्षेत्र (एनकेआईआर) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में उन्नत साझा अनुसंधान सुविधाएँ, समर्पित फंडिंग तंत्र और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, "इस उत्कृष्टता केंद्र का ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, एग्री-टेक और उन्नत विनिर्माण पर केंद्रित होगा।"

मुख्यमंत्री ने मोहाली में कैम्प्स और सहयोगी शैक्षणिक केंद्र स्थापित करने के लिए प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने की भी वकालत की। उन्होंने आगे कहा, "यह वैश्वीकरण संबंधी भारत के एजेंडे को मजबूत करेगा और विश्वव्यापी शैक्षणिक साझेदारी में वृद्धि करेगा।"

शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के माध्यम से विश्व स्तरीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार का आह्वान भी किया। उन्होंने यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों में शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख विश्व केंद्रों के साथ सीधे हवाई संपर्क की वकालत की।

पंजाब द्वारा मोहाली में एकीकृत सेमीकंडक्टर मेगा-क्लस्टर स्थापित करने की मांग

भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य में पंजाब की अहम भूमिका पर जोर देते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार से सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मोहाली में एक ऑल-इन-वन एकीकृत सेमीकंडक्टर मेगा-क्लस्टर (आईएसएमसी) स्थापित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति फ्रंटियर टेक हब रोडमैप ने भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान किया है और पंजाब उस दृष्टिकोण में अहम योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सेमीकंडक्टर निर्माण में मोहाली की अनूठी विशेषताएँ

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यद्यपि भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति के तहत गुजरात में स्टैंडअलोन फ्रंट-एंड फैब्रिकेशन इकाइयों और असम तथा सानंद में बैक-एंड ओएसएटी सुविधाओं को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया गया है, लेकिन फिर भी वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विभाजन के कारण कुछ कमियाँ अभी भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहाली में देश की एकमात्र पूरी तरह से एकीकृत उपकरण निर्माता सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) स्थित है और यह एक व्यापक एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर निर्माण, असेंबली और पैकेजिंग इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए आदर्श स्थान है। उन्होंने कहा, "ग्रीनफील्ड साइटों से शुरुआत करने वाले कई क्षेत्रों के विपरीत, मोहाली के पास मजबूत ब्राउनफील्ड फाउंडेशन, संस्थागत ज्ञान और क्लास 10 और क्लास 100 क्लीनरूम, खतरनाक रसायनों और सटीक मेट्रोलॉजी को संभालने में चार दशकों का अनुभव है।"

4,500 करोड़ रुपये की लागत से एस.सी.एल. के किए जाने वाले आधुनिकीकरण से मोहाली भारत का सेमीकंडक्टर हब बन सकता है

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सभा को बताया कि भारत सरकार पहले ही एस.सी.एल. मोहाली के आधुनिकीकरण के लिए 4,500 करोड़ रुपये देने का वादा कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निवेश का उद्देश्य उन्नत वाणिज्यिक पाइपलाइनों के साथ-साथ वेफर उत्पादन क्षमता को लगभग 100 गुना तक बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "4,500 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का उपयोग मोहाली को एक ऑल-इन-वन एकीकृत सेमीकंडक्टर मेगा-क्लस्टर में बदलने के लिए किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि डिजाइन, फैब्रिकेशन और एडवांस्ड पैकेजिंग सुविधाओं (एटीएमपी/ओएसएटी) को 50 किलोमीटर के दायरे में लाने से घरेलू लीड टाइम में काफी कमी आएगी, आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और वाणिज्यिक फाउंड्री के लिए एक ऐसा केंद्र बनेगा जो विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके।

भारत के सेमीकंडक्टर विकास में मोहाली बन सकता है अग्रणी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहाली के कई रणनीतिक और लॉजिस्टिक लाभ हैं जो इसे एकीकृत सेमीकंडक्टर मेगा-क्लस्टर के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। उन्होंने कहा, "मोहाली में प्रशिक्षित मानव शक्ति, रक्षा और रणनीतिक उपभोक्ताओं से निकटता, आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्राइवेट पहले से ही उपलब्ध हैं।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि क्लस्टर की स्थापना से पंजाब दुनिया के सबसे रणनीतिक और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में शुमार हो जाएगा और प्रदेश में आर्थिक विकास और नवीनता को गति मिलेगी।