योगी सरकार का नूतन स्वरूप: आठ मंत्रियों का शपथ ग्रहण और उनके राजनीतिक रसूख का विश्लेषण

योगी सरकार का नूतन स्वरूप: आठ मंत्रियों का शपथ ग्रहण और उनके राजनीतिक रसूख का विश्लेषण

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The new face of the Yogi government: Swearing-in of eight ministers

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार का लंबा इंतजार रविवार को खत्म हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में छ नए चेहरे शामिल हुए और दो मंत्रियों को प्रमोशन का तोहफा मिला। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

योगी कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों और प्रोन्नति पाने वालों में भूपेन्द्र चौधरी, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, सुरेन्द्र दिलेर, कैलाश राजपूत, सोमेंद्र तोमर व अजीत सिंह पाल हैं। यहां आपको इन सभी मंत्रियों का संक्षिप्त परिचय दे रहे हैं-

भूपेन्द्र चौधरी

वह भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्हीं की नेतृत्व में प्रदेश ने भाजपा ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। दिसंबर में पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही उन्हें मंत्री बनाये जाने की संभावना जतायी जा रही थी। वह पहले भी योगी सरकार ने पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं।

bhupendra chaudhary

जाट समाज से आने वाले भूपेन्द्र चौधरी की अपने समाज में पकड़ होने के साथ ही सर्व समाज में स्वीकार्य नेता माना जाता है। उन्हें मंत्री पद देकर भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों को मंत्री बनाने की परम्परा का निवर्हन करने के साथ जाट समाज को पाले में रखने का प्रयास किया है।

मनोज पांडेय

ऊंचाहार विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। वह तीनों बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए।

Manoj Pandey

सपा में ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माने जाते थे, भाजपा ने भी उन्हें ब्राह्णणों के नुमाइंदे और राज्य सभा चुनाव में पार्टी से बगावत कर भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने के पुरस्कार के रूप में मंत्रिमंडल में स्थान दिया है। मनोज पांडेय ने छात्र राजनीति से ही मुख्य धारा की राजनीति में प्रवेश किया। 

कृष्णा पासवान

 फतेहपुर की खागा सुरक्षित सीट से चौथी बार विधायक हैं और पासी समाज के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। भाजपा में बूथ अध्यक्ष से लेकर फतेहपुर की जिलाध्यक्ष, कानपुर क्षेत्र की संयोजक, प्रदेश उपाध्यक्ष और अनुसूचित मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री भी रही हैं।

krishna Paswan

दो बार जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं। महिला सशक्तीकरण के चेहरे के रूप में उनको मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। उनके मंत्री बनने से योगी सरकार में पासी समाज कर प्रतिनिधित्व भी हो गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में पासी समाज के वोटों का बड़ा हिस्सा भाजपा से छिटककर समाज वादी पार्टी की तरफ चला गया था। 

हंसराज विश्वकर्मा

विधान परिषद सदस्य हैं और वाराणसी में 10 साल तक भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव में उनकी अहम भूमिका रही है। इन्हें भाजपा संगठन के चेहरे तौर पर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। 

Hansraj Vishwakarma

सुरेंद्र दिलेर

 राजनीतिक परिवार से आते हैं। वर्ष 2024 के उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर पहली बार खैर से विधायक निर्वाचित हुए थे। वाल्मीकि समाज से आने वाले दिलेर ने सपा प्रत्याशी डा. चारु कैन को 38 हजार 393 मतों के अंतर से पराजित किया था।

surendra diler

सुरेंद्र के दादा किशन लाल दिलेर छह बार विधायक चार बार सांसद रहे। उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर भाजपा से एक बार सांसद व एक बार विधायक रह चुके हैं। गौरतलब है कि मौजूदा योगी मंत्रिमंडल में वाल्मीकि समाज से कोई मंत्री नहीं है।

कैलाश राजपूत

कन्नौज जिले की तिर्वा सीट से विधायक हैं। छात्र राजनीति से उन्होंने मुख्य धारा की राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 1996 में पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने। मगर, वर्ष 2007 बसपा में चले गये। इसी वर्ष बसपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक बन गये। लेकिन बसपा से उनका मोह भंग हो गया। भाजपा में वापस आये।

kailash singh rajput

वर्ष 2017 और वर्ष 2022 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने। लोध जाति से ताल्लुक रखने वाला कैलाश राजपूत की अपनी समाज पर इतनी गहरी पकड़ है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इन्होने तिर्वा विधानसभा में सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को 14 हजार से अधिक मतों से पीछे कर दिया, यही अंतर डिंपल यादव की हार का कारण बन गया।

भाजपा ने कैलाश राजपूत को राज्यमंत्री बनाकर लोध समाज को पाले में रखने के साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनके संसदीय क्षेत्र कन्नौज में घेरने का प्रयास किया है। 

सोमेन्द्र तोमर

अखिल भारतीय विध्यार्थी परिषद से राजनीति शुरू की। मेरठ दक्षिण से विधायक हैं। कबड्डी के खिलाड़ी रहे सोमेन्द्र तोमर ने इसी खेल से राजनीति का कैचिंग दांव सीखा। जिनकी जाति गूर्जर समाज के बीच गहरी बनाई।

somendra tomar

भाजपा के संगठन को मजबूत करने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लिहाजा इन्हें स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाकर सरकार ने पश्चिमी यूपी के गुर्जर समाज को साधने की विपक्षी मुहिम कुंद करने का प्रयास किया।

अजीत सिंह पाल

कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक हैं। वह ओबीसी में अति पिछड़ी पाल जाति से आते हैं। यूपी में इस समाज की दो फीसद आबादी है, जो राजनीतिक रूप से जागरूक है, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी में अभी काफी पीछे है।

ajeet singh pal

अजीत सिंह पाल के पिता मथुरापाल भी विधायक रहे हैं। उन्हें पाल समाज का प्रभावशाली नेता माना जाता था। अजीत को पिता की राजनीतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से बढाने वाला माना जाता है। उनको स्वतंत्र प्रभार देकर पाल जाति को पाले में बनाये रखने का प्रयास किया है।