विधान परिषद में अधिकारियों के फोन न उठाने और प्रोटोकॉल की अनदेखी का मुद्दा
The issue of officials not picking up calls
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विधान परिषद में उठा अफसरों के फाेन न उठाने और प्रोटोकॉल पालन न करने का मुद्दा
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उपमुख्यमंत्री ने कही समाधान की बात, आगरा के अधिकारियों से लिया जाएगा स्पष्टीकरण
लखनऊ। विधानसभा के बाद शुक्रवार को विधान परिषद में भी अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाने और प्रोटोकॉल का पालन करने का मामला उठाया गया। शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने बस्ती के डीएम को फोन लगाया तो उनके अर्दली ने उल्टे पूछ लिया,‘एमएलसी कौन होता है’।
सत्ता और विपक्ष, दाेनों के सदस्यों ने उनका समर्थन किया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वे संबंधित जिलों के डीएम से सीधे बात करेंगे। इस पर सभापति ने निर्देश दिए कि सभी जिलों के डीएम से इस विषय में बात कर स्थिति में सुधार लाया जाए।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि डीएम सीयूजी नंबर खुद नहीं उठाते। उनके अर्दली फोन रिसीव करते हैं और जन प्रतिनिधियों के साथ बहस करते हैं। भाजपा के उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने अपने जिले की डीएम को पांच महीनों में कई बार फोन किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि मैडम व्यस्त हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अधिकारी इतने कहां व्यस्त हैं कि उनके पास जन प्रतिनिधियों से बात करने का समय नहीं है। भाजपा के सुरेंद्र चौधरी ने बिजली विभाग के एमडी के पीआरओ द्वारा एमडी बनकर बात करने का गंभीर आरोप लगाया। सपा सदस्य जासमीर अंसारी ने कहा कि अधिकारी जब सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों की नहीं सुन रहे और उन्हें धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो विपक्ष की कौन सुनेगा।
विशेषाधिकार हनन का उठा मामला
निर्दल सदस्य आकाश अग्रवाल की ओर से आगरा में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा 18 फरवरी से आयोजित ताज महोत्सव के विज्ञापन में नाम न होने और निमंत्रण न मिलने पर विशेषाधिकार हनन की बात उठाई गई। इस मामले में सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए।