हरियाणा के धमतान साहिब में हुई थी गुरु तेग बहादुर की पहली गिरफ्तारी
हरियाणा के धमतान साहिब में हुई थी गुरु तेग बहादुर की पहली गिरफ्तारी

हरियाणा के धमतान साहिब में हुई थी गुरु तेग बहादुर की पहली गिरफ्तारी

हरियाणा के धमतान साहिब में हुई थी गुरु तेग बहादुर की पहली गिरफ्तारी

धमतान साहिब,मंजी साहिब,गढ़ी साहिब,कराह साहिब में रखे थे चरण
कुरुक्षेत्र के गांव बारणा की माई ने गुरु जी को भेंट किया था अपने हाथ से काते सूत का चोला

चंडीगढ़, 23 अप्रैल। हिंद की चादर गुरु तेग बहादुर जी का हरियाणा से गहरा नाता रहा है। गुरु महाराज ने हरियाणा के अलग-अलग जिलों में समय-समय पर अपने चरण रखे और धर्म प्रचार किया। संगत के आग्रह पर गुरु महाराज गांवों और शहरों में गए, आज यहां पर ऐतिहासिक गुरुद्वारे स्थापित हैं।
अप्रैल 1665 में गुरु तेग बहादुर साहिब भाई दग्गों जी की विनती पर गांव धमतान साहिब, जींद में पहुंचे। गुरु साहिब ने इस इलाके के लोगों को तम्बाकू उगाने तथा उसका सेवन करने से मना किया। भाई दग्गों ने गुरु साहिब को मुख्य प्रचार केंद्र बनाने के लिए यहां जमीन दी। गुरु साहिब ने इस क्षेत्र में कुएं खुदवाए एवं बाग लगवाए और एक धर्मशाला स्थापित करवाई।
गुरु तेग बहादुर जी दूसरी बार अक्टूबर 1665 में धमतान साहिब पहुंचे। गुरु साहिब की पहली गिरफ्तारी 8 नवंबर 1665 को मुगल हाकिमों द्वारा यहीं पर की गई थी। जींद जिले के नरवाना से 18 किलोमीटर दूर धमतान साहिब में आज गुरुद्वारा स्थापित है।
गुरु साहिब ने इसके बाद जींद जिले के खटकड़ गांव के बाहर अपना डेरा लगाया और संगतों को गुरमति का उपदेश दिया। यहां के एक परिवार की गुर सिक्ख बीबी ने गुरु साहिब की बहुत सेवा की। इस गांव में उस माता के तीन बेटों के नाम पर तीन मुहल्ले हैं। गुरु साहिब की याद में यहां खटकड़ में सुदर गुरुद्वारा साहिब सुशोभित है। इसके बाद गुरु साहिब जींद की धरती पर पहुंचे। इस क्षेत्र में कई कुओं और तालाबों का निर्माण करवाया। मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कराने के लिए युवाओं को हथियारबंद होकर अत्याचार के खिलाफ लडऩे के लिए प्रोत्साहित किया। जींद शहर में गुरु साहिब की याद में आलीशान गुरुद्वारा मंजी साहिब सुशोभित है।

रोहतक शहर में भी रखे थे गुरु साहिब ने चरण
धर्म प्रचार यात्रा करते हुए श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी रोहतक शहर में भी आए थे। यहां तीन दिनों तक एक तालाब के पास ठहरे थे और संगत को धर्म उपदेश दिया था । कलालां मोहल्ले में गुरु साहिब की स्मृति में एक स्थान है, जिसका नाम माई साहिब है। यहां एक माई ने गुरु साहिब को श्रद्धा के साथ भोजन कराया था। गुरु साहिब की स्मृति में गुरुद्वारा बंगला साहिब नौंवी पातशाही सुशोभित है।    

गुरु तेग बहादुर जी की याद में कैथल में स्थापित है गुरुद्वारा मंजी साहिब
कैथल शहर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के सिख रोडा बाढ़ी का घर था। जब भाई रोडा जी ने कैथल में गुरु साहिब के आगमन के बारे में सुना तो उसने नीम साहिब वाले स्थान पर जाकर गुरु साहिब को अपने घर में आने का अनुरोध किया। गुरु साहिब भाई रोडा बाढ़ी की इच्छा के अनुसार उनके घर कुछ दिन ठहरे। 
गुरु साहिब जी सुबह और शाम दोनों समय दीवान लगाते थे। यहां गुरु जी की याद में गुरुद्वारा मंजी साहिब सुशोभित है। प्रचार करते हुए गुरु साहिब ने खानपुर, करनाल में भी अपने चरण डाले। यहां गुरु साहिब ने पीपल के पेड़ के नीचे घोड़े बांधे थे और कुछ समय यहां रूककर विश्राम किया। यहां एक पुराना किला और गुरु साहिब के समय का एक कुआं मौजूद है। खानपुर गांव में गुरुद्वारा श्री गुरु तेगबहादुर साहिब सुशोभित है।

कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारा कराह साहिब में भी पहुंचे थे गुरु तेग बहादुर जी
कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारा कराह साहिब में इससे पहले गुरु नानक देव जी ने भी चरण डाले थे और गुरु हरगोबिंद साहिब भी इस स्थान पर ठहरे थे। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने इस जगह एक पिंगले पर मेहर की। उन्होंने गांव में कुएं और बाग लगाने के लिए धन दिया। भाई उदय सिंह जी ने उस समय तीन सौ बिघे जमीन गुरु घर के नाम लिगवाई थी। इस स्थान पर गुरुद्वारा कराह साहिब सुशोभित है। गुरु साहिब ने 1665 में कुरुक्षेत्र के बारना गांव में भी पवित्र चरण रखे थे। यहां गुरु घर के सेवक भाई सुधा जी की पत्नी ने अपने हाथों से काते गए सूत का चोला गुरु साहिब को भेंट किया था। गुरु साहिब कैथल से चलकर बारना, कुरुक्षेत्र के मार्ग से धर्म प्रचार करते हुए कीरतपुर साहिब पहुंचे। गुरु महाराज 1656 में पटना साहिब जाते हुए कुछ दिन थानेसर में ठहरे थे और धर्म प्रचार किया था। गुरू साहिब 1665 में धमतान साहिब से कीरतपुर साहिब जाते हुए भी यहीं ठहरे थे।