The death of cows in Karnal is worrying

करनाल में गायों की मौत चिंताजनक, सरकार उठाए सख्त कदम

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The death of cows in Karnal is worrying

The death of cows in Karnal is worrying हरियाणा के करनाल में अब तक 60 गायों की मौतें बेहद गंभीर और हृदय विदारक घटना है। प्रदेश वह राज्य है, जिसके साथ प्रचलित है कि जित दूध-दही का खाणा...वह म्हारा हरियाणा। इस दूध-दही के खाणे में गौमाता का भी भरपूर योगदान है। यहां भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया है, जोकि गायों के सबसे बड़े रखवाले थे। राज्य सरकार ने गौ सेवा आयोग की भी स्थापना की हुई है। राज्य में हजारों गौ शालाएं हैं। एक समय गौशालाओं के लिए गांव-गांव घूमकर चंदा एकत्रित किया जाता था और शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में भी गौशालाओं के लिए अलग एक राशि दान की जाती थी। दरअसल, मामला सिर्फ गायों की मौतों का नहीं है, अपितु चिंता इस बात की है कि इन गायों को सल्फास खिलाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया और ऐसा करने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने धर्म परिवर्तित करके इस गुनाह को अंजाम दिया है।

 हरियाणा Haryana हो या देश के दूसरे राज्य, वहां गाय और दूसरे गौवंश सडक़ों पर लावारिस घूमते और कूड़े के ढेर पर मुंह मारते हुए नजर आते हैं। भाजपा ने गाय को सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ा है और इसके संरक्षण की बात कही है। हालांकि राज्य में भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार की ओर से तमाम प्रयास किए गए हैं, गौ सेवा आयोग की स्थापना भी इसी संदर्भ में है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बीते दिनों पानीपत में एक गौशाला के कार्यक्रम में शिरकत करते हुए इसके संकेत दिए थे कि इस बार के बजट में गौशालाओं के संबंध में कुछ अच्छे निर्णय लिए जा सकते हैं। वास्तव में ऐसा करना बेहद जरूरी है, गऊ माताओं की यह दुर्दशा बेहद शर्मनाक है। हालांकि करनाल के फूसगढ़ गौशाला का मामला घोर आपत्तिजनक है।

यह कितना शर्मनाक है कि गायों के अवशेष के लिए उन्हें सल्फास खिलाकर मार दिया गया। इन गायों को यह जहर खिलाने वाले हिंदू से इसाई बने हैं। अब यह शतप्रतिशत डंके की चोट पर नहीं कहा जा सकता कि कोई हिंदू अपराधी ऐसा कृत्य नहीं करेगा। क्योंकि अपराध का धर्म से संबंध नहीं है, लेकिन फिर भी यह विचित्र जान पड़ता है कि किसी ने ऐसा किया। पुलिस ने 60 गायों के हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, इन आरोपियों ने मृत गायों के अवशेषों को देशभर में बेचने का ठेका लिया हुआ है। भारत में अनेक राज्यों में गौहत्या गैरकानूनी है।

उत्तर प्रदेश और हरियाणा Uttar Pradesh and Haryana में इस अपराध के लिए सजा तय है। हालांकि इसके बावजूद गौवंश की हत्या की जा रही है। पशुओं से भरे कैंटर और ट्रकों को पकड़ कर जब उनकी जांच होती है तो उसमें से दर्जनों ऐसे बेजुबान गौवंश मिलते हैं, जिन्हें मांस और चमड़े के लिए ले जाया जा रहा होता है। निश्चित रूप से यह बेहद दुखद घटना होती है, क्योंकि गायों को आज की तारीख में अनुपयोगी समझ लिया गया है। अब तो खेती-किसानी में भी बैलों का उपयोग नहीं रहा है। एक रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि एक गाय से जन्मे बछड़े की हत्या कर दी जाती है, क्योंकि उसका कोई उपयोग नहीं रह गया है, जबकि बछड़ी को इसलिए रख लिया जाता है, क्योंकि वह कम से कम दूध दोहने के काम आ सकती है। यह कितना हेय और घोर आपत्तिजनक गुनाह है। क्या इसके अपराधियों को माफ किया जा सकता है।

करनाल की फूसगढ़ गौशाला का मामला बीते कई दिनों से चर्चा में है। यहां रविवार की रात भी 12 और गायों की मौत हुई है। यह भी कितना हैरतनाक है कि उन्हें रात में ही दफनाने का प्रयास किया  जा रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंच कर ऐसा करने से रोक दिया। इससे पहले 26 जनवरी को गौशाला में यह कांड सामने आया था, जब एक साथ 45 गायों को गुड़ में जहर देकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। हरियाणा सरकार की ओर से इस कांड की जांच के लिए सीआईए-2 को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। सामने आया है कि आरोपी पहले भी गायों को मारते रहे हैं, वे लावारिस गायों को अपना शिकार बनाते थे और गुड़ व चारे में उन्हें जहर दे देते थे। इन गौवंशों के अवशेषों के बदले उन्हें दस से पंद्रह हजार रुपये मिलते थे। निश्चित रूप से यह बेहद संगीन अपराध है।

गायों की कद्र वैसे भी समाज में कम हो गई है, जबकि गायों का दूध, उनका मल-मूत्र हमेशा से पूजनीय रहा है। बीते जमाने में गायों के गोबर से घरों की लिपाई होती थी, वहीं अब भी खाद के रूप में इसका उपयोग संभव है। हरियाणा जैसे राज्य को यह कलंक अपने माथे नहीं लेना चाहिए कि यहां गायों की दुर्दशा हो रही है। राज्य में एक भी गौवंश लावारिस नहीं रहना चाहिए, यह जिम्मेदारी सरकार और जनता दोनों को उठानी चाहिए। गौशालाओं को चंदा दिया जाना चाहिए वहीं गौशालाओं की ओर से भी इसका उपयोग पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। 

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