यूटी पुलिस ने साइबर क्राइम रैकेट का भंडाफोड़ कर तीन आरोपी महिलाओं को दिल्ली से किया काबू
UT Police Busted the Cyber Crime Racket
अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड विभाग की कर्मी बनकर।फर्जी क्रेडिट कार्ड अपग्रेड के नाम पर की धोखाधड़ी
डीजीपी डॉक्टर सागर प्रीत हुडा के दिशा निर्देश।
पकड़ी गई आरोपी महिलाओं के कब्जे से 28 मोबाइल फोन,82 सिम कार्ड,55 एटीएम कार्ड,2 आधार कार्ड,2 पैन कार्ड,8 डोंगल,27 लैंडलाइन फोन,वायरलेस ट्रांसमीटर,पासबुक,चेक बुक,नोटबुक, और अन्य दस्तावेज़ बरामद किए।
रंजीत शम्मी चंडीगढ़।
यूटी पुलिस के डीजीपी डॉक्टर सागर प्रीत हुडा ने पुलिस को सख्त निर्देश दे रखे है कि शहर में किसी भी तरह का कोई क्राइम/नशीला पदार्थ की सप्लाई ना हो।इसके अलावा साइबर क्राइम पर सख्ती से पुलिस काम करे।ताकि शहर के लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस करें। उनका पूरा प्रयास रहेगा कि शहर को क्राइम फ्री सिटी बनाया जाए। डीजीपी के आदेशों की पालना करते हुए यूटी पुलिस का अहम थाना माने जाने वाले थाना साइबर क्राइम पुलिस को उस वक्त एक बड़ी कामयाबी मिली। जब पुलिस ने साइबर क्राइम रैकेट का भंडाफोड़ कर तीन आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पकड़ी गई आरोपी महिलाओं की पहचान दिल्ली की रहने वाली प्रतिभा शर्मा,रोशनी,और जूही सेठी के रूप में हुई है।पकड़ी गई आरोपी महिलाओं के कब्जे से 28 मोबाइल फोन,82 सिम कार्ड,55 एटीएम कार्ड,2 आधार कार्ड,2 पैन कार्ड,8 डोंगल,27 लैंडलाइन फोन,वायरलेस ट्रांसमीटर,पासबुक,चेक बुक,नोटबुक, और अन्य दस्तावेज़ बरामद किए। जानकारी के अनुसार थाना साइबर क्राइम पुलिस को गुप्त सूचना और टेक्निकल तकनीक के जरिए पता चला था कि लोगों से साइबर क्राइम फ्रॉड करने वाली आरोपी महिलाए दिल्ली में सक्रिय है। मामले को गंभीरता से लेते हुए यूटी पुलिस के आला अधिकारियों के दिशा निर्देशों के चलते थाना साइबर क्राइम के डीएसपी ए वेंकटेश की सुपरवीजन में थाना साइबर क्राइम प्रभारी इंस्पेक्टर इरम रिजवी की टीम ने आरोपी महिलाओं को दिल्ली से गिरफ्तार कर एक बड़े मामले को सुलझा कर रैकेट का भंडाफोड़ किया।
क्या था मामला।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता सैक्टर 45 निवासी ने पुलिस को बताया उन्हें एक अज्ञात महिला से व्हाट्सएप और सामान्य कॉल आए। जिसने खुद को अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड विभाग की प्रतिनिधि बताया।उनके बैंक क्रेडिट कार्ड को अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड में बदलने और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के बहाने शिकायतकर्ता को उनके द्वारा भेजे गए एक दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित किया गया। जिसे गूगल फॉर्म का नाम दिया गया था। जिसके परिणामस्वरूप उनके मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच हो गई और उनके बैंक क्रेडिट कार्ड से एक लाख 73 हजार 463 रुपए की धोखाधड़ी से निकासी हो गई।
जांच का विवरण।
पुलिस जांच के दौरान सीएएफ और सीडीआर एनालिसिस आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और केवाईसी वेरिफिकेशन से पता चला कि आरोपी दिल्ली के अशोक नगर और उत्तम नगर इलाकों से काम कर रहे थे।टेक्निकल सबूतों और सीनियर अधिकारियों से इजाज़त के बाद वेस्ट दिल्ली के तिलक नगर में छापा मारा गया।तीन आरोपी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पकड़ी गई आरोपी महिलाओं की पर्सनल तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई के दौरान, बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामान बरामद किया गया।जिसमें 28 मोबाइल फोन बरामद किए। पकड़ी गई आरोपी महिलाओं के खिलाफ 26 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ के थाना साइबर क्राइम पुलिस धारा 419, 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस के तहत दर्ज है। पुलिस के अनुसार पकड़ी गई आरोपी महिलाओं के कब्जे से कई मोबाइल फोन में नाम,पते और मोबाइल नंबर के साथ कस्टमर कॉन्टैक्ट लिस्ट मिलीं।जांच में पता चला कि आरोपी इन डिटेल्स का इस्तेमाल बैंक और क्रेडिट कार्ड अधिकारियों का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने के लिए करते थे।ज़ब्त किए गए मोबाइल फोन उन बैंक खातों से जुड़े पाए गए जिनका इस्तेमाल पीड़ितों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए किया गया था।लगातार पूछताछ के दौरान,आरोपियों ने साइबर धोखाधड़ी में अपनी संलिप्तता का खुलासा किया और अपने साथी की भूमिका के बारे में भी बताया।और अतिरिक्त साथियों की पहचान करने, जाली दस्तावेज़ों का उपयोग करके खोले गए बैंक खातों को वेरिफाई करने और आरोपियों द्वारा धोखा दिए गए पीड़ितों की कुल संख्या का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
साइबर क्राइम पुलिस की जनता के लिए एडवाइजरी।
बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियाँ कभी भी ग्राहकों से कार्ड अपग्रेड या लिमिट बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप, एसएमएस या अनजान ईमेल के ज़रिए भेजे गए लिंक पर क्लिक करने के लिए नहीं कहती हैं।बैंक या क्रेडिट कार्ड अधिकारी होने का दावा करने वाले कॉल करने वालों पर तब तक भरोसा न करें।जब तक आपने ऑफिशियल कस्टमर केयर चैनलों के ज़रिए नंबर वेरिफाई न कर लिया हो।कभी भी ओटीपी सीवीवी नंबर,कार्ड डिटेल्स या बैंकिंग क्रेडेंशियल्स किसी के साथ शेयर न करें।भले ही कॉल करने वाला भरोसेमंद या अर्जेंट लगे। व्हाट्सएप एसएमएस,या सोशल मीडिया के ज़रिए मिले अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। क्योंकि वे मैलवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं या आपके डिवाइस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।अनजान कॉल करने वालों के कहने पर अपने फ़ोन या कंप्यूटर पर स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट-एक्सेस एप्लिकेशन इंस्टॉल न करें।साइबर फ्रॉड की तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें या ऑफिशियल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।परिवार के सदस्यों,खासकर सीनियर सिटिज़न्स को,फेक क्रेडिट कार्ड अपग्रेड, केवाईसी स्कैम और इंपर्सोनेशन कॉल जैसी आम साइबर फ्रॉड तकनीकों के बारे में बताएं।