One year tenure of Mayor is insufficient, Centre will decide on extension

मेयर का एक साल का कार्यकाल नाकाफी, बढ़ाने पर केंद्र करेगा फैसला: प्रशासक गुलाब चंद कटारिया

One year tenure of Mayor is insufficient, Centre will decide on extension

One year tenure of Mayor is insufficient, Centre will decide on extension

One year tenure of Mayor is insufficient, Centre will decide on extension- चंडीगढ़ (साजन शर्मा) I चंडीगढ़ के मेयर का एक साल का कार्यकाल शहर के विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। इतने कम समय में मेयर अपनी विकास योजनाओं को जमीन पर नहीं उतार पाता। यह बात पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित मीट द प्रेस कार्यक्रम के दौरान कही।

प्रशासक ने कहा कि मेयर के कार्यकाल का बड़ा हिस्सा टेंडर प्रक्रिया में ही निकल जाता है और कार्यकाल समाप्त होने तक विकास कार्य पूरे नहीं हो पाते। इसी वजह से मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। कहीं मेयर का सीधे चुनाव होता है तो कहीं एक, ढाई या पांच साल का कार्यकाल है। जिस मॉडल पर सहमति बनेगी, उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा और केंद्र की मंजूरी के बाद ही चंडीगढ़ में लागू किया जाएगा।

मेयर चुनाव में पारदर्शिता पर जोर

मेयर चुनाव में पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर कटारिया ने कहा कि इसे रोकने के लिए रेज योर हैंड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कौन पार्षद पार्टी लाइन से हटकर मतदान कर रहा है। दल-बदल कानून पर उन्होंने कहा कि इसमें बदलाव केवल चंडीगढ़ के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए केंद्र सरकार ही कर सकती है।

मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार देने के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ये पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं, किसी पार्टी के प्रतिनिधि नहीं। उन्हें वोट का अधिकार देने से लोकतांत्रिक व्यवस्था का संतुलन बिगड़ सकता है। इस विषय पर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपनी राय रखेगा।

चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट पर संशय

चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासक ने संकेत दिए कि फिलहाल इस पर विराम लग सकता है। उन्होंने कहा कि जयपुर जैसे शहरों में मेट्रो पर हुए भारी खर्च के मुकाबले रिटर्न संतोषजनक नहीं है। हालांकि प्रोजेक्ट की वायबिलिटी पर अध्ययन कराया जा रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इसके लागू होने की संभावना कम है।

उन्होंने वैकल्पिक समाधान के तौर पर ट्राइसिटी के बाहरी क्षेत्रों तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने की बात कही। मेट्रो या हाई-कैपेसिटी ट्रांजिट को शहर से बाहर तक लाकर वहां से हर 10–15 मिनट में बसें चलाने पर विचार किया जा रहा है। चंडीगढ़ को 25 नई बसें मिल चुकी हैं और कुल 100 बसें मिलनी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो घाटा उठाकर भी जनता को बेहतर सुविधा दी जाएगी।

वायलेशंस, पानी और शहर का स्वरूप

लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड की मांग पर कटारिया ने कहा कि उद्योग, व्यापार और रिहायशी क्षेत्रों में वायलेशंस की समस्या गंभीर है। करीब 5 हजार नोटिस जारी किए गए थे, जिन्हें घटाकर ढाई हजार किया गया है, ताकि उद्योगों का पलायन रोका जा सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि शहर का मूल स्वरूप न बिगड़े।

मनीमाजरा में 24x7 जल आपूर्ति प्रोजेक्ट को उन्होंने अव्यावहारिक बताया। पाइपलाइन बदलने से शहर को वर्षों तक खुदना पड़ेगा। खराब पेयजल पाइपलाइनों की पहचान कर उन्हें तुरंत बदला जाएगा, ताकि इंदौर जैसी स्थिति दोबारा न बने।

वेंडर, आवारा कुत्ते और सुरक्षा

वेंडरों की समस्या पर प्रशासक ने कहा कि अधिकृत वेंडरों को लाइसेंस दिए गए हैं और उन्हें तय स्थानों पर भेजा जा रहा है। जहां कारोबार नहीं चल पा रहा, वहां बेहतर साइट देने पर विचार किया जाएगा। आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार शेल्टर हाउस और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी।

गैंगस्टर और अपराध पर कटारिया ने कहा कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसा सिस्टम बनाना होगा कि वारदात होते ही अपराधी राज्य की सीमा के भीतर ही पकड़ लिए जाएं। पुलिस सक्षम है और उसी अनुरूप कार्रवाई करेगी।

कुल मिलाकर, प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ के विकास, पारदर्शी प्रशासन और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए हर स्तर पर ठोस और व्यावहारिक फैसले लिए जा रहे हैं।   

नौकरी सुरक्षा पर हरियाणा व पंजाब का मॉडल देखना होगा: कटारिया

प्रशासन में आउटसोर्सिंग व कांट्रेक्ट कर्मचारियों की संख्या 25 हजार पहुंचने और उनकी हरियाणा व पंजाब की तर्ज पर 60 साल तक नौकरी की सुरक्षा को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि इस वक्त दुर्भाग्य से सारे देश में आउटसोर्सिंग की व्यवस्था लागू हो गई है। उनकी दृष्टि में सही नहीं है। सरकारें कम वेतन देकर अपने बजट को कंट्रोल  करने का प्रयास करती हैं। जो भी नये मुलाजिम लगाये जा रहे हैं उन्हें अस्थाई या टेंपरेरी तौर पर नौकरी पर रखा जा रहा है। मानवीय दृष्टि से यह गलत है। कम सैलरी में काम वह पूरा करता है।  हरियाणा व पंजाब में कैसे उन्हें 60 साल तक नौकरी की सुरक्षा दी  गई है, इस पर अध्ययन किया जाएगा ताकि वह भी नौकरी छूटने के खौफ से खुद को मुक्त कर सकें और रिटायरमेंट तक बेधडक़ काम कर सकें।

400 रुपये में नौकरी लगा, 200 रुपये तौला था सोना: गुलाब चंद कटारिया

पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में अपने व्यक्तिगत जीवन के कई राज खोले। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आए। शुरू से वह आरएसएस से जुड़े थे। अपने व्यवसायिक जीवन के पहले चरण में वह दस जमा दो स्कूल में ज्योगरफी के लेक्चररर बने। इस दौरान वह संघ की शाखा में जाते थे। इस पर प्रधानाचार्य ने ऐतराज उठाया कि एक चयन कर लो। या तो शाखा में जाओ या फिर पढ़ाने का काम करो। बस यहां केवल तीन साल तक ही नौकरी की। 400 रुपये में यह नौकरी की लेकिन तब सोना महज 200 रुपये तौला था। इसके बाद प्राइवेट स्कूल में नौकरी लगा लेकिन अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया।

एलएलबी भी  की ताकि कहीं काम आ सके लेकिन अंतिम ईयर के दौरान इमरजेंसी लग गई और जेल जाना पड़ा। 1973-74 में विद्यार्थी परिषद से जुड़ा रहा। उदयपुर के सारे कालेजों में विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार प्रेसिडेंट बने। 1977 से लेकर सक्रिय राजनीति में 8 बार विधायक रहा। एक लोकसभा व विधानसभा का चुनाव हारा। लोकसभा का चुनाव जब हारा जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे। विधानसभा चुनाव इंदिरा गांधी के समय में हारा था।

इतने साल राजनीति की लेकिन अपने पल्ले से एक भी पैसा खर्च नहीं किया। हमेशा जनता ने मदद का हाथ बढ़ाया। हमेशा पब्लिक और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव कर ही राजनीति आगे बढ़ाई। यही कोशिश चंडीगढ़ में भी कर रहे हैं। पंजाब के छह जिलों में सरहद पर गया। पांच जिलों में विलेज कमेटी की मीटिंग हुई। मां-बहनों ने खड़े होकर केवल एक बात बोली कि बच्चों को नशे की दलदल से बचाओ। उसे मजबूरी में ड्रग्स देनी पड़ती हैं। चोरी करता है। मारपीट करता है। यह गंभीर समस्या लगी। इसको लेकर पैदल मार्च शुरू किया। इस मुहिम को सफल बनाने के लिये जनता से जुडऩे का सामूहिक प्रयास करना होगा, तभी इंपेक्ट आएगा। लोगों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर उसका हल ही उनका मंतव्य है।