सेक्टर 26 सामुदायिक केन्द्र अब वीर सावरकर सामुदायिक केन्द्र के नाम से जाना जाएगा
सेक्टर 26 सामुदायिक केन्द्र अब वीर सावरकर सामुदायिक केन्द्र के नाम से जाना जाएगा

सेक्टर 26 सामुदायिक केन्द्र अब वीर सावरकर सामुदायिक केन्द्र के नाम से जाना जाएगा

सेक्टर 26 सामुदायिक केन्द्र अब वीर सावरकर सामुदायिक केन्द्र के नाम से जाना जाएगा

- हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री ज्ञानचंद गुप्ता ने विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन्

- हर सामुदायिक केन्द्र में शहीदों की बायोग्राफी पर आधारित पुस्तकें रखी जाएंगी-गुप्ता

पंचकूला, 28 मई-  सेक्टर 26 स्थित सामुदायिक केंद्र अब वीर सावरकर सामुदायिक केंद्र के नाम से जाना जायेगा। हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री ज्ञानचंद गुप्ता ने आज विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और सेक्टर 26 के कम्युनिटी सेंटर का नामकरण वीर सावरकर के नाम पर किया। 

सेक्टर 26 सामुदायिक केन्द्र में नगर निगम द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि उन्होंने पंचकूला के सभी सामुदायिक केन्द्रों का नाम शहीदों के नाम पर रखे जाने की घोषणा की है। उनकी घोषणा के अनुरूप कई सामुदायिक केन्द्रों का नामकरण शहीदों नाम पर किया जा चुका है और इसी कड़ी में आज सेक्टर 26 के सामुदायिक केन्द्र का नामकरण क्रांतिकारी वीर सावरकर के नाम पर किया गया है। उन्होंने कहा कि हर सामुदायिक केन्द्र में शहीदों की बायोग्राफी पर आधारित पुस्तकें रखी जाएंगी ताकि हमारी युवा पीढी उनके द्वारा दी गई शहादत के बारे में जानकारी हासिल कर सके और प्रेरणा ले सके। 

उन्होंने कहा कि आज हम शहीदों की शहादत की बदौलत आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। करतार सिंह सराभा, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, मदनलाल ढींगरा जैसे हजारों नौजवानों ने देश के लिए भरी जवानी में शहादत देकर अपना सर्वस्व देश पर न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा शहीदों के मन में पीड़ा थी कि अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों को किस प्रकार से तोड़ा जाए। 

वीर सावरकर ने अपनी किताब ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम-1857’ के माध्यम से अनेकों भारतीय युवाओं में अंग्रेजों के विरूद्ध देशभक्ति का जज्बा पैदा किया। उनमें से एक शहीद मदन लाल ढींगरा भी थे। उन्होंने कहा कि ऐसी ही असंख्य युवाओं ने आजादी की लड़ाई में बढ-चढ कर भाग लिया और देश को आजाद करवाने के लिए अपने जीवन की आहूति दे दी। अंग्रेजों द्वारा न केवल इस पुस्तक पर पाबंदी लगाई गई बल्कि वीर सावरकर को दो बार काला पानी की सजा सुनाई और अनेकों यातनाएं दी। उन्हांने कहा कि वीर सावरकर पहले ऐसे क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश के विकास का चिंतन किया। बंदी जीवन समाप्त होते ही उन्होंने कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। 
श्री गुप्ता ने बताया कि उन्हें दो बारे सेल्यूलर जेल का दौरा करने का अवसर मिला। उन्होंने वहां देखा कि किस प्रकार सेल्यूलर जेल की छोटी सी कोठड़ी में क्रांतिकारियों को रखा जाता था और उन्हें अनेक  यातनाएं दी जाती थी। उन्होंने कहा कि आज कुछ बाहरी ताकतंे देश की एकता व अखण्डता को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। हमारी युवा पीढी को उनसे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वे देश के नाम अपना जीवन न्यौछावर करने वाले शहीदों और देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों को सेल्यूट करते हैं जिनकी वजह से हम अपने घरों मे चैन की नींद सोते हैं। 

इस अवसर पर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त संयम गर्ग, अधीक्षक अभियंता विजय गोयल, लेखक एवं साहित्यकार प्रोफेसर एमएम जुनेजा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष उमेश सूद, मंडल अध्यक्ष संदीप यादव, पार्षद संदीप शाही, सोनिया सूद, हरेन्द्र मलिक, सलीम खान, सुरेश वर्मा, जय कौशिक, नरेन्द्र लुबाणा, राकेश बाल्मिकी, सुनीत सिंगला तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।